कदम-कदम बढ़ाए जा….नेताजी बोस की सेना का वो तराना जो फिल्म 'समाधि' ने बना अमर! आज भी थिरकती है इंडियन आर्मी
कदम-कदम बढ़ाए जा.....देशभक्ति गाना कहीं न कहीं लाउडस्पीकर पर सुनने को मिल जाता है, पर क्या आप इस इसकी कहानी जानते है?

आजाद हिन्द फौज का शंखनाद था यह गीत 'कदम-कदम बढ़ाए जा' (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। 15 अगस्त से कुछ दिन पहले ही देशभक्ति गीतों की पूरी प्लेलिस्ट तैयार हो जाती है, जिसमें 'कदम कदम बढ़ाए जा' गाना भी जरूर शामिल होता है। हमने इस गाने को तो कई बार सुना लेकिन इसे महज एक देशभक्ति गीत समझकर, पर बहुत कम लोग जानते हैं इसके पीछे की रोचक कहानी।
आजाद हिन्द फौज का शंखनाद था यह गीत
'कदम कदम बढ़ाए जा' को केवल देशभक्ति गीत समझने की भूल न करें क्योंकि यह नेताजी सुभाष चंद्र की आजाद हिन्द फौज का शंखनाद था। दरअसल, इसी गाने से द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अंग्रेजों की नींव डगमगा गई थी। नेताजी बोस ने अपनी जो सेना तैयार की थी, यह गाना उसी सेना का मार्च सॉन्ग था। पूरे जोश और जुनून के साथ जब यह सेना 'कदम कदम बढ़ाए जा' गीत गाती थी तो सभी के मन में देशभक्ति की भावना जग जाती थी।
लक्ष्मी सहगल ने सुझाया था गीत
सिंगापूर की सबसे ऊंची इमारत पर जब आजाद हिन्द फौज का आगाज हुआ तो उस समय नेताजी बोस को अपनी सेना के लिए एक देशभक्ति गीत चाहिए था। लक्ष्मी सहगल ने इस गीत को सुझाया पर अब भी एक चुनौती थी इसे कौन गाएगा। इस बात की सूचना जैसे ही जेल में बंद एक फौजी तक पहुंची तो उसने गीत गाने की इच्छा जताई।
नेताजी ने उस फौजी को बुलाकर कहा कि इसे कुछ इस तरह से गाया जाए जिससे इस इमारत की छत उड़ जाए और आसमान दिखने लगे। फौजी ने यह सुन अपने बोल शुरू किये ‘कदम-कदम बढ़ाए जा, खुशी के गीत गाए जा’। इसे सुनकर वहां मौजूद सभी के रोंगटे खड़े हो गए और तभी नेताजी बोस ने तय किया कि आजादी के बाद इस कदमताल गीत को लाल किले पर गाया जाएगा। कहते हैं उस समय गीत की लोकप्रियता बढ़ते देख अंग्रेजों ने इसपर बैन लगा दिया था।
समाधि फिल्म का है गाना
अंग्रेजों के जाने के बाद साल 1950 में समाधि फिल्म रिलीज हुई थी, इस फिल्म में पहली बार यह गीत देशभक्ति के गाने के रूप में लोगों के बीच फेमस हुआ। गाने के लेखक पंडित वंशीधर थे और राम सिंह ठाकुर ने इसे कम्पोज किया था। सबसे खास बात कि आजादी के इतने सालों बाद भी यह गाना आर्मी मार्च के दौरान गाया जाता है।

