क्या फिर बढ़ रहा है Mpox का खतरा? WHO ने की नए 'हाइब्रिड' स्ट्रेन की पुष्टि, भारत में मिला पहला केस
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाल ही में एमपॉक्स वायरस के एक नए 'रिकॉम्बिनेंट' स्ट्रेन के दो मामलों की पुष्टि की है। बता दें, यह नया वायरस दो पुराने ...और पढ़ें

भारत और यूके में मिला एमपॉक्स का नया 'हाइब्रिड' स्ट्रेन (Image Source: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल ही में एक ऐसी खबर की पुष्टि की है जिसने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को सतर्क कर दिया है। जी हां, एमपॉक्स वायरस का एक बिल्कुल नया स्ट्रेन सामने आया है। बता दें, यह कोई साधारण वायरस नहीं, बल्कि दो पुराने वायरसों के जेनेटिक पदार्थों के मिलने से बना एक 'रिकॉम्बिनेंट' वायरस है।
सबसे अहम बात यह है कि इस नए वायरस के मामले भारत और यूके में पाए गए हैं। WHO ने इसे देखते हुए पूरी दुनिया में कड़ी निगरानी रखने की सलाह दी है। आखिर यह नया वायरस कैसे बना और क्या हमें इससे डरने की जरूरत है? आइए डिटेल में जानते हैं।
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कहां मिले नए मामले?
WHO की रिपोर्ट के अनुसार, इस नए स्ट्रेन के दो मामले सामने आए हैं:
- यूनाइटेड किंगडम: पहला मामला यूके में पाया गया। यह व्यक्ति दक्षिण-पूर्व एशिया के किसी देश की यात्रा करके आया था।
- भारत: दूसरा मामला भारत का है, जहां मरीज ने अरब प्रायद्वीप के किसी देश की यात्रा की थी।
चौंकाने वाली बात यह है कि ये दोनों मरीज अलग-अलग समय पर बीमार पड़े, लेकिन दोनों में एक ही जैसा नया वायरस पाया गया। दोनों ही मामलों में बीमारी के लक्षण वैसे ही थे जैसे अन्य एमपॉक्स के मामलों में देखे जाते हैं।
कितना खतरनाक है नया स्ट्रेन?
राहत की बात यह है कि दोनों ही मरीजों में बीमारी गंभीर नहीं थी। दोनों देशों में इन मरीजों के संपर्क में आए लोगों की जांच पूरी कर ली गई है और किसी अन्य व्यक्ति में यह संक्रमण नहीं फैला है। हालांकि, WHO का कहना है कि दो मामलों का मिलना यह संकेत देता है कि शायद और भी मामले हो सकते हैं जो अभी पकड़ में नहीं आए हैं।
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कैसे हुई वायरस की पहचान?
- यूके का मामला: यह दिसंबर 2025 में पकड़ा गया। पहले इसे 'क्लेड Ib' समझा गया था, लेकिन बाद में डिटेल टेस्टिंग से पता चला कि इसमें 'क्लेड Ib' और 'क्लेड IIb' दोनों के अंश मौजूद हैं।
- भारत का मामला: भारत में मरीज को सितंबर 2025 में लक्षण आए थे। शुरुआत में इसे 'क्लेड II' माना गया था। बाद में डेटाबेस अपडेट होने पर पता चला कि यह वही नया मिला-जुला स्ट्रेन है जो यूके में मिला था।
ध्यान रहे, भारत का मामला इस नए स्ट्रेन का सबसे पहला ज्ञात मामला है।
एमपॉक्स आखिर है क्या?
एमपॉक्स, जिसे पहले 'मंकीपॉक्स' कहा जाता था, एक वायरल संक्रमण है। इसमें चेचक जैसे दाने निकलते हैं और फ्लू जैसे लक्षण होते हैं। यह वायरस आमतौर पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में करीबी संपर्क से फैलता है। कभी-कभी यह संक्रमित व्यक्ति द्वारा छुई गई चीजों या सतहों के माध्यम से भी फैल सकता है।
एमपॉक्स के मुख्य प्रकार
- क्लेड I: यह मध्य अफ्रीका में पाया जाता है और अधिक गंभीर बीमारी का कारण बनता है।
- क्लेड II: यह पूर्वी अफ्रीका में पाया जाता है। 2022 से दुनिया भर में फैलने वाला वायरस इसी प्रकार का है और यह क्लेड I की तुलना में कम घातक होता है।
क्या हैं एमपॉक्स के लक्षण?
हर किसी में इस वायरस के लक्षण एक जैसे नहीं दिखते, लेकिन सबसे आम लक्षणों में:

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कुछ लोगों को सिर्फ दाने निकल सकते हैं, जबकि कुछ को पहले फ्लू जैसे लक्षण आते हैं और बाद में दाने निकलते हैं। कुछ मामलों में दाने बिल्कुल नहीं निकलते। WHO ने सलाह दी है कि नए स्ट्रेन के कम मामले होने के कारण अभी किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, लेकिन सतर्कता बनाए रखना बहुत जरूरी है।
