समोसे-टिक्की भूल जाएंगे, अगर एक बार चख लिया मैनपुरी का 'भुना आलू'; बिना तले या उबाले होता है तैयार
मैनपुरी के भुने आलू अपने अनोखे स्वाद के लिए मशहूर हैं, जिन्हें धीमी आंच पर रेत और राख में भूनकर तैयार किया जाता है।

एक बार चखा तो याद रह जाएगा स्वाद! मैनपुरी के भुने आलुओं की आखिर क्या है खासियत? (Image Source: AI-Generated)
HighLights
मैनपुरी के भुने आलू एक मशहूर स्ट्रीट फूड
धीमी आंच पर रेत और राख में भूना जाता है
खास चटनी और मसालों के साथ परोसा जाता है
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। लखनऊ के टुंडे कबाब और बनारस की टमाटर चाट के चर्चे तो दुनिया भर में हैं, लेकिन मैनपुरी के मशहूर 'भुने आलू' का स्वाद कुछ ऐसा है जो बिना किसी तामझाम के सीधा दिल में उतरता है।
जी हां, इसे सिर्फ एक आम स्ट्रीट फूड समझने की भूल मत कीजिएगा, क्योंकि यह मैनपुरी की गलियों में रची-बसी वो सोंधी खुशबू है, जो हाईवे से गुजरती गाड़ियों में अचानक ब्रेक लगवा देती है।
आइए, इस आर्टिकल में जानते हैं कि आखिर राख के नीचे दबे इस साधारण से आलू में ऐसा कौन-सा स्वाद छिपा होता है, जो दूर-दूर से लोगों को खींच लाता है?
धीमी आंच पर भूनकर मिलता है सोंधा स्वाद
जाहिर है आप सोच रहे होंगे कि आखिर इन आलुओं में ऐसा क्या खास है जो इन्हें इतना मशहूर बनाता है? बता दें, इसका असली राज छिपा है इन्हें पकाने के देसी तरीके में। दरअसल, ये आम आलुओं की तरह पानी में उबाले नहीं जाते, बल्कि इन्हें भट्टी में गर्म रेत और कोयले की राख के बीच बहुत धीमी आंच पर भूना जाता है।
इस तरह से भूनने पर आलू के अंदर एक बेहतरीन सोंधी महक आ जाती है। बाहर से इसका छिलका हल्का कड़क हो जाता है और अंदर से यह रुई की तरह मुलायम रहता है। बस यही है मैनपुरी के भुने आलुओं की असली पहचान।
मुंह में होता है चटाकेदार स्वाद का धमाका
इन गरमागरम आलुओं का असली मजा तब आता है, जब इन्हें बीच से फाड़कर इनके ऊपर खास सीक्रेट मसाले और तीखी हरी चटनी डाली जाती है। धनिया, पुदीना, हरी मिर्च, लहसुन और अदरक से पत्थर की सिल पर पीसी गई यह चटनी इतनी चटाकेदार होती है कि इसे खाते ही मुंह का स्वाद बदल जाता है। चटनी के साथ ऊपर से निचोड़ा गया नींबू का रस और भुने हुए जीरे का स्वाद इसे एक अलग ही लेवल पर ले जाता है।
पिज्जा-बर्गर पर भारी मैनपुरी का स्ट्रीट फूड
बारिश का मौसम हो या सर्दियों की ठंडी शाम, मैनपुरी की सड़कों पर इन भुने आलुओं के ठेलों के पास हमेशा भारी भीड़ नजर आती है। दोस्तों के साथ गप्पे मारते हुए कागज के दोने में इन तीखे और गरमागरम आलुओं को खाने का जो मजा है, वो किसी महंगे रेस्टोरेंट के पिज्जा या बर्गर में बिल्कुल नहीं मिल सकता है।
