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कीमोथेरेपी से खत्म हो जाएगी फर्टिलिटी? डॉक्टर ने बताई अर्ली ब्रेस्ट कैंसर के इलाज से जुड़ी 5 बातें

Published: Sun, 10 May 2026 07:00 AM (GMT+05:30)Updated: Sun, 10 May 2026 07:18 AM (GMT+05:30)

कम उम्र की महिलाओं में अर्ली ब्रेस्ट कैंसर के निदान पर भविष्य और फर्टिलिटी को लेकर कई सवाल उठते हैं। ...और पढ़ें

युवा महिलाओं में अर्ली ब्रेस्ट कैंसर का इलाज (Picture Credit- AI Generated)

युवा महिलाओं में अर्ली ब्रेस्ट कैंसर का इलाज (Picture Credit- AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या मैं भविष्य में मां बन पाऊंगी? मेरे करियर का क्या होगा? क्या यह बीमारी दोबारा लौट आएगी?" 30 या 35 की उम्र, जब किसी महिला में 'अर्ली ब्रेस्ट कैंसर' का निदान सामने आता है, तो मन में ऐसे ही सवाल उठते हैं। 

कम उम्र की महिलाओं के लिए यह सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि जिंदगी के हर पहलू को झकझोर देने वाला मोड़ होता है। हालांकि, राहत की बात यह है कि सही सलाह और आधुनिक उपचार के जरिए आज महिलाएं सिर्फ कैंसर से लड़ने के बजाय अपने भविष्य और एक खुशहाल जीवन को प्राथमिकता दे पा रही हैं।

इलाज का मतलब सिर्फ ठीक होना नहीं

अपोलो कैंसर सेंटर (दिल्ली-एनसीआर) में मेडिकल ऑन्कोलॉजी के लीड कंसल्टेंट डॉ. भुवन चुघ कहते हैं, "युवा महिलाओं में अर्ली ब्रेस्ट कैंसर का इलाज सिर्फ दवाइयों तक सीमित नहीं रह सकता। इलाज का उद्देश्य बीमारी के लौटने के रिस्क को कम करने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी है कि मरीज की फर्टिलिटी सुरक्षित रहे और वे अपनी सामान्य जिंदगी में लौट सकें।"

इलाज के दौरान 5 जरूरी बातें

इलाज जीवन के अनुकूल हो 

आज का ट्रीटमेंट पूरी तरह से 'पर्सनलाइज्ड' है। डॉक्टर केवल ट्यूमर नहीं देखते, बल्कि आपकी लाइफस्टाइल और भविष्य के लक्ष्यों को भी समझते हैं। कोशिश यही होती है कि कम से कम साइड इफेक्ट्स के साथ आपकी रोजमर्रा की दिनचर्या चलती रहे।

दोबारा बीमारी होने के डर से जीत 

कैंसर के वापस आने का डर स्वाभाविक है, लेकिन अपने ऑन्कोलॉजिस्ट से खुलकर बात करने से इस पर काबू पाया जा सकता है। अपनी रियल कंडीशन और आधुनिक बचाव के तरीकों को समझने से मन में एक सुरक्षा और नियंत्रण का भाव आता है।

फैमिली प्लानिंग और फर्टिलिटी 

कीमोथेरेपी या अन्य दवाओं का असर मां बनने की क्षमता पर पड़ सकता है। इसलिए ट्रीटमेंट शुरू होने से पहले ही एग या एम्ब्रियो फ्रीजिंग जैसे विकल्पों पर डॉक्टरों से चर्चा कर लेनी चाहिए।

शारीरिक और मानसिक सेहत का तालमेल 

थकान या बालों का झड़ना जैसे बदलाव परेशान कर सकते हैं, लेकिन आज की 'सपोर्टिव केयर' दवाएं इन तकलीफों को काफी हद तक कम कर देती हैं। इस दौरान अपनों का साथ और थोड़ा बहुत एक्टिव रहना मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखता है।

अपनी पहचान न खोएं 

कैंसर को अपनी पूरी जिंदगी पर हावी न होने दें। वर्कप्लेस पर थोड़े बदलाव करके या अपनी पसंदीदा आदतों से जुड़े रहकर आप इस मुश्किल दौर में भी खुद को ऊर्जावान महसूस कर सकती हैं।

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