Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 28, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    क्या आप जानते हैं भारतीय थाली तक कैसे पहुंची चटनी? मुगल बादशाह शाहजहां से है इसका दिलचस्प कनेक्शन

    Updated: Sat, 28 Jun 2025 09:12 PM (IST)

    चटनी का सफर जितना जायकेदार है उतना ही शाही भी! बता दें यह कहानी सिर्फ मिर्च-मसालों की नहीं बल्कि मुगल काल के एक हकीम की सूझबूझ की है जिसने भारतीय व्यं ...और पढ़ें

    क्या आप जानते हैं चटनी का इतिहास? (Image Source: Freepik)
    क्या आप जानते हैं चटनी का इतिहास? (Image Source: Freepik)

    HighLights

    1. भारतीय खान-पान में चटनी की एक खास जगह है।
    2. अलग-अलग जगह तरह-तरह की चटनी देखने को मिलती