विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

कभी राजा-महाराजाओं के फेवरेट थे घर में बनने वाले ये 5 पकवान, आज भी हैं हमारी थाली की शान

Published: Sun, 12 Jul 2026 05:09 PM (IST)

शाही खानसामे मौसम के हिसाब से भी अपना मेन्यू बदलते रहते थे। अलग-अलग इलाकों से मंगवाए गए मसाले, ताजे फल ...और पढ़ें

क्या आप भी खाते हैं राजा-महाराजाओं वाली डिश? (Image Source: AI-Generated)

क्या आप भी खाते हैं राजा-महाराजाओं वाली डिश? (Image Source: AI-Generated)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप जानते हैं कि आज हम अपने घरों में जो रोजमर्रा की चीजें बड़े चाव से खाते हैं, उनमें से कई डिशेस रजवाड़ों की भी फेवरेट हुआ करती थीं? जी हां, फर्क सिर्फ इतना था कि शाही रसोइयों में इन्हें बनाने का अंदाज बिल्कुल जुदा होता था। 

इन पकवानों को शाही बावर्ची बड़ी फुरसत से धीमी आंच पर पकाते थे, जिनमें शुद्ध देसी घी, महकता हुआ केसर और बेशकीमती मसाले डाले जाते थे। आइए, इस आर्टिकल में जानते हैं वो 5 लजीज पकवान, जिनके दीवाने खुद प्राचीन भारत के शासक हुआ करते थे। 

Traditional Indian dishes

(Image Source: AI-Generated)

लड्डू

राज्याभिषेक हो या कोई बड़ा त्योहार, शाही रसोई में लड्डू जरूर बनते थे। बेसन, तिल या आटे को शुद्ध घी में भूनकर, उसमें मेवे और केसर मिलाकर ये शानदार लड्डू तैयार किए जाते थे। इनकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि ये अन्य मिठाइयों की तरह जल्दी खराब नहीं होते थे और सफर में भी आसानी से साथ ले जाए जा सकते थे। यही वजह है कि लड्डू भारत की सबसे पुरानी और चहेती शाही मिठाइयों में गिने जाते हैं।

खीर

मीठे की बात हो और खीर का जिक्र न हो, ऐसा तो राजदरबारों में भी नहीं होता था। यह एक ऐसी डिश थी जिसका जलवा लगभग हर साम्राज्य में था। चावल और दूध को कढ़ाई में घंटों तक तब तक ओटा जाता था, जब तक कि वह बिल्कुल मलाईदार न हो जाए। आखिर में इसमें केसर, इलायची और ढेरों सूखे मेवे डालकर इसे शाही रूप दिया जाता था। खीर सिर्फ एक मिठाई नहीं बल्कि रियासत की अमीरी का सुबूत थी, जिसके बिना कोई भी शाही जश्न या पूजा अधूरी मानी जाती थी।

बिरयानी

बिरयानी का दौर आने से बहुत पहले ही, शाही खानपान में चावलों को एक 'वीआईपी' रुतबा हासिल था। बावर्ची इसे सिर्फ एक साइड-डिश की तरह नहीं, बल्कि दावत के मुख्य आकर्षण के तौर पर पेश करते थे। बिरयानी को घी, खड़े मसालों, जड़ी-बूटियों और मेवों के साथ इस तरह पकाया जाता था कि खाने वाले बस उंगलियां चाटते रह जाएं। हर राज्य का अपना एक अलग नुस्खा होता था, लेकिन चावल हमेशा थाली की शान बढ़ाते थे।

आम

आमों से हमारी आशिकी कोई आज की नहीं, बल्कि हजारों साल पुरानी है। राजघरानों में इसका एक अलग ही क्रेज था। महलों के अपने खास और सुरक्षित बागीचे होते थे, जहां चुन-चुनकर सबसे मीठे आम उगाए जाते थे। इन आमों को सीधे खाने के अलावा, इनके शरबत बनाए जाते थे और बेमौसम खाने के लिए इन्हें प्रिजर्व भी किया जाता था। खास मेहमानों के सामने नायाब किस्म के आम पेश करना एक बहुत बड़ा सम्मान माना जाता था।

मीठी रोटियां

राजाओं को भी कभी-कभी बेहद सादे और सुकून देने वाले खाने की तलब होती थी। गुड़ और मीठी दाल की स्टफिंग वाली रोटियां इसका सबसे बेहतरीन विकल्प थीं। ढेर सारे घी से चुपड़ी और इलायची की महक वाली ये रोटियां, किसी भी भारी-भरकम और मसालेदार दावत के बाद पेट और मन दोनों को तसल्ली देती थीं। शाही रसोइये बस इनमें सबसे उम्दा क्वालिटी की सामग्री डालकर इन्हें खास बना देते थे।

यह भी पढ़ें- बिरयानी भारतीय नहीं तो फिर भारत कैसे पहुंची? पढ़ें फारस से लेकर आपके प्लेट तक का दिलचस्प सफर

यह भी पढ़ें- शाही स्वाद, मारवाड़ी अंदाज, स्टेप-बाय-स्टेप सीखें पारंपरिक राजस्थानी गट्टे की सब्जी बनाना