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नाना पाटेकर की मौत के बाद चर्चा में CPR, कार्डियक अरेस्ट में कैसे काम करता है यह तरीका?

Published: Thu, 08 Oct 2026 02:47 PM (IST)

अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद कार्डियक अरेस्ट और सीपीआर पर चर्चा तेज हो गई है। यह लेख बताता ...और पढ़ें

नाना पाटेकर का कार्डियक अरेस्ट से निधन (Picture Credit- AI Generated)

नाना पाटेकर का कार्डियक अरेस्ट से निधन (Picture Credit- AI Generated)

HighLights

  1. कार्डियक अरेस्ट में दिल धड़कना बंद कर देता है

  2. दिमाग तक खून और ऑक्सीजन की सप्लाई रुक जाती है

  3. सीपीआर तत्काल जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। गुरुवार की सुबह फिल्म जगत के लिए एक दुखद खबर लेकर आई। भारतीय सिनेमा के मशहूर अभिनेता नाना पाटेकर के अचानक हुए निधन की खबर को जिसने भी सुना, वह हैरान रह गया है। 75 साल के नाना ने कार्डियक अरेस्ट आने के बाद दुनिया को अलविदा कह दिया। 

इस खबर के सामने आने के बाद जहां हर कोई नाना पाटेकर को खोने का गम बना रहा है, तो वहीं एक बार फिर कार्डियक अरेस्ट को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जानकारी के मुताबिक नाना की जान बचाने के लिए उन्हें 45 मिनट तक सीपीआर भी दिया गया, लेकिन उन्हें बचाने की सभी कोशिशें नाकाम हो गई। ऐसे में आज इस आर्टिकल में जानेंगे कि कार्डियक अरेस्ट आने के बाद हर एक सेकंड क्यों जरूरी होता है और इस कंडीशन में सीपीआर कैसे अहम भूमिका निभाता है। 

क्या है कार्डियक अरेस्ट?

डॉ. समीर गुप्ता (सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट, ग्रुप हेड - कैथ लैब्स, डायरेक्टर - मेट्रो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स) बताते हैं कार्डियक अरेस्ट एक बेहद गंभीर स्थिति है, जिसमें दिल धड़कना बंद कर देता है। इसका सीधा मतलब है कि दिमाग तक खून और ऑक्सीजन की सप्लाई रुक जाती है। यह हार्ट अटैक से अलग है, जिसमें दिल तक खून की सप्लाई में रुकावट आती है। कार्डियक अरेस्ट होने पर व्यक्ति अचानक गिर सकता है, कोई प्रतिक्रिया नहीं देता और सांस लेना बंद कर सकता है। अगर तुरंत कार्रवाई न की जाए, तो हर मिनट बचने की संभावना कम होती जाती है।

तुरंत रिस्पॉन्स क्यों जरूरी है?

कार्डियक अरेस्ट कितना खतरनाक है, यह जानने के लिए यह भी पता चल गया कि इस कंडीशन में तुरंत प्रतिक्रिया देना बहुत जरूरी है। जब दिल खून पंप करना बंद कर देता है, तो ऑक्सीजन की कमी का सबसे पहला असर दिमाग पर पड़ता है। डॉक्टर की मदद मिलने तक दिमाग और शरीर के अन्य जरूरी अंगों तक खून और ऑक्सीजन पहुंचाने का तरीका इमरजेंसी CPR है।

कब पड़ती है सीपीआर की जरूरत?

अगर कोई व्यक्ति अचानक गिर जाए और कोई प्रतिक्रिया न दे, तो देखें कि क्या वह सामान्य रूप से सांस ले रहा है और तुरंत इमरजेंसी मेडिकल सर्विस को कॉल करें। इस दौरान छाती के बीच में जोर से और तेजी से दबाकर चेस्ट कम्प्रेशन शुरू करें। अगर आपके पास AED (ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर) मौजूद है, तो बिना देरी किए उसका इस्तेमाल करें।

कितने तरह के होते हैं सीपीआर?

  • सांस देने वाला CPR: इसमें आप छाती को दबाते हैं और मुंह से मुंह में सांस देते हैं। इस तरह का CPR करने के लिए आपको CPR सर्टिफिकेशन की जरूरत होती है।
  • सिर्फ हाथों से किया जाने वाला CPR : इसमें आप सिर्फ हाथों से छाती को दबाते हैं। इस तरह के CPR के लिए आपको सर्टिफिकेशन की जरूरत नहीं होती। आप इसे खुद भी सीख सकते हैं।

सीपीआर देने का सही तरीका 

  • व्यक्ति को किसी सख्त और समतल जमीन पर पीठ के बल सीधा लेटाएं।
  • व्यक्ति के सीने के पास घुटनों के बल बैठें। अपने हाथ की हथेली का निचला हिस्सा सीने के बीचों-बीच रखें, दूसरा हाथ उसके ऊपर रखकर उंगलियों को आपस में फंसा लें।
  • आपके कंधे सीधे हाथों के ठीक ऊपर होने चाहिए और बाहें बिल्कुल सीधी रखें। छाती दबाते समय अपने शरीर के वजन का इस्तेमाल करें।
  • सीने को कम से कम 2 इंच नीचे तक दबाएं। हर बार दबाने के बाद सीने को वापस ऊपर आने दें।
  • एक मिनट में 100 से 120 बार दबाएं।
  • अगर आप सर्टिफाइड हैं, तो हर 30 बार सीना दबाने के बाद 2 बार मुंह से सांस दें। अगर ट्रेनिंग नहीं ली है, तो लगातार सीना दबाते रहें।

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