सिर्फ उम्र नहीं, बर्थप्लेस और जेंडर से भी तय होती है आपकी इम्युनिटी; रिसर्च में खुलासा
एक नए शोध से पता चला है कि वायरस के प्रति शरीर की एंटीबॉडी प्रतिक्रिया उम्र, लिंग, जेनेटिक्स और जन्म स्थान जैसे कारकों से प्रभावित होती है। ...और पढ़ें

क्यों वायरस से अलग तरह से लड़ता है हर व्यक्ति का शरीर? (Image Source: Freepik)

समय कम है?
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प्रेट्र, नई दिल्ली। जब भी कोई वायरस हमारे शरीर पर हमला करता है, तो हमारा शरीर उससे लड़ने के लिए 'एंटीबॉडी' तैयार करता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि वायरस से लड़ने की यह क्षमता आपकी उम्र के हिसाब से बदल सकती है? जी हां, एक नए शोध से पता चला है कि किसी भी वायरस के प्रति हमारे शरीर की प्रतिक्रिया और एंटीबॉडी के बनने में हमारी उम्र एक बहुत ही प्रमुख कारक होती है।

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उम्र के साथ बदलता है एंटीबॉडी का व्यवहार
फ्रांस के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस दिलचस्प अध्ययन में कई नई बातें सामने आई हैं। शोध में पाया गया कि जब एक ही प्रकार का वायरस अलग-अलग लोगों पर हमला करता है, तो हर व्यक्ति का शरीर उस वायरस के अलग-अलग हिस्सों को निशाना बनाने वाले एंटीबॉडी उत्पन्न कर सकता है। सबसे खास बात यह है कि किसी विशेष वायरस के लिए कुछ एंटीबॉडी उम्र बढ़ने के साथ बढ़ते हैं, जबकि कुछ उम्र के साथ घट भी जाते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि वायरस के किस खास हिस्से पर निशाना साधा जा रहा है।
लिंग, जेनेटिक्स और जन्म स्थान का भी है असर
क्या इस पूरी प्रक्रिया में सिर्फ उम्र ही जिम्मेदार है? शोध के अनुसार, बिल्कुल नहीं। उम्र के अलावा व्यक्ति का लिंग, उसके जेनेटिक्स और जन्म का स्थान भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये सभी कारक मिलकर न सिर्फ यह तय करते हैं कि शरीर में कितनी मात्रा में एंटीबॉडी बनेंगे, बल्कि यह भी निर्धारित करते हैं कि वे एंटीबॉडी वायरस के किन विशिष्ट हिस्सों को अपना निशाना बनाएंगे।
कैसे हुआ यह शोध?
इस महत्वपूर्ण शोध के निष्कर्षों को 'नेचर इम्यूनोलॉजी' नाम की पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। इस अध्ययन को बहुत ही व्यापक स्तर पर किया गया, जिसमें 1,000 स्वस्थ लोगों को शामिल किया गया था। इस दौरान शोधकर्ताओं ने इन सभी लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, उनकी जीवनशैली, मेडिकल हिस्ट्री और विभिन्न जैविक संकेतकों का बहुत बारीकी से ध्यान रखा।
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क्या होता है 'एपिटोप'?
शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में यह स्पष्ट किया है कि उम्र, लिंग और जन्म स्थान का सीधा असर इस बात पर पड़ता है कि एंटीबॉडी किस 'एपिटोप' को लक्षित करेंगे। आसान भाषा में समझें तो, एपिटोप किसी वायरस या एंटीजन का वह खास हिस्सा होता है, जहां जाकर हमारी एंटीबॉडी जुड़ जाती है और अपना काम शुरू करती है।