लावणी से बिल्कुल अलग है ये मराठी लोक नृत्य, दिलचस्प है तालियों की गूंज पर होने वाले 'फुगड़ी' डांस की कहानी
फुगड़ी महाराष्ट्र का मशहूर लोक नृत्य है, जिसमें सिर्फ महिलाएं ही हिस्सा लेती हैं।
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क्या है फुगड़ी की कहानी? (AI Generated Image)

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। महाराष्ट्र की नृत्य सिर्फ लावणी तक ही सीमित नहीं है। यहां की लोक संस्कृति में फुगड़ी नृत्य की भी खास जगह है। ये महाराष्ट्र के साथ-साथ गोवा का भी लोक नृत्य है, जिसे खासतौर से भाद्रपद के महीने में किया जाता है।
इस नृत्य को सिर्फ महिलाएं ही करती हैं, वो भी बिना किसी वाद्य यंत्र के सिर्फ ताली बजाकर। ये नृत्य मराठी संस्कृति का अहम हिस्सा है, लेकिन क्या आपको पता है इसकी शुरुआत कैसे हुई थी? आइए जानें फुगड़ी नृत्य की कहानी।
क्या है फुगड़ी नृत्य का इतिहास?
फुगड़ी नृत्य का इतिहास काफी पुराना है और गांव के इलाकों से जुड़ा है। पुराने समय में दिनभर के कामों के बाद या पानी भरकर लौटते समय, महिलाएं अपना दिल बहलाने और थकान मिटाने के लिए साथ में इकट्ठा होती और तालियां बजाकर नृत्य करतीं। इसी से फुगड़ी नृत्य की शुरुआत हुई।
वक्त के साथ-साथ ये साधारण लोकनृत्य महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र के त्योहारों और शुभ अवसरों का हिस्सा बन गया। भाद्रपद में गणेशोत्सव और मंगलागौरी व्रत के दौरान इस नृत्य को खास रूप से किया जाता है।
क्यों किया जाता है फुगड़ी?
फुगड़ी नृत्य के पीछे धार्मिक और सामाजिक कारण छिपे हैं। गणेशोत्सव जैसे त्योहारों और शुभ अवसरों पर महिलाएं भगवान को प्रसन्न करने के लिए फुगड़ी नृत्य करती हैं। इसके अलावा, ये नृत्य लोगों को एक साथ लाने का भी काम करता है। हर वर्ग की महिलाएं एक साथ इकट्ठा होती हैं और साथ मिलकर फुगड़ी करती हैं।
कैसे किया जाता है फुगड़ी नृत्य?
फुगड़ी नृत्य बाकी डांस से काफी अलग होता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि बिना किसी वाद्य यंत्र के महिलाएं खुद से गीत गाती हैं और तालियां बजाकर इस नृत्य को करती हैं। ये नृत्य करते समय फूं-फूं की सांसों की आवाज निकलती है, जिससे इस नृत्य का नाम फुगड़ी पड़ा।
इस नृत्य को महिलाएं गोल घेरे में गोल घूमते हुए करती हैं। साथ ही, हाथों की तालियां और पैरों की ताल मिलाकर इस नृत्य को लयबद्ध अंदाज में किया जाता है।
फुगड़ी की पोशाक कैसी होती है?
इस नृत्य के लिए महिलाएं पारंपरिक मराठी स्टाइल में रंग-बिरंगी साड़ियां पहनती हैं, जिससे डांस के मूवमेंट्स करना आसान हो जाता है। इसके अलावा, महिलाएं साथ में पारंपरिक मराठी नथ और बाकी गहने पहनती हैं। गोवा में इस डांस को करते समय महिलाएं साड़ी को थोड़ा ऊंचा बांधती हैं और दाएं कंधे पर इसकी एक गांठ लगाती हैं। साथ ही, कमर पर सफेद रंग का गमछा बांधकर फुगड़ी नृत्य करती हैं।
