हेल्दी हैं, तो भी आ सकता है कार्डियक अरेस्ट? नाना पाटेकर की मौत के बाद उठा सवाल; समझें हार्ट अटैक से कितना अलग
बॉलीवुड अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद कार्डियक अरेस्ट पर चर्चा तेज हो गई है। ऐसे में, यह समझना ...और पढ़ें

बिना आहट दिए हमला करता है 'कार्डियक अरेस्ट'! (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन ने पूरे देश को झकझोर दिया है। 75 वर्ष की उम्र में 'कार्डियक अरेस्ट' ने उनकी जान ले ली। मेडिकल टीम ने उनकी सांसें लौटाने के लिए पूरे 45 मिनट तक लगातार सीपीआर दिया, लेकिन धड़कनें वापस नहीं आ सकीं।
इस घटना ने एक बार फिर कुछ सवालों पर चर्चा तेज कर दी है कि आखिर यह बीमारी शरीर को संभलने का मौका क्यों नहीं देती, यह हार्ट अटैक से कैसे अलग है और पूरी तरह से हेल्दी दिखने वाले लोग भी इसका शिकार कैसे हो जाते हैं।
हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में है असल अंतर?
अक्सर लोग हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को एक ही बीमारी समझ लेते हैं, जबकि मेडिकल विज्ञान के अनुसार दोनों की प्रकृति बिल्कुल अलग है।
हार्ट अटैक तब होता है जब हार्ट की किसी नस में ब्लॉकेज के कारण हृदय की मांसपेशियों तक पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इसके विपरीत, कार्डियक अरेस्ट में दिल अचानक प्रभावी तरीके से धड़कना बंद कर देता है, जिससे शरीर और मस्तिष्क तक रक्त की आपूर्ति रुक जाती है।
हालांकि, हार्ट अटैक आगे चलकर कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है, लेकिन यह जरूरी नहीं है कि दोनों हमेशा एक ही समय पर हों।
स्वस्थ दिखने वाले युवा भी क्यों हो रहे हैं शिकार?
अक्सर हम सुनते हैं कि कोई बिल्कुल फिट इंसान या खेल के मैदान पर कोई युवा अचानक बेहोश होकर गिर गया। असल में, केवल बाहरी रूप से स्वस्थ दिखना यह साबित नहीं करता कि हृदय पूरी तरह स्वस्थ है।
स्वस्थ दिखने वाले लोगों में भी कार्डियक अरेस्ट होने के कई छिपे हुए कारण होते हैं:
- जन्मजात बीमारियां: कुछ लोगों में जन्म से ही हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी की समस्या होती है या उनके दिल की लय बिगड़ी होती है, जैसे कि लॉन्ग क्यूटी सिंड्रोम। ऐसी जेनेटिक समस्याएं अचानक कार्डियक अरेस्ट का कारण बनती हैं।
- खराब लाइफस्टाइल और खतरनाक ट्रिगर्स: अत्यधिक तनाव, नींद की कमी, धूम्रपान, नशीले पदार्थों का सेवन और जरूरत से ज्यादा शारीरिक मेहनत इसका जोखिम कई गुना बढ़ा देते हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रोलाइट का असंतुलन भी इस खतरे को ट्रिगर कर सकता है।
- छाती पर जोरदार चोट: खेलते समय अगर किसी खिलाड़ी की छाती पर सही समय और सटीक जगह पर किसी खेल उपकरण की तेज चोट लग जाए, तो दिल को कोई शारीरिक नुकसान हुए बिना ही उसका इलेक्ट्रिकल सिस्टम अचानक काम करना बंद कर सकता है।
इन चेतावनी संकेतों को कभी न करें नजरअंदाज
कार्डियक अरेस्ट का सबसे डरावना पहलू यह है कि यह बिना कोई आहट दिए आता है। व्यक्ति अचानक गिरकर बेहोश हो जाता है और नब्ज गायब हो जाती है। हालांकि, शरीर कुछ संकेत जरूर देता है। जी हां, सीने में दर्द, सांस फूलना, अचानक बेहोशी, तेज धड़कन या अचानक चक्कर आने जैसे लक्षणों को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए।
अगर किसी के साथ ऐसा हो, तो तुरंत क्या करें?
कार्डियक अरेस्ट होने पर दिमाग को ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाती है। ऐसे में हर एक बीतता सेकंड मरीज को मौत के करीब ले जाता है:
- तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं: सबसे पहला काम मेडिकल हेल्प के लिए इमरजेंसी नंबर डायल करना है।
- लगातार CPR दें: डॉक्टर के पहुंचने तक बिना रुके मरीज की छाती के बिल्कुल बीच में अपने हाथों से जोर से और तेजी से दबाव डालें। 1 मिनट में 100 से 120 बार की रफ्तार से छाती को दबाना चाहिए।
- AED मशीन का इस्तेमाल: मॉल या एयरपोर्ट जैसी जगहों पर अगर एईडी मशीन मौजूद है, तो तुरंत उसका यूज करें। यह मशीन दिल को बिजली का एक शॉक देती है, जिससे रुकी हुई धड़कन के वापस शुरू होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
(डॉ. धीरज झांब, नई दिल्ली के यथार्थ हॉस्पिटल (मॉडल टाउन) में कार्डियोवैस्कुलर और थोरैकिक सर्जरी के डायरेक्टर और वरिष्ठ सलाहकार हैं)
