पतला होने का यह शॉर्टकट पड़ सकता है भारी! जो दवा लॉन्च ही नहीं हुई, उसके नाम पर बिक रहा जहर
सोशल मीडिया के झांसे में आकार वजन कम करने की फर्जी दवा खरीद रहे हैं लोग।

वजन घटाने में सेहत से खिलवाड़ कर रहे लोग (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। तेजी से वजन घटाने की चाह ने एक नई परेशानी खड़ी कर दी है। मोटापे से जूझ रहे लोग सुनी सुनाई बातों और इंटरनेट मीडिया पर फैले प्रचार को देखकर दवाएं मंगा रहे हैं और जान जोखिम में डालकर इनका सेवन कर रहे हैं। ये पैटर्न दुनियाभर के देशों में देखा जा रहा है।
रेटाट्रूटाइड नाम की जिस दवा को वजन घटाने के क्षेत्र में संभावित बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है, उसकी असली दवा अभी बाजार में उपलब्ध भी नहीं है। इसके बावजूद इसके नाम पर नकली और गैरकानूनी उत्पादों की बिक्री तेजी से बढ़ रही है।
वजन घटाने में सेहत से खिलवाड़ कर रहे लोग
इंटरनेट मीडिया, जिम और ब्यूटी सैलून से लेकर ब्लैक मार्केट तक में लोग इस दवा को खरीद रहे हैं। वहीं, ऑनलाइन भी इसकी खरीदारी हो रही है। डॉक्टरों ने बिना चिकित्सकीय निगरानी ऐसे इंजेक्शन लेने को लेकर गंभीर स्वास्थ्य जोखिम की चेतावनी दी है। चिकित्सकों के मुताबिक, नकली उत्पादों के इस्तेमाल के बाद उल्टी, दस्त और बेचैनी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। कुछ गंभीर मामलों में किडनी संबंधी परेशानी की भी रिपोर्ट की गई है। अमेरिकी दवा कंपनी एली लिली इस दवा पर क्लिनिकल ट्रायल कर रही है। कंपनी की योजना अगले साल की शुरुआत में अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के सामने मंजूरी के लिए आवेदन देने की है।
रेटाट्रूटाइड की गैरकानूनी मार्केटिंग
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन में रेटाट्रूटाइड को "रेटा" के नाम से बेचा जा रहा है। जिम, नेल और ब्यूटी सैलून, हेयरड्रेसर और इंटरनेट मीडिया के जरिए इसकी बिक्री के मामले सामने आए हैं। कुछ लोग इसे ऑनलाइन मंगाकर खुद ही इंजेक्शन लगा रहे हैं। कई यूजर इंटरनेट मीडिया पर इसके इस्तेमाल से वजन कम होने के अनुभव और पहले-बाद की तस्वीरें भी साझा कर रहे हैं। एली लिली का कहना है कि उसने ऐसी 14 हजार से अधिक वेबसाइट, विज्ञापनों और इंटरनेट मीडिया पोस्ट की रिपोर्ट की है, जिनमें उसके मुताबिक रेटाट्रूटाइड की गैरकानूनी मार्केटिंग की जा रही थी।
ऐसे उत्पाद सेहत के लिए हानिकारक
कंपनी पेप्टाइड बनाने वाली कंपनियों, कंपाउंडिंग फार्मेसी, वेलनेस क्लीनिक और इंटरनेट मीडिया से जुड़े लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई कर रही है। सबसे बड़ा खतरा यह है कि ब्लैक मार्केट में बिकने वाले उत्पाद में वास्तव में क्या मौजूद है, इसकी कोई भरोसेमंद गारंटी नहीं होती। एली लिली ने चेतावनी दी है कि उसके प्रायोजित क्लिनिकल ट्रायल के बाहर रेटाट्रूटाइड होने का दावा करने वाले उत्पादों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
ऐसे उत्पादों में गलत या हानिकारक केमिकल, अशुद्धियां या सक्रिय तत्व की बहुत ज्यादा अथवा बहुत कम मात्रा हो सकती है। ब्रिटेन की मेडिसिन्स एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी (एमएचआरए) भी ऐसे कई उत्पाद जब्त कर चुकी है, जिन पर रेटाट्रूटाइड होने का दावा किया गया था। एजेंसी का कहना है कि वह इनके गैरकानूनी आयात और वितरण को रोकने के लिए कार्रवाई कर रही है।
