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    बचपन वाले अस्थमा से भी ज्यादा खतरनाक है एडल्ट ऑनसेट अस्थमा, फेफड़ों को खामोशी से करता है डैमेज

    By Niharika PandeyEdited By: Harshita Saxena
    Updated: Thu, 22 Jan 2026 06:00 AM (IST)

    सिर्फ बचपन में ही नहीं बड़े होने पर भी अस्थमा की समस्या शुरू हो सकती है। फैमिली हिस्ट्री, स्मोकिंग, मोटापा, हॉर्मोनल बदलाव, कोई खास पेशा, एलर्जी इसकी ...और पढ़ें

    एडल्टहुड अस्थमा: गंभीरता, जोखिम और बचाव के प्रभावी तरीके (Picture Credit- Freepik)

    एडल्टहुड अस्थमा: गंभीरता, जोखिम और बचाव के प्रभावी तरीके (Picture Credit- Freepik)

    HighLights

    1. एडल्टहुड अस्थमा बचपन की तुलना में ज्यादा गंभीर हो सकता है

    2. फैमिली हिस्ट्री, धूम्रपान, मोटापा इसके मुख्य रिस्क फैक्टर हैं

    3. दवा का सही डोज और फेफड़ों की नियमित जांच आवश्यक है

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आमतौर पर अस्थमा की शिकायत बचपन में देखी जाती है, लेकिन बढ़ती उम्र के साथ यह धीरे-धीरे ठीक भी हो जाती है। वयस्क होने पर भी अस्थमा की समस्या हो सकती है, जिसकी शुरुआत सामान्यतौर पर 20 की उम्र के बाद देखी गई है।

    हालांकि, एडल्टहुड में होने वाले अस्थमा के लक्षण कई बार ज्यादा गंभीर रूप में सामने आते हैं। ऐसा होने के क्या कारण हो सकते हैं और कैसे इससे बचाव किया जा सकता है, हम जानेंगे इस आर्टिकल में।

    क्यों एडल्टहुड में अस्थमा होता है गंभीर

    • अस्थमा के लक्षणों को गंभीरता से न लेना
    • काम को लेकर व्यस्तता
    • इलाज कराने में टालमटोल
    • सही इलाज न मिल पाना

    ये वजहें बढ़ाती हैं खतरा

    • फैमिली हिस्ट्री: अगर आपके किसी करीबी संबंधी को अस्थमा है तो इसके होने का खतरा बढ़ जाता है।
    • धूम्रपान: इससे अस्थमा होने का जोखिम बढ़ जाता है। सेकंडहैंड स्मोकिंग के साथ भी यही खतरा जुड़ा हुआ है।
    • मोटापा: फिजिकल एक्टिविटी नहीं करने का असर आपके फेफड़ों पर भी पड़ता है।
    • महिलाएं: प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज के दौरान होने वाले हॉर्मोनल बदलावों की वजह से भी अस्थमा का खतरा बढ़ सकता है।
    • एलर्जी: धूल-मिट्टी, परागकण के प्रति जब आपका इम्यून सिस्टम रिएक्ट करता है तो आपको एलर्जी की समस्या होती है। ऐसा ही प्रभाव आपके ब्रीदिंग पर भी पड़ता है।
    • आपका पेशा: कुछ काम ऐसे होते हैं जिसमें हर दिन कई घंटे धूल-मिट्टी, धुंएं या केमिकल के संपर्क में रहना पड़ता है। इससे भी अस्थमा की समस्या होने का जोखिम होता है।
    asthma

    इस तरह कर सकते हैं अपना बचाव

    • दवा का सही डोज: दवा लेने के तरीकों और डोज को लेकर अलर्ट रहें। अगर आप पहले से भी कोई दवाई या सप्लीमेंट ले रहे हैं तो उसके बारे में भी अपने डॉक्टर को जरूर बताएं। अपने मन से दवा का डोज या दवा ना बदलें।
    • फेफड़े की जांच कराते रहें: जब भी डॉक्टर के पास जाएं अपने फेफड़े की क्षमता की जांच करवाएं। इससे लक्षणों के गंभीर होने से पहले ही उसे कंट्रेाल कर पाएंगे।
    • इनहेलर का इस्तेमाल: अगर आप इनहेलर के जरिए अपनी दवा नहीं ले पा रहे हैं तो अपने डॉक्टर से अन्य विकल्पों के बारे में बात करें।
    • नजरअंदाज न करें: अगर आपको सर्दी-जुकाम या इन्फेक्शन की समस्या हुई है तो तुरंत ही अपना इलाज कराएं। फेफड़ों का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है।
    • प्रदूषित हवा से दूर रहें: अगर आप ऐसी जगह रहते हैं जहां एअर क्वालिटी अच्छी नहीं है तो इनडोर एअर को शुद्ध करने के तरीके अपनाएं।
    • धूम्रपान न करें: सिगरेट पीने से अस्थमा को मैनेज करना काफी मुश्किल हो जाता है। सिगरेट छोड़ने की कोशिश करें।
    • एक्टिव रहें: अस्थमा को मैनेज रखने के लिए फिजिकली एक्टिव रहना जरूरी है। कई बार एक्सरसाइज भी अस्थमा के लिए ट्रिगर का काम करती है। इसलिए एकदम से कोई एक्सरसाइज शुरू ना करें।

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