क्या है 'रेडियो ताइसो', जिसे जापानी मानते हैं अपनी लंबी उम्र का सबसे बड़ा आधार?
जापान में 'रेडियो ताइसो' नाम का 100 साल पुराना ग्रुप एक्सरसाइज रिचुअल है, जिसे लोग अपनी लंबी उम्र और अच्छी सेहत का आधार मानते हैं। ...और पढ़ें

सिर्फ एक्सरसाइज नहीं, 'दोस्ती' का जरिया भी है रेडियो ताइसो (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। दुनिया भर में जापानी लोग अपनी शानदार सेहत और लंबी उम्र के लिए मशहूर हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे का असली कारण क्या हो सकता है? इसका जवाब हर सुबह 6:30 बजे जापान के घर-घर, दफ्तरों और पार्कों में बजने वाली एक खास पियानो धुन में छिपा है।
जी हां, टोक्यो के किबा पार्क जैसी जगहों पर सुबह-सुबह धुंध के बीच सैकड़ों लोग एक साथ हवा में हाथ लहराते हुए कसरत करते दिख जाएंगे। यह न तो कोई सैन्य अभ्यास है और न ही कोई ड्रिल। दरअसल, यह जापान की लगभग एक सदी पुरानी कसरत करने की अनूठी परंपरा है, जिसे 'रेडियो ताइसो' के नाम से जाना जाता है।

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सेहत का 10 मिनट वाला कैप्सूल
साल 1928 से लगातार चले आ रहे इस सामूहिक योग और व्यायाम का तरीका बेहद सीधा और सरल है। इस रूटीन के लिए किसी भी तरह के भारी-भरकम जिम उपकरणों की जरूरत नहीं है। रेडियो या मोबाइल पर म्यूजिक बजते ही लोग अपनी कसरत शुरू कर देते हैं।
यह पूरा व्यायाम सिर्फ 10 मिनट का होता है। इसमें स्ट्रेचिंग, कमर को घुमाना और हाथों की मूवमेंट जैसे 12 बहुत ही आसान स्टेप्स शामिल होते हैं। 'रेडियो ताइसो' की सबसे अच्छी बात यह है कि इसे छोटे बच्चों से लेकर ऑफिस जाने वाले युवाओं, बुजुर्गों और यहां तक कि व्हीलचेयर पर बैठे व्यक्तियों द्वारा भी आसानी से किया जा सकता है।
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अकेलापन मिटाने और लंबी उम्र का साधन
आंकड़े बताते हैं कि जापान में 99,763 लोग ऐसे हैं जो 100 साल की उम्र का आंकड़ा पार कर चुके हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि 'रेडियो ताइसो' बुजुर्गों को घर की चारदीवारी से बाहर निकलने के लिए प्रेरित करता है। बाहर आकर लोगों से मिलने-जुलने के कारण वे डिप्रेशन और अकेलेपन जैसी मानसिक समस्याओं से सुरक्षित रहते हैं। यह अभ्यास न केवल उनके जोड़ों के दर्द में आराम देता है, बल्कि दोस्तों और करीबियों से मुलाकात करने का एक शानदार अवसर भी बन जाता है।

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रेडियो ताइसो के बिना अधूरी है जापानियों की सुबह
इस परंपरा का इतिहास किसी फिल्म की कहानी जैसा है। दरअसल, इसकी शुरुआत 1928 में जापान के सम्राट हिरोहितो के राज्याभिषेक के दौरान हुई थी। हैरानी की बात यह है कि इसका मूल विचार अमेरिका के एक बीमा कार्यक्रम से प्रेरित था।
जब द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान को हार का सामना करना पड़ा, तो अमेरिका ने इस कसरत को 'तानाशाही' सोच का प्रतीक मानकर इस पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी थी। हालांकि, जापानी जनता को इस कसरत से इतना लगाव था कि लोगों की भारी मांग को देखते हुए साल 1951 में इसे फिर से बहाल कर दिया गया। तब से लेकर आज तक, 'रेडियो ताइसो' की धुन जापानियों की सुबह और उनके स्वस्थ जीवन का सबसे अटूट हिस्सा बनी हुई है।