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    'कम खाओ और ज्यादा कसरत करो' वाली सलाह PCOS में क्यों फेल हो जाती है? समझा रहे हैं डॉक्टर

    Updated: Fri, 06 Mar 2026 09:29 AM (IST)

    डॉ. भास्कर पाल बताते हैं कि हार्मोनल असंतुलन और इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण पीसीओएस में वजन घटाने वाली सामान्य सलाह विफल हो जाती है। ...और पढ़ें

    PCOS और मेंटल हेल्थ का गहरा कनेक्शन (Image Source: AI-Generated)

    PCOS और मेंटल हेल्थ का गहरा कनेक्शन (Image Source: AI-Generated) 

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप भी हेल्दी खान-पान और रेगुलर एक्सरसाइज के बावजूद वजन कम न होने से परेशान हैं? अगर हां, तो आप अकेली नहीं हैं। अपोलो मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल (कोलकाता) के स्त्री रोग विशेषज्ञ और FOGSI के अध्यक्ष डॉ. भास्कर पाल के अनुसार, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) महिलाओं में पाई जाने वाली एक बहुत ही आम हार्मोनल समस्या है।

    शोध बताते हैं कि पीसीओएस से पीड़ित लगभग 40 से 80 प्रतिशत महिलाएं मोटापे या अधिक वजन से जूझती हैं, जो इस समस्या का एक बहुत ही जिद्दी और स्पष्ट लक्षण है।

    Endocrine disruptors

    (Image Source: AI-Generated) 

    वजन कम करना क्यों लगता है एक हारी हुई लड़ाई?

    आम मोटापे के विपरीत, पीसीओएस में बढ़ा हुआ वजन सामान्य डाइट और कसरत से आसानी से कम नहीं होता। जब महिलाएं कड़ी मेहनत करती हैं, लेकिन उन्हें कोई परिणाम नहीं दिखता, तो वे अक्सर खुद को दोष देने लगती हैं। उन्हें लगता है कि शायद उनकी इच्छाशक्ति कमजोर है या उनमें अनुशासन की कमी है।

    लेकिन सच्चाई यह है कि यह आपकी व्यक्तिगत विफलता नहीं है। शरीर में हार्मोनल असंतुलन और 'इंसुलिन रेजिस्टेंस' फैट जमा करने और मेटाबॉलिज्म को धीमा करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। कई बार शुरुआती तौर पर थोड़ा वजन कम भी हो जाता है, लेकिन अंदरूनी शारीरिक समस्याओं के कारण वह तेजी से वापस भी आ जाता है। यह एक ऐसा दुष्चक्र बन जाता है जहां वजन पर काबू पाना मुश्किल होता चला जाता है।

    मेंटल और इमोशनल हेल्थ पर पड़ने वाला असर

    जब शरीर आपकी कोशिशों का साथ नहीं देता, तो इसका सीधा असर आपकी भावनाओं पर पड़ता है। समाज में 'पतले होने' का जो दबाव है, वह महिलाओं के मन में शर्मिंदगी और हीन भावना पैदा करता है।

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    • भावनात्मक थकान और तनाव: अपने ही शरीर पर नियंत्रण खोने का एहसास महिलाओं को मानसिक रूप से थका देता है।
    • इमोशनल ईटिंग: कई बार तनाव से निपटने के लिए महिलाएं खाने का सहारा लेती हैं, जिससे बाद में अपराधबोध होता है और वे खाना और भी कम कर देती हैं। यह चक्र वजन और मानसिक स्वास्थ्य, दोनों को नुकसान पहुँचाता है।
    • भविष्य का डर: इसके साथ ही भविष्य में होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं का डर भी हावी रहता है। लगातार अपने वजन, ब्लड शुगर और मासिक धर्म चक्र पर नजर रखना महिलाओं में घबराहट को बढ़ा सकता है।

    सामाजिक लांछन और अकेलापन

    दुर्भाग्य से, पीसीओएस से जुड़े मोटापे को समाज में अक्सर गलत समझा जाता है। लोगों की तरफ से बिना मांगे "कम खाओ" या "ज्यादा कसरत करो" जैसी सलाहें मिलती रहती हैं। ये सलाह देने वाले लोग यह नहीं समझते कि इस मोटापे का असली कारण हार्मोन्स हैं। इस तरह की बातों से बचने के लिए कई महिलाएं सामाजिक आयोजनों, पार्टियों और लोगों से मिलना-जुलना कम कर देती हैं और अकेलेपन का शिकार हो जाती हैं।

    PCOS insulin resistance

    (Image Source: AI-Generated) 

    वजन को देखने का नजरिया बदलने की जरूरत

    PCOS में वेट मैनेडमेंट को अपराधबोध या कठोर डाइट के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। केवल 'वजन मापने की मशीन' के नंबरों पर ध्यान देना बहुत निराशाजनक हो सकता है। इसके बजाय, एक ऐसे तरीके की जरूरत है जो लंबी अवधि के लिए हो, जिसमें आपके मेटाबॉलिज्म और संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाए। आपकी व्यक्तिगत जीवनशैली में किए गए सकारात्मक बदलाव किसी भी तरह के कठोर उपायों से कहीं ज्यादा कारगर होते हैं।

    सिर्फ पतला होना ही नहीं है PCOS का इलाज

    पीसीओएस के सफल इलाज के लिए मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक जरूरत है। जब महिलाओं को यह समझ में आ जाता है कि उनका बढ़ता वजन उनकी कोई विफलता नहीं है, तो वे इलाज को बेहतर तरीके से अपना पाती हैं।

    पीसीओएस में वेट मैनेजमेंट इच्छाशक्ति की परीक्षा नहीं है, बल्कि यह डॉक्टर और मरीज का एक साझा सफर है। इसका असली लक्ष्य केवल पतला होना नहीं है, बल्कि थकान दूर करना, मेटाबॉलिज्म सुधारना, मासिक धर्म की समस्याओं को ठीक करना और मानसिक रूप से मजबूत बनना है। जब समाज और स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस बात को समझेंगे, तभी महिलाओं को केवल सलाह के बजाय सच्ची सहानुभूति, समझ और सही सहयोग मिल सकेगा।

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