मानसून की उमस में भी बढ़ जाता है डिहाइड्रेशन का खतरा, चक्कर और थकान जैसे लक्षणों को न लें हल्के में
इन दिनों बारिश के कारण धूप से राहत भले मिल गई हो, लेकिन वातवरण में बढ़ी हुई नमी के कारण लोग पानी पीना कम कर देते हैं, जिससे डिहाड्रेशन का जोखिम बढ़ता ...और पढ़ें

मानसून में कैसे करें डिहाइड्रेशन से बचाव? (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। जब बात डिहाइड्रेशन की हो तो ज्यादातर लोग इसे केवल गर्मियों की समस्या मानते हैं। जबकि, यह मानसून के दिनों में भी उतना ही आम रहता है। डॉ. नवल विक्रम (प्रोफेसर, इंटरनल मेडिसिन, एम्स, नई दिल्ली) बताते हैं कि पानी की कमी को कुछ लोग सामान्य मानकर हल्के में लेते हैं और केवल पानी की कमी बताकर स्वयं इलाज कर लेते हैं, लेकिन डिहाड्रेशन से न केवल पाचन तंत्र कमजोर होता है, बल्कि शरीर में पोषक तत्वों का अवशोषण भी सही ढंग से नहीं हो पाता।
इसके कारण चक्कर, कमजोरी, थकान, मांसपेशियों में ऐंठन के साथ लो-ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर मामलों में हृदय और किडनी की कार्यप्रणाली पर इसका गंभीर असर हो सकता है।
कैसे जोखिम बढ़ाता है डिहाइड्रेशन
तेज धूप वाली गर्मी की तुलना में उमस भरी गर्मी ज्यादा खतरनाक होती है। जहां धूप वाली गर्मी में पसीना जल्दी सूख जाता है तो गर्मी से राहत मिल सकती है, लेकिन उमस भरी गर्मी में पहले से ही हवा में नमी होने से पसीना आसानी से नहीं सूखता।
इससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही शरीर तापमान नियंत्रित करने के लिए लगातार पसीना बनाता रहता है, पर मानसून में प्यास कम लगती है पर शरीर से पसीना बहता रहता है, पर लोग पानी का सेवन व जरूरी इलेक्ट्रोलाइट की कमी का ध्यान नहीं रख पाते और पानी की कमी का शिकार हो जाते हैं।
इलेक्ट्रोलाइट संतुलन पर रहे ध्यान
बारिश के मौसम में डिहाइड्रेशन का जोखिम पैदा करने वाले अन्य कारण भी होते हैं। इस मौसम में वायरल संक्रमण की समस्या आम हो जाती है। साथ ही डायरिया और फूड प्वाइजनिंग का भी खतरा रहता है। ये समस्याएं भी शरीर में पानी की कमी का खतरा बढ़ा सकती हैं, इसलिए केवल पानी पीना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।
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बता दें कि इलेक्ट्रोलाइट्स न केवल कोशिकाओं में पानी के संतुलन को बनाए रखते हैं, बल्कि मांसपेशियों की सक्रियता, नर्व सिग्नल और दिल की धड़कनों को नियंत्रित करने में भी मदद करते हैं। इनका संतुलन बनाए रखने के लिए आहार में दही, केला, नारियल पानी जैसी चीजों को शामिल करना चाहिए।
इन संकेतों को पहचानें
- बार-बार मुंह सूखना, गहरे रंग का यूरिन या कम यूरिन आना।
- सिरदर्द, थकान, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई महसूस होना।
- दिल की धड़कन तेज होना
- लो ब्लड प्रेशर और बेहोशी आदि।
बचाव के लिए जरूरी सलाह
- प्यास न लगने पर भी समय-समय पर पानी व इलेक्ट्रोलाइट्स की थोड़ी मात्रा लेते रहें।
- इलेक्ट्रोलाइट्स के लिए ओआरएस का घोल ले सकते हैं।
- अगर उल्टी, दस्त आदि की समस्या है तो चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।
- घर पर नारियल पानी, ओआरएस, छाछ, नींबू पानी और ताजे फलों का सेवन करना चाहिए।
अधिक पानी भी नुकसानदेह
तय मात्रा से अधिक पानी कई प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है, जैसे- इससे शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ सकता है। खासकर यदि किडनी या हृदयरोग के मरीज हैं तो चिकित्सकीय परामर्श के आधार पर ही पानी का सेवन करना चाहिए।
बता दें कि हृदयरोगियों और किडनी के मरीजों को पानी के सेवन को लेकर जो सलाह दी जाती है वह उनकी स्थिति के आधार पर तय होती है। ऐसे लोगों को तय मात्रा से अधिक पानी नहीं लेना चाहिए। यदि स्वयं से अधिक पानी का सेवन कर लेते हैं तो यह हार्ट पर दबाव डाल सकता है।