सामान रख कर भूल जाते हैं? घबराएं नहीं! अपनी लाइफस्टाइल में करें ये बदलाव और दिमाग को रखें 10 साल जवान
जीवनशैली में कुछ बदलाव करके डिमेंशिया की बीमारी से बचा जा सकता है।

डिमेंशिया उम्रदराज लोगों में एक आम बीमारी (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप जरूरी सामान अक्सर भूल जाते हैं या पुरानी बातें याद करने में कठिनाई महसूस होने लगी है तो यह ऐसी स्थिति है, जहां आपको अपनी मानसिक सेहत को लेकर सतर्क होने की जरूरत है। भूलने की यह समस्या डिमेंशिया का रूप ले सकती है। आइए एम्स, नई दिल्ली में सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट और विभागाध्यक्ष, डॉ. मंजरी त्रिपाठी से इसके बारे में विस्तार से जानें कि इससे बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना है जरूरी।
डिमेंशिया उम्रदराज लोगों में एक आम बीमारी
वैसे तो उम्र बढ़ने पर डिमेंशिया के लक्षण दिखना कोई आश्चर्यजनक बात नहीं है, लेकिन अमेरिका में हुआ एक हालिया अध्ययन बताता है कि जिन लोगों को हाई बीपी और डायबिटीज जैसी समस्याएं हैं या धूमपान की आदत है, उन्हें डिमेंशिया होने का खतरा अपेक्षाकृत अधिक रहता है।
वहीं, जापान में हुए एक अध्ययन की मानें तो किचन के कामों में व्यस्त रहने वाले उम्र दराज लोगों में डिमेंशिया होने का जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है। दोनों ही अध्ययन जागरूक, सतर्क और जीवनशैली को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित करने वाले हैं। इस संदर्भ में डब्लूएचओ का व्यापक दिशानिर्देश बताता है कि हाइ बीपी और डायबिटीज से बचाव और स्मोकिंग से दूरी आपके डिमेंशिया के जोखिम को कम कर सकती है।
कारणों को समझें और सतर्कता बढ़ाएं
डिमेंशिया उम्र के साथ बढ़ने वाली समस्या तो है ही। यह आनुवंशिक भी होती है। हालांकि, कुछ चीजों को कंट्रोल कर आप डिमेंशिया को आठ से दस साल तक टाल सकते हैं, जैसे ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव, डायबिटीज, मोटापा, स्मोकिंग, लगातार अपनी सीट पर बैठे रहने, अधिक समय तक टीवी देखने, अल्कोहल के सेवन, घंटों मोबाइल पर रील आदि देखने, निष्क्रिय जीवनशैली जैसी आदतों में सुधार।
बढ़ती प्रदूषण की समस्या, अपर्याप्त नींद और तनाव जैसे कारण भी इस समस्या की गंभीरता को बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा बढ़ती उम्र में अगर सुनने में परेशानी हो रही है तो हियरिंग एड का प्रयोग न करना। देखने में परेशानी हो रही है तो चश्में का प्रयोग न करना, भोजन में पौष्टिक चीजों की कमी होना, शरीर में सैचुरेटेड फैट का अधिक जाना, रेडमीट, फ्रोजन फूड्स या जंक फूड्स, नमक का अधिक भी डिमेंशिया की आशंका को बढ़ाता है।
कुछ सीखते रहने की डालें आदत
अगर हम बढ़ती उम्र में भी कुछ न कुछ नई चीजें सीखते रहें तो डिमेंशिया की समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है। दरअसल, दिमाग के खाली रहने या दिमागी सक्रियता के अभाव के चलते यह समस्या बढ़ती है। अगर आपको कोई शौक नहीं है तो खाना बनाना सीखिए। इस दौरान दिमाग सतर्क रहता है और लगातार काम करता रहता है। नई-नई रेसिपी सीखिए, इससे दिमाग की सक्रियता बढ़ती है।
