रनर्स नी से लेकर आर्थराइटिस तक, घुटने के दर्द के अलग-अलग कारण पहचानिए
उम्र बढ़ने के साथ घुटने घिसने लगते हैं। जब आप स्पोर्ट्स खेलते हैं, सीढ़ियां चढ़ते हैं या भारी सामान उठाते ...और पढ़ें

घुटने के दर्द के कारण, लक्षण और प्रभावी उपचार के तरीके (Picture Credit- AI Genearted)
HighLights
घुटने के दर्द के मुख्य कारण ऑस्टियोआर्थराइटिस और चोटें हैं
नियमित व्यायाम, फिजियोथेरेपी और स्वस्थ वजन दर्द कम करे
गंभीर दर्द में डॉक्टर से सलाह लें, सर्जरी भी विकल्प
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। पीठ के बाद, घुटने के दर्द की समस्या सबसे आम है। ज्यादातर लोगों को एक उम्र के बाद इसका सामना करना पड़ता है। हालांकि, कार्टिलेज और साफ्ट टिश्यू में चोट लगने की वजह से यह समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है। डाक्टर बताते हैं कि लंबे समय तक रहने वाला दर्द शारीरिक, आर्थिक और भावनात्मक रूप से परेशानी पैदा कर देता है।
अच्छी बात यह है कि आप परेशानी को कम करने, चलने-फिरने की क्षमता बनाए रखने और भविष्य में चोट से बचने के लिए कुछ आसान उपाय कर सकते हैं। जरूरी नहीं है कि 'मेरे घुटने में दर्द है' वाली स्थिति से सीधे सर्जरी की नौबत आ जाए। इससे पहले परेशानी के कारणों और उसके निदान के जरूरी उपायों को समझना जरूरी है।
घुटने के दर्द के आम कारण
खासकर 55-60 वर्ष की उम्र में घुटने के दर्द का सबसे आम कारण आस्टियोआर्थराइटिस होता है। इसमें जोड़ों का कार्टिलेज घिस जाता है और भार सहने की क्षमता कम होने लगती है। डाक्टरों की मानें तो इससे सूजन और कभी-कभी दर्द होता है, जिससे दैनिक क्रियाकलाप में परेशानी होती है। यह दर्द घुटने के अलग-अलग हिस्सों में, जैसे- किनारों पर या नी-कैप के नीचे भी हो सकता है। आस्टियोआर्थराइटिस में अक्सर सुबह अकड़न महसूस होती है और दिन में बाद में हिलना-डुलना आसान हो जाता है।
शारीरिक रूप से सक्रिय रहने वालों में घुटने के दर्द के पीछे आम कारण चोटें हैं। आम तौर पर तेज एक्सरसाइज करने जैसे कारणों से होते हैं। लंबी दूरी की दौड़ में 'आइटी बैंड सिंड्रोम' हो सकता है, जो बार-बार एक ही तरह की एक्टिविटी के कारण होता है। कमजोर क्वाड मसल्स, घुटने का गलत अलाइनमेंट और पहले लगी चोटों के कारण पेटेलोफेमोरल पेन सिंड्रोम हो सकता है, जिसे 'रनर्स नी' भी कहते हैं, इससे घुटने के नीचे दर्द होता है।
कैसे अचानक होती है समस्या
घुटने का दर्द अचानक भी हो सकता है, जैसे गिरने या दुर्घटना के बाद, खेल खेलते समय या बगीचे में झुकते समय। घुटने की सबसे आम चोटों में से एक है मिनिसकस का फटना, यह कार्टिलेज का एक अर्धचंद्राकार टुकड़ा होता है जो झटके सहता है और घुटने को स्थिर रखने में मदद करता है। इसके फटने की समस्या अक्सर मुड़ने या ऐंठने के चलते होती है, जिससे तेज दर्द, सूजन और जोड़ के दर्द की परेशानी हो सकती है।
लिगामेंट में मोच आना एक आम चोट है। यह तब होता है जब घुटने के चार मुख्य लिगामेंट्स में से कोई एक, जो कनेक्टिव टिश्यू की रस्सी जैसी पट्टियां होती हैं और स्थिरता देती हैं, अधिक खिंच जाता है या फट जाता है। एमसीएल और एसीएल दो ऐसे लिगामेंट्स हैं जिनमें अक्सर चोट लगती है।
