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    गर्भावस्था में थकान और चक्कर को न लें हल्के में! शिशु के लिए जानलेवा हो सकती है खून की कमी

    Updated: Tue, 11 Aug 2026 05:35 PM (IST)

    स्वास्थ्य पत्रिका द लांसेट में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार, गर्भावस्था में एनीमिया होने पर मृत शिशु के जन्म का खतरा तीन गुना तक बढ़ जाता है। ...और पढ़ें

    मां और शिशु, दोनों के लिए खतरनाक है एनीमिया (Picture Courtesy: Freepik)

    मां और शिशु, दोनों के लिए खतरनाक है एनीमिया (Picture Courtesy: Freepik)

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    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। गर्भावस्था में आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर में पर्याप्त स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं नहीं होती हैं। बता दें कि शरीर हीमोग्लोबिन बनाने के लिए आयरन का उपयोग करता है। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाने वाला एक प्रोटीन है जो ऊतकों तक आक्सीजन पहुंचाता है। 

    डॉ. माला श्रीवास्तव (गाइनोकोलाजिस्ट, सर गंगाराम हास्पिटल, नई दिल्ली) बताती हैं कि गर्भावस्था के दौरान, शरीर में रक्त की मात्रा बढ़ जाती है। शरीर के आयरन की मांग भी अधिक होती है। शरीर शिशु को आक्सीजन की आपूर्ति करने के लिए अधिक रक्त बनाने के लिए आयरन का उपयोग करता है। ऐसे में यदि शरीर में पर्याप्त आयरन का भंडार नहीं है, तो गर्भस्थ शिशु के लिए जानलेवा स्थिति पैदा कर सकता है।

    बचपन से डालें आदत

    किशोर उम्र की बच्चियां मासिक धर्म की चुनौतियां और पोषण की कमी आदि के कारण आसानी से एनीमिया यानी खून की कमी का शिकार हो जाती हैं। यह उनके शारीरिक और संज्ञानात्मक विकास में भी बाधक बनता है। खून की कमी के चलते अवसाद और गंभीर हृदय रोग की समस्या भी हो सकती है। 

    सबसे गंभीर चुनौती यही है कि आगे उन्हें स्वस्थ मां बनने में यह बाधक बन सकता है। एनीमिया मुक्त भारत रणनीति के तहत 10-19 साल की लड़कियों व किशोरियों को सप्ताह में एक बार आयरन और फोलिक एसिड की एक गोली लेने की सिफारिश की गयी है। बता दें कि प्रत्येक गोली में 60 मिली प्राकृतिक आयरन और 500 माइक्रोग्राम फोलिक एसिड होता है। अच्छा होगा गर्भावस्था में एनीमिया से बचाव के लिए हम एक लक्ष्य बनाएं और 12 वर्ष की उम्र तक बच्चियों का हीमोग्लोबिन 12 रहे।

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    गर्भावस्था में एनीमिया के लक्षण

    • अत्यधिक थकान
    • कमजोरी।
    • चक्कर आना
    • त्वचा का रंग हल्का पड़ना या त्वचा और आंखों का पीला पड़ना।
    • सांस लेने में कठिनाई।
    • दिल की धड़कन तेज होना।
    • कम रक्तचाप
    • ध्यान केंद्रित करने में परेशानी आदि।

    बचाव के लिए

    • आयरन युक्त विटामिन की गोली लेने से गर्भावस्था के दौरान आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया को रोकने और उसका इलाज करने में मदद मिल सकती है।
    • आयरन युक्त आहार लें। जैसे, मुर्गी और मछली के साथ अनाज, गहरे हरे पत्तेदार सब्जियां, सूखे बीन्स और मटर को शामिल करें।
    • पौधों से प्राप्त आयरन के अवशोषण को बढ़ाने के लिए विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थ या पेय पदार्थ लें। जैसे संतरे का रस, टमाटर का रस या स्ट्राबेरी।
    • यदि आप संतरे के रस के साथ आयरन सप्लीमेंट ले रहे हैं, तो कैल्शियम युक्त सप्लीमेंट से बचें। गर्भावस्था के दौरान कैल्शियम एक आवश्यक पोषक तत्व है, लेकिन कैल्शियम आयरन के अवशोषण को कम कर सकता है।
    • घर पर खाना तैयार करें। लोहे की कढ़ाई का सेवन भी बेहतरीन विकल्प है।