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    क्या डॉक्टर से बिना पूछे आई ड्रॉप्स डालना सेफ है? एक्सपर्ट ने दिया जवाब

    Updated: Mon, 02 Mar 2026 03:29 PM (IST)

    आंखों में जलन, रेडनेस, खुजली होना या पानी आना... ये कुछ ऐसी समस्याएं हैं जिन्हें हम अक्सर मामूली समझ लेते हैं। ...और पढ़ें

    बिना डॉक्टर की सलाह के आई ड्रॉप्स डालना कितना सुरक्षित है? (Image Source: AI-Generated)

    बिना डॉक्टर की सलाह के आई ड्रॉप्स डालना कितना सुरक्षित है? (Image Source: AI-Generated)

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हम में से कई लोग डॉक्टर के पास जाने के बजाय सीधे मेडिकल स्टोर से आई ड्रॉप्स खरीद कर आंखों में डाल लेते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आई स्पेशलिस्ट के अनुसार यह छोटी-सी आदत आपकी आंखों के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकती है?

    आइए, ग्वालियर के रतन ज्योति नेत्रालय के संस्थापक और डायरेक्टर, आई सर्जन डॉ. पुरेंद्र भसीन से जानते हैं कि बिना डॉक्टरी सलाह के आई ड्रॉप्स लेना क्यों सुरक्षित नहीं है।

    Eye Care Tips

    (Image Source: Freepik)

    मामूली नहीं होता हर लक्षण

    आंखों में होने वाली हर समस्या का कारण एक जैसा नहीं होता। यह कोई सामान्य एलर्जी, बैक्टीरियल या वायरल इन्फेक्शन हो सकता है, या फिर 'ड्राई आई सिंड्रोम', कॉर्निया में चोट और 'ग्लूकोमा' जैसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है। केवल ऊपर से लक्षण देखकर अपनी मर्जी से दवा लेने से असली बीमारी छिप सकती है और स्थिति आगे चलकर और भी ज्यादा जटिल हो सकती है।

    स्टेरॉयड वाले आई ड्रॉप्स से बड़ा नुकसान

    बिना सलाह के दवा लेने में सबसे बड़ा खतरा स्टेरॉयड बेस्ड आई ड्रॉप्स से होता है:

    • तुरंत आराम, लेकिन लंबा नुकसान: ये दवाएं आंखों की लालिमा और सूजन को तुरंत कम कर देती हैं, जिससे मरीज को लगता है कि वह ठीक हो गया है।
    • गंभीर बीमारियों का खतरा: बिना डॉक्टर की निगरानी के इन्हें लंबे समय तक इस्तेमाल करने से आंखों का दबाव बढ़ सकता है। इससे 'ग्लूकोमा' और 'मोतियाबिंद' जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा पैदा हो जाता है।
    • इन्फेक्शन का बिगड़ना: अगर आंख में पहले से कोई इन्फेक्शन है और उस पर स्टेरॉयड डाल दिया जाए, तो वह इन्फेक्शन और भी भयंकर रूप ले सकता है।

    Eye drops safety tips

    (Image Source: Freepik)

    एंटीबायोटिक और 'रेडनेस रिलीफ' ड्रॉप्स का सच

    • एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल: हर बार आंख लाल होने या चिपचिपी होने का मतलब बैक्टीरियल इन्फेक्शन नहीं होता। उदाहरण के लिए, वायरल कंजंक्टिवाइटिस में एंटीबायोटिक बिल्कुल बेअसर होते हैं। इनका बेवजह इस्तेमाल करने से 'एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस' को बढ़ावा मिलता है, यानी दवाओं का असर खत्म होने लगता है।
    • रेडनेस रिलीफ ड्रॉप्स: ये ड्रॉप्स आंखों की रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ कर कुछ समय के लिए आराम देते हैं, लेकिन अगर आप इनका बार-बार इस्तेमाल करते हैं, तो आंखों में और रिबाउंड रेडनेस और ड्राईनेस आ सकती है।

    क्या लुब्रिकेटिंग ड्रॉप्स एकदम सेफ हैं?

    अक्सर लोग 'आर्टिफिशियल टीयर्स' या लुब्रिकेटिंग ड्रॉप्स को पूरी तरह सुरक्षित मान लेते हैं। हालांकि, ये काफी हद तक सुरक्षित होते हैं, लेकिन अगर आपको इन्हें बार-बार इस्तेमाल करना पड़ रहा है, तो डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। लगातार आंखों का सूखना किसी अन्य बीमारी का इशारा हो सकता है। इसके अलावा, जो लोग कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हैं, उन्हें खास सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि गलत ड्रॉप से कॉर्निया को भारी नुकसान पहुंच सकता है।

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    डॉक्टर से कब मिलें?

    अगर आपको आंखों में इनमें से कोई भी लक्षण दिखे, तो बिना देरी किए आई स्पेशलिस्ट के पास जाएं:

    • आंखों में बहुत तेज दर्द होना
    • रोशनी आंखों में चुभना या धुंधला दिखाई देना
    • आंख में चोट लगना या पस आना
    • कोई भी ऐसा लक्षण जो 2 से 3 दिनों में ठीक न हो रहा हो

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