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वैज्ञानिकों की गलत तरकीब से 50 साल पहले बना था 'नरक का दरवाजा'! पढ़ें सुलगते क्रेटर की अनोखी दास्तान

Published: Sun, 09 Aug 2026 07:00 AM (IST)

दुनिया में आपने धधकते ज्वालामुखी तो देखें होंगे लेकिन नरक के इस दरवाजे के बारे में मुश्किल ही कोई जानता है।

50 साल से धधक रहा है 'नरक का दरवाजा' (Image Source: AI Generated)

50 साल से धधक रहा है 'नरक का दरवाजा' (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। कभी-कभी लगता है इस दुनिया के बारे में जितना जानो उतना कम है। इसमें भी बात अगर घूमने की आए तो हम उन जगहों के बारे में जानना चाहते हैं, जो खूबसूरत और रोमांच से भरी हुई हों। इन सब के बीच एक ऐसी जगह है जिसका खौफनाक मंजर दिल दहला सकता है, इसके बावजूद यह मशहूर है। हम बात कर रहे हैं तुर्कमेनिस्तान के 'नरक के दरवाजे’ की। 

50 साल से धधक रहा है 'नरक का दरवाजा'

सेंट्रल एशियाई देश तुर्कमेनिस्तान के काराकुम रेगिस्तान में स्थित दरवाजा गैस क्रेटर जिसे दुनियाभर में ‘नरक का दरवाजा’ या ‘गेट टू हेल’ कहा जाता है। वहीं, इसका ऑफिशियल नाम ‘शाइनिंग ऑफ कराकुम’ है। यह दरवाजा तुर्कमेनिस्तान की राजधानी अशगाबाद से करीब 270 किमी. की दूरी पर स्थित है। बता दें कि यह जगह पिछले 50 सालों से आग में धधक रही है। रेगिस्तान के बीचों-बीच बना यह गड्ढा 70 मीटर चौड़ा और 30 मीटर तक गहरा है। 

क्या है इसके पीछे की कहानी? 

नरक के दरवाजे की यह कहानी साल 1971 से जुड़ी हुई है। उस दौरान यहां सोवियत संघ (वर्तमान का रूस) के जियोलॉजिस्ट्स नेचुरल गैस के लिए खुदाई कर रहे थे। ड्रिलिंग करते हुए उनकी मशीन एक विशाल में गुफा में धंस गई, यह गड्ढा मिथेन गैस से भरा हुआ था। 

देखते ही देखते गैस का रिसाव होना शुरू हो गया, अब जियोलॉजिस्ट्स को डर था कि कहीं ये मिथेन गैस आसपास के वातावरण में न फैल जाए। इससे बचने के लिए उन्होंने तरकीब निकाली और गड्ढे में आग लगा दी लेकिन यह तरकीब उल्टी पड़ गई। गैस का भंडार इतना बड़ा था कि आग जलती रही और आज तक जल रही है। यहां बताते चलें कि मध्य एशिया में स्थित तुर्कमेनिस्तान एक लैंड लॉक्ड देश है, जो गैस भंडार के मामले में दुनिया में चौथा स्थान रखता है।

जॉर्ज कौरोनिस थे यहां जाने वाले पहले शख्स

नरक के दरवाजे में सबसे पहला विजिट साल 2013 में जॉर्ज कौरोनिस नामक एक्सप्लोरर ने किया था, इसके लिए उन्होंने दो साल तक योजना बनाई थी लेकिन वहां जाने के बाद उन्हें केवल 17 मिनट का ही समय दिया गया। कौरोनिस के मुताबिक, यह जगह वाकई में काफी डरावनी थी। इसके बाद तो यह जगह टूरिस्ट के लिए घूमने की जगह बन गई। आज यह जगह तुर्कमेनिस्तान के लिए टूरिज्म में कमाई का बहुत स्त्रोत है।

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