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जहां थीं जेल की सलाखें, वहीं पर बना है भारत का पहला IIT, ऐसी है देश के सबसे बड़े इंजीनियरिंग संस्थान की कहानी

Published: Tue, 08 Sep 2026 04:54 PM (IST)

भारत के पहले आईआईटी का इतिहास किसी बड़ी इमारत से नहीं, बल्कि अंग्रेजों की जेल से जुड़ा हुआ है।

भारत का पहला IIT खड़गपुर (Image Source: AI Generated)

भारत का पहला IIT खड़गपुर (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज हर इंजीनियरिंग करने वाले स्टूडेंट का सपना IIT तक पहुंचना है। किसी विषय पर चर्चा के बीच जब भी इस संस्थान का जिक्र आता है तो हम बड़े से कैंपस, हाई टेक लैब्स और बड़ी-बड़ी बिल्डिंग्स के बारे में सोचने लगते हैं। 

ऐसे में कोई कल्पना भी नहीं कर सकता कि इस संस्थान की शुरुआत एक जेल से हुई थी। आइए आपको भारत के पहले आईआईटी की यह अनोखी कहानी बताते हैं। 

भारत का पहला IIT खड़गपुर 

1947 में देश आजाद हुआ तो भारत को अपनी नींव मजबूत करने के लिए इंजीनियर्स की खास कमी महसूस हुई। सबसे दिलचस्प बात यह है कि देश के दिग्गजों को पहले से ही इस जरूरत का आभास था, तभी तो 1946 से ही एक बहतरीन इंजीनियर संस्थान बनाने की कवायद शुरू हो गई थी। 

उस समय सर जोगेंद्र सिंह ने एक समिति का गठन किया, जिसकी अध्यक्षता का जिम्मा सर नलिनी रंजन सरकार को सौंपा गया, यही वजह है कि इसे बाद में एन.आर. सरकार समिति के नाम से भी जाना गया। इस समिति ने उस वक्त अमेरिका के मशहूर MIT जैसे संस्थानों की देखादेखी भारत में भी संस्थान बनाने की सिफारिश की थी। 

6 साल बाद सुझाव अमल में लाए गए 

जब देश आजाद हुआ तब साल 1950 में फैसला लिया गया कि देश का पहला आईआईटी पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में होगा। यह परिसर कोई बड़ा सा संस्थान नहीं था, बल्कि अंग्रेजों के जमाने का एक डिटेन्शन कैंप था। उस समय इसे हिजली डिटेंशन कैंप कहा जाता था। औपचारिक रूप से इस संस्थान की स्थापना 18 अगस्त 1951 को तत्कालीन शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद ने की थी। 

स्वतंत्रता सेनानियों की थी जेल 

हिजली डिटेंशन कैंप में स्वतंत्रता सेनानियों को ब्रिटिश अधिकारी बिना किसी मुकदमे के नजरबंद करके रखा करते थे। यहां कई नामी क्रांतिकारी कैद में भी रहे। हिजली से जुड़ा एक गोलीकांड भी काले इतिहास के रूप में खूब सुर्खियों में रहा। कहते हैं 16 सितंबर 1931 को दो निहत्थे कैदियों को अंग्रेजों ने गोली मार दी थी, जिनका नाम संतोष कुमार मित्रा और तारकेश्वर सेनगुप्ता था। 

ऐसे मिला आईआईटी को राष्ट्रीय महत्व का दर्जा 

IIT के इतिहास में दिलचस्प मोड़ तब आया, जब 1956 में संसद ने 'भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (खड़गपुर) एक्ट' पारित किया। इसके बाद आईआईटी खड़गपुर की तर्ज पर देश में बाकी आईआईटी संस्थानों का निर्माण किया गया। फिर देखते ही देखते 1958 से 1961 के बीच आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी मद्रास, आईआईटी कानपुर और आईआईटी दिल्ली जैसे संस्थान भी अस्तित्व में आए।