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उम्र वही, पर दिमाग हुआ बुजुर्ग: मानसिक बीमारियां और लत आपके ब्रेन को कर रही हैं डैमेज, रिसर्च में खुलासा

Published: Thu, 23 Jul 2026 09:00 AM (IST)

हाल ही की एक रिसर्च के मुताबिक, शराब की लत और मेंटल हेल्थ से जुड़ी बीमारियां दिमाग पर गहरे निशान छोड़ रही हैं।

मानसिक बीमारी बढ़ा रही है दिमाग की उम्र (Image Source: AI Generated)

मानसिक बीमारी बढ़ा रही है दिमाग की उम्र (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आजकल के मॉडर्न लाइफस्टाइल में जहां एक तरफ मानसिक बीमारियों जैसे- डिप्रेशन, एंग्जायटी और फोकस में कमी के मामले लगातार तेजी से बढ़ रहे हैं तो वहीं इस बिगड़ती जीवनशैली में शराब का सेवन भी बेहद आम ही चला है। यही वजह है कि लोग इसकी लत के भी शिकार हो रहे हैं। पर इस बारे में हाल ही में आई रिपोर्ट चिंता जाहिर कर रही है, इसमें पाया गया है कि जो लोग शराब का सेवन ज्यादा करते हैं या जिन्हें किसी तरह की मानसिक बीमारी है, उनका दिमाग तेजी से बूढ़ा हो सकता है। दूसरे शब्दों में कहें तो दिमाग के सोचने-समझने की क्षमता पर इसका सीधा असर पड़ने वाला है।

मानसिक बीमारी बढ़ा रही है दिमाग की उम्र 

एक शोध में पता चला है कि डिमेंशिया, शराब की लत या सिजोफ्रेनिया जैसी मानसिक बीमारियों वाले लोगों के दिमाग में उम्र बढ़ने की प्रक्रिया तेजी से हो सकती है। साथ ही हर बीमारी दिमाग के खास हिस्सों पर अलग निशान छोड़ती है। बताते चलें कि वैज्ञानिक प्रेडिक्टिव एज डिफरेंस (यानी असल उम्र और ब्रेन इमेजिंग से पता चली उम्र के बीच का अंतर) का इस्तेमाल करके यह पता लगाते हैं कि शरीर के मुकाबले दिमाग की उम्र कितनी है। इस रिपोर्ट में अगर असल उम्र और ब्रेन इमेजिंग से पता चली उम्र की वैल्यू पाजिटिव निकलती है, तो इसका साफ मतलब है कि दिमाग पर इसका असर हुआ है और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया तेजी से हुई है। 

चीन की रिसर्च में हुआ खुलासा 

चीन की नानजिंग यूनिवर्सिटी आफ एयरोनाटिक्स एंड एस्ट्रोनाटिक्स के शोधकर्ताओं ने करीब 45,900 स्वस्थ लोगों का एमआरआइ डाटा इकट्ठा किया। इसके बाद वैज्ञानिकों ने इस डाटा की दिमाग से जुड़ी अलग-अलग बीमारियों वाले 2,698 मरीजों के डाटा से तुलना कर जानकारी इकट्ठी की। 

इनमें जिन बीमारियों का विश्लेषण किया गया, उनमें अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसआर्डर (एडीएचडी), आटिज्म स्पेक्ट्रम डिसआर्डर (एएसडी), शराब या तंबाकू की लत, अल्जाइमर रोग, बौद्धिक क्षमता में कमजोरी, सिजोफ्रेनिया, बाइपोलर डिसआर्डर और मेजर डिप्रेशन डिसआर्डर जैसी मानसिक बीमारियां शामिल थीं। इसमें भी यह पाया गया कि न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों जैसे अल्जाइमर रोग आदि का संबंध प्रेडिक्टिव एज डिफरेंस (पीएडी) के ज्यादा होने से सबसे गहरा संबंध था। इतना ही नहीं, लत और मानसिक बीमारियों का भी बढ़े हुए प्रेडिक्टिव एज डिफरेंस से संबंध पाया गया। 

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