डेस्क जॉब वाले ध्यान दें! टहलने के लिए हर घंटे निकालें 5 मिनट, कम होगा लगातार बैठने का नुकसान
डेस्क जॉब में घंटों बैठे रहने से होने वाली सेहत से जुड़ी समस्याओं को कम करने के लिए एक शोध ने आसान उपाय बताया है। ...और पढ़ें

9 से 5 की जॉब में भी सेहत रहेगी चकाचक! (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
प्रेट्र, नई दिल्ली। आजकल के वर्किंग कल्चर में ऑफिस में घंटों एक ही कुर्सी पर बैठे रहना लोगों की मजबूरी बन गया है। लगातार बैठे रहने की इस आदत से कमर दर्द के साथ-साथ स्वास्थ्य से जुड़ी कई अन्य परेशानियां भी शरीर को घेरने लगती हैं। हालांकि, एक हालिया शोध ने इस बड़ी परेशानी का बहुत ही आसान और कारगर समाधान बताया है।
हर 1 घंटे में निकालें 5 मिनट
'ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन' में प्रकाशित एक नई रिसर्च के मुताबिक, अगर आप लंबे समय तक बैठे रहने से होने वाले स्वास्थ्य नुकसानों से बचना चाहते हैं, तो हर एक घंटे में मात्र पांच मिनट के लिए जरूर टहलें। शोध में बताया गया है कि यह 5 मिनट का पैदल चलना, व्यावहारिकता और प्रभावशीलता के बीच सबसे बेहतरीन संतुलन बनाता है।
काम पर असर नहीं, बल्कि मूड होगा शानदार
अक्सर लोगों को लगता है कि काम के बीच में ब्रेक लेने से उनकी परफॉर्मेंस खराब होगी, लेकिन इस अध्ययन के नतीजे इससे बिल्कुल अलग हैं। शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि:
- इन छोटे-छोटे ब्रेक्स से काम के परफॉर्मेंस पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है।
- इससे मूड में काफी सुधार आता है।
- काम के दौरान होने वाली थकान भी कम होती है।
गंभीर बीमारियों का खतरा होगा कम
लंबे समय तक एक ही जगह पर बिना चले-फिरे बैठे रहना आज के समय में एक बहुत बड़ी स्वास्थ्य चिंता के रूप में सामने आया है। लगातार ऐसे ही बैठे रहने से शरीर में कई गंभीर बीमारियों के विकसित होने की आशंका बढ़ जाती है, जिनमें मुख्य हैं:
खबरें और भी
- मोटापा
- डायबिटीज
- दिल की बीमारियां
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
अमेरिका के 'कोलंबिया यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर' के शोधकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय तक गतिहीन रहने के नुकसानों को कम करने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य में चलने-फिरने के इन छोटे-छोटे ब्रेक्स का प्रस्ताव दिया गया है।
अध्ययन में यह भी सुझाव दिया गया है कि टहलने के इन उपायों को सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीति और शारीरिक गतिविधि के दिशा-निर्देशों में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने इस बात की ओर भी इशारा किया है कि भले ही ये छोटे ब्रेक प्रस्तावित किए गए हों, लेकिन वास्तविक दुनिया में लोग अभी भी इस पर अमल करते हुए नहीं देखे जाते हैं।