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बांसुरी की धुन और ढोल की थाप: चीन के इस 2000 साल पुराने ‘यी’ समुदाय की है अनूठी दुनिया

Published: Fri, 26 Jun 2026 07:00 PM (IST)

90 लाख की आबादी वाला यह समुदाय चीन का छठा सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय माना जाता है।

चीन का 2000 साल पुराना यी समुदाय (Image Source: AI Generated)

चीन का 2000 साल पुराना यी समुदाय (Image Source: AI Generated)

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संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज हम बात करेंगे चीन के एक ऐसे समुदाय की, जिसका इतिहास 2000 साल पुराना है। चीन के इस प्राचीन समुदाय का नाम 'यी' है। बता दें कि चीन ने कुल 56 जातीय समूहों को ऑफिशियल माना है और यी समुदाय इन्हीं में से एक है। 90 लाख की आबादी वाला यह समुदाय चीन का छठा सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय माना जाता है। 

प्राचीन कियांग जनजातियों के वंशज 

यी समुदाय के लोग चीन के पहाड़ी इलाकों खासतौर से यूनान, सिचुआन, गुइझोउ और गुआंग्शी में रहते हैं। बताते चलें कि ये सभी जगहें चीन के दक्षिण पश्चिम क्षेत्र का हिस्सा हैं। हजारों साल पुराने इस समुदाय को कियांग जनजातियों का वंशज बताया जाता है।

भाषा और पहनावा 

वैसे तो ‘यी’ समुदाय की भाषा और लिपि का नाम ‘यी’ ही है लेकिन इनकी कई क्षेत्रीय बोलियां भी हैं। जान लेने वाली बात यह है कि इस समुदाय की अपनी प्राचीन लिखित परंपरा है। इनकी वेशभूषा और पहनावे की बात करें तो यी समुदाय के लोग रंगीन और आकर्षक कपड़े पहनते हैं। इनमें भी महिलाएं जहां रंग-बिरंगे कढ़ाईदार कपड़े पहनती हैं तो पुरुषों को काले और गहरे रंग के कपड़े पहनना लुभाता है। महिलाओं के आभूषणों में चांदी की जूलरी और खास तरह की टोपी भी शामिल होती है। 

यी समुदाय की कहानी 

यी समुदाय से जुड़ी एक पौराणिक कहानी है जो बेहद दिलचस्प है। दरअसल, पुरानी मान्यताओं के अनुसार इस जीवन की उत्पत्ति जल से हुई और यह जल बर्फ के पिघलने से बना। इसी जल के टपकते हुए पानी से नी यानी यी नामक प्राणी का जन्म हुआ। यहां बताते चलें कि नी जिसका मतलब काला होता है, यी समुदाय का ही दूसरा नाम है। इस तरह नी ने सभी को जन्म दिया। इस समुदाय में काला रंग शुभता का प्रतीक माना जाता है। 

यी समुदाय करता है प्रकृति की पूजा

यी समुदाय के लोग पर्वतों, नदियों, पेड़-पौधों और अपने पूर्वजों की पूजा करते हैं। यहां जब भी कोई धार्मिक अनुष्ठान होता है तो इस समुदाय का बिमो नामक पुजारी सभी अनुष्ठान पूरे करता है। वहीं, आजकल यी लोग बौद्ध, ईसाई और बाकी धर्मों को भी मानने लगे हैं। 

नृत्य और गायन 

यी संस्कृति में नृत्य और गायन की भी समृद्ध परंपरा है। इनके लोकसंगीत में बांसुरी, ढोल और तार वाले इंस्ट्रूमेंट शामिल हैं। शादी, जन्म और खास मौकों पर इस समुदाय के लोग सामूहिक रूप से नृत्य और गायन में हिस्सा लेते हैं। 

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