आप चाहें तो कोई नई भाषा या कंप्यूटर प्रोग्रामिंग भी सीख सकते हैं। रोज समाचार पत्र पढ़ना और किताबें पढ़ना भी बहुत फायेदमंद होता है। रोज सुबह-शाम टहलना, साइकिल चलाना, एरोबिक्स करना, योग-व्यायाम करना डिमेंशिया की आशंका को कम करता है।
स्वस्थ आहार है जरूरी
सीमित मात्रा में खाने में सरसों का शुद्ध तेल, देसी घी, ऑलिव ऑयल का प्रयोग करना लाभदायक है। हल्दी डिमेंशिया से राहत दिलाने में बहुत लाभकारी होती है। इसमें पाया जाने वाला करक्यूमिन नामक पोषक तत्व डिमेंशिया में काफी कारगर है। मौसमी हरी सब्जियां, विभिन्न प्रकार के अंकुरित अनाज और श्रीअन्न यानी मोटे अनाज, घर का भोजन आपकी मानसिक सेहत को दुरुस्त रखता है।
शिथिलता से बाहर निकलें
उम्र बढ़ने के साथ यह सोच लें कि अब हमारे दिन तो आराम करने के हैं। हमने आधे से ज्यादा जिंदगी काम ही तो किया है। यही सोच डिमेंशिया की नींव तैयार कर देता है। यदि हम बढ़ती उम्र में लोगों से मिलना-जुलना बंद कर दें या खुद को सीमित कर लें तो भी समस्या गंभीर होती जाएगी। निष्क्रिय या शिथिल जीवनशैली डिमेंशिया को खुला आमंत्रण है।
हंसी-खुशी से रहना, लोगों से मेल-जोल बनाए रखना और परिस्थिति के साथ तालमेल बिठाना, डिमेंशिया से बचाने में बहुत कारगर है। सामाजिक सेवा में सक्रिय रहकर भी अपने को डिमेंशिया से दूर रख सकते हैं। सबसे बड़ी चीज है अपने सोच को सकारात्मक रखना और दिन में जब भी अवसर मिले दिल खोलकर हंसना बहुत लाभदायक रहता है। अगर हम अपने में गुमसुम बने रहेंगे, लोगों से बातचीत नहीं करेंगे तो डिमेंशिया के होने की आशंका बढ़ जाती है।
अभी तक नहीं बनी है डिमेंशिया की वैक्सीन
अभी तक डिमेंशिया को पूरी तरह से दूर करने के लिए कोई वैक्सीन नहीं बनी है। हालांकि, इस संदर्भ में लगातार खोज जारी हैं। पहले डिमेंशिया को दूर करने के लिए कुछ वैक्सीन बनी थीं, लेकिन वे उतनी कारगर नहीं साबित हुईं, जितना कि होना चाहिए था। यही नहीं उन वैक्सीन के कारण कुछ लोगों को समस्या भी होने लगी थी। इसलिए उनका प्रयोग रोक दिया गया था।
डिमेंशिया के हैं ये लक्षण
कोई बात या घर-परिवार और देश से जुड़ी महत्वपूर्ण तिथियां और घटनाओं का भूलना।
एक ही बात को बार-बार दोहराना यानी याददाश्त का कमजोर हो जाना।
हिसाब-किताब रखने, कोई जरूरी बिल भरने की तारीख का भूल जाना।
रोजमर्रा के कार्यों को पूरा करने से भूल जाना या कठिनाई होना।
गाड़ी चलाते समय या पैदल चलते समय रास्तों को भूल जाना या स्थान को लेकर भ्रमित होना।
किसी से बातचीत करने के दौरान औचक रूक जाना, बोलने के लिए सही शब्द का न मिलना।
किसी सामान को रखकर कहीं भूल जाना। पैसे के लेन-देन में गलत फैसले ले लेना।
बिना किसी खास कारण के मूड स्विंग होना, उलझन महसूस होना, चिंता होना, बिना किसी वजह के डर लगना।
