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    शरीर की 'शुगर' का इस्तेमाल करके ताकतवर बन रहा ब्रेन ट्यूमर, नई स्टडी में सामने आई चौंकाने वाली बात

    Updated: Thu, 19 Mar 2026 09:10 AM (GMT+05:30)

    हमारे शरीर के फ्रक्टोज का इस्तेमाल ब्रेन ट्यूमर अपनी ग्रोथ के लिए करता है। ...और पढ़ें

    शुगर मेटाबॉलिज्म हैक करके बढ़ता है ब्रेन ट्यूमर (Picture Courtesy: Freepik)

    शुगर मेटाबॉलिज्म हैक करके बढ़ता है ब्रेन ट्यूमर (Picture Courtesy: Freepik)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। सोचिए कोई आपके ही घर के राशन का इस्तेमाल करके अपनी ताकत बढ़ाए और फिर आप पर ही हमला कर दे। ग्लियोब्लास्टोमा एक ऐसा ही दुश्मन है। यह ब्रेन ट्यूमर का एक रूप है, जो दिमाग और रीढ़ की हड्डी में विकसित में होता है और यह काफी तेजी से बढ़ता है। 

    'प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज' (PNAS) में ब्रेन ट्यूमर से जुड़ी एक रिसर्च पब्लिश हुई, जिसने वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया है। इस रिसर्च के मुताबिक, ग्लियोब्लास्टोमा हमारे शरीर के शुगर मेटाबॉलिज्म का इस्तेमाल करके तेजी से बढ़ता है।  

    कैसे शुगर बनती है ट्यूमर का हथियार?

    आमतौर पर हमारा शरीर फ्रक्टोज को एनर्जी के सोर्स की तरह इस्तेमाल करता है, लेकिन ग्लियोब्लास्टोमा के मामले में यह मौत का जाल बन रही है। शोध के अनुसार, यह ट्यूमर शरीर में मौजूद फ्रक्टोज को सोख लेता है। इससे न केवल ट्यूमर तेजी से बढ़ता है, बल्कि यह हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम को भी कमजोर कर देता है।

    इस पूरी प्रक्रिया में हमारे दिमाग की फाइटर सेल्स, जिन्हें माइक्रोग्लिया कहा जाता है, अनजाने में ट्यूमर की मददगार बन जाती हैं। माइक्रोग्लिया हमारे दिमाग की वे इम्यून सेल्स हैं, जो हमें बीमारियों से बचाती हैं, लेकिन इस शोध में पाया गया कि फ्रक्टोज को तोड़ने की क्षमता केवल इन्हीं सेल्स के पास है।

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    Brain tumor Signs

    (AI Generated Image)

    ग्लूट5 बना ट्यूमर का रास्ता

    माइक्रोग्लिया सेल्स में ग्लूट5 नाम का एक ट्रांसपोर्टर होता है। यह ट्रांसपोर्टर ही फ्रक्टोज को सेल्स के अंदर लाने का काम करता है। जब फ्रक्टोज अंदर पहुंचता है, तो यह इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है और ट्यूमर को फलने-फूलने के लिए जरूरी एनर्जी देने का काम करता है।

    वैज्ञानिकों ने जब चूहों पर इसका परीक्षण किया और उनके शरीर से इस ग्लूट5 ट्रांसपोर्टर को हटा दिया, तो परिणाम चौंकाने वाले थे-

    • ट्यूमर की बढ़त लगभग पूरी तरह रुक गई।
    • शरीर का इम्यून सिस्टम फिर से एक्टिव हो गया।
    • कैंसर से लड़ने वाले टी-सेल्स तेजी से बढ़ने लगे।
    • शरीर में सूजन पैदा करने वाले साइटोकाइन की मात्रा बढ़ी, जिसने ट्यूमर पर हमला तेज कर दिया।

    इलाज की नई उम्मीद

    यह पहली बार है जब विज्ञान ने यह साबित किया है कि शुगर मेटाबॉलिज्म किस तरह इम्यून सिस्टम को दबाकर कैंसर को बढ़ाने में मदद करता है। इस खोज ने भविष्य के इलाज के लिए एक नया रास्ता खोल दिया है। अगर हम फ्रक्टोज के इस रास्ते को ब्लॉक करने में सफल हो जाते हैं, तो इम्यूनोथेरेपी जैसी आधुनिक तकनीकें मरीजों पर कहीं ज्यादा असरदार साबित होंगी।