आर्थराइटिस से होने वाले दर्द का इलाज
अगर आपका दर्द धीरे-धीरे शुरू हुआ है, तो भी आपको किसी फिजिकल थेरेपिस्ट से मिलना चाहिए। वे आपके चलने-फिरने के उन तरीकों की पहचान करने में मदद कर सकते हैं जिनसे घुटने का दर्द बढ़ सकता है, जैसे कि कूल्हों में कमजोरी या पैरों का अंदर की ओर मुड़ना। वे बता सकते हैं कि आपको डाक्टर को दिखाना चाहिए या नहीं। अगर दर्द किसी नई चोट के बजाय लंबे समय से चला आ रहा है, तो डाक्टर से मिलकर इसका बेहतर ढंग से उपचार कराना चाहिए। एक्सरसाइज से ऑस्टियोआर्थराइटिस का दर्द भी कम हो सकता है और यह बिना डाक्टर की पर्ची के मिलने वाली दर्द निवारक दवाओं जितनी ही असरदार हो सकती है। अगर रोज दर्द होता है, तो कम असर वाली एरोबिक एक्सरसाइज जैसे कि बाइकिंग, तैराकी या एलिप्टिकल मशीन का इस्तेमाल करना चाहिए। टेपिंग और मजबूत, सपोर्ट देने वाले जूते पहनने से भी घुटने का दर्द कम हो सकता है।
दवाओं के प्रयोग में सतर्कता
अगर जीवनशैली में बदलाव और ओरल मेडिसिन से लाभ नहीं हो रहा है, तो डाक्टर स्टेरायड इंजेक्शन दे सकते हैं। हालांकि, इनसे कुछ हफ्तों के लिए दर्द कम हो सकता है, लेकिन बार-बार इनका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। दर्द कम करने के लिए हाइलूरोनिक एसिड इंजेक्शन के बारे में डाक्टरों की अलग अलग राय हैं। कुछ का मानना है ये उन मरीजों के लिए बेहतर है, जिन्हें शुरुआती स्टेज का आस्टियोआर्थराइटिस है। वहीं कुछ डाक्टर प्लेटलेट-रिच प्लाज्मा इंजेक्शन की सलाह दे सकते हैं, लेकिन ये इलाज महंगे हो सकते हैं और इनसे कार्टिलेज के दोबारा बनने का कोई सबूत नहीं मिला है। अगर सभी तरह इलाज के बावजूद दर्द की समस्या बनी रहती है, तो डाक्टर घुटने के रिप्लेसमेंट सर्जरी का विकल्प चुव सकते हैं।
चोट का इलाज
अगर चोट लगने के कारण सामान्य कामकाज के दौरान दर्द हो रहा है, उसे रोक देना चाहिए। राहत के लिए जोड़ के चारों ओर बर्फ लगाना एक बेहतर उपाय हो सकता है। इससे राहत के लिए डाक्टर कुछ दवाओं का परामर्श दे सकते हैं। कुछ चोटों, जैसे एसीएल या मेनिस्कस फटने पर कुछ मरीजों को सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। अगर घुटने में अस्थिरता, अचानक तेज या चुभने वाला दर्द हो, सीढ़ियां चढ़ने-उतरने में दिक्कत हो तो डाक्टर से मिलना चाहिए।
घुटनों को स्वस्थ कैसे रखें
- आप उम्र या जेनेटिक्स को नहीं बदल सकते, लेकिन शरीर का वजन सही रखने से घुटनों पर पड़ने वाला बोझ कम करना आपके हाथ में है।
- जोड़ों की सक्रियता और स्वस्थ रखने के लिए एक्टिव रहना जरूरी है।
- एक गलतफहमी है कि कुछ तरह की एक्सरसाइज घुटनों पर बुरा असर डालती हैं, ऐसे में यही बेहतर है कि कुछ व्यायाम करते रहें।
- ध्यान रखें एक्टिव नहीं रहने से कमजोर मांसपेशियां आगे चलकर आस्टियोआर्थराइटिस का खतरा बढ़ा सकती हैं।
- अगर आर्थराइटिस है भी, तो भी जब तक आप फ्लेक्सिबल और मजबूत हैं, अच्छा खाना खाते हैं और पर्याप्त आराम करते हैं, "तब तक आपके घुटने बेहतर काम करेंगे और लक्षण कम रहेंगे।"
- भले ही समस्या को पूरी तरह से रोक न पाएं, लेकिन इसे सही तरीके से मैनेज अवश्य किया जा सकता है।
