फोन देखे बिना खाना नहीं खाता बच्चा? स्क्रीन टाइम कंट्रोल करने में बेहद काम आएंगे ये असरदार तरीके
आजकल बच्चों में स्मार्टफोन की लत बढ़ रही है, जो उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए हानिकारक है।

स्मार्टफोन की लत से बच्चों की सेहत को नुकसान (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेसक्, नई दिल्ली। आजकल के समय में स्मार्टफोन बच्चों की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। ऑनलाइन पढ़ाई से लेकर एंटरटेंमेंट तक, बच्चे हर चीज के लिए फोन पर निर्भर हो रहे हैं। जरूरत से ज्यादा स्मार्टफोन का इस्तेमाल बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत पर बुरा असर डाल रहा है।
बच्चे अब बाहर खेलने जाने के बजाय अपने फोन में ही गेम्स खेलते रहते हैं। अगर आपका बच्चा भी दिनभर फोन से चिपका रहता है, तो जरूरी है कि आप उनकी इस लत को छुड़ाएं। आइए जानें बच्चों की स्मार्टफोन की लत छुड़वाने के लिए कुछ असरदार टिप्स।
स्क्रीन टाइम सेट करें
बच्चों की स्क्रीन टाइम की आदत को सीमित करने के लिए घर में कुछ नियम सेट करना जरूरी है। बच्चों के रोजाना का स्क्रीन टाइम सेट करें और उससे ज्यादा उन्हें फोन इस्तेमाल न करने दें। साथ ही, कुछ समय फोन की बिल्कुल मनाही करें, जैसे खाना खाते समय, सोने से एक घंटा पहले या खेलते समय। शुरुआत में बच्चा इन नियमों को न मानने की जिद्द कर सकता है, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें इसकी आदत हो जाएगी।
फिजिकल एक्टिविटीज में बिजी रखें
बच्चे अक्सर अपनी बोरियत मिटाने के लिए स्मार्टफोन की तरफ भागते हैं। अगर आप चाहते हैं कि वो फोन का इस्तेमाल न करें, तो उन्हें फिजिकली बिजी रखें। उन्हें खेलने के लिए बाहर भेजें, साइकिल चलाना सिखाएं और डांसिंग जैसी हॉबीज विकसित कराएं। इससे वे फिजिकली एक्टिव भी रहेंगे, उनकी स्लीप साइकिल में भी सुधार होगा और वो ज्यादा फोन भी इस्तेमाल नहीं करेंगे।
खुद रोल मॉडल बनें
बच्चे अपने आस-पास के माहौल से ही सीखते हैं। अगर आप खुद दिनभर फोन में लगे रहेंगे, तो बच्चे भी फोन से चिपके रहेंगे। इसलिए ऑफिस से घर लौटने के बाद सोशल मीडिया स्क्रॉल करने के बजाय अपने बच्चों के साथ क्वालिटी समय बिताएं। उनके साथ बैठकर बातें करें, उनके साथ कैरम, लूडो या स्क्रैबल जैसे बोर्ड गेम्स खेलें। इससे आपका बॉन्ड भी मजबूत होगा और बच्चे स्मार्टफोन से भी दूर रहेंगे।
तकनीक का सही इस्तेमाल सिखाएं
आज के समय में स्मार्टफोन से बिल्कुल दूर रहना मुमकिन नहीं है, लेकिन इसे कंट्रोल जरूर किया जा सकता है। बच्चों को भी यही बात सिखाएं। फोन में पेरेंटल लॉक या डिजिटल वेलबींग ऐप्स डाउनलोड करें। इससे आप कंट्रोल कर पाएंगे कि बच्चे क्या और कितना देखते हैं। साथ ही, बच्चों को सिखाएं भी कि स्मार्टफोन का बहुत ज्यादा इस्तेमाल नुकसानदेह है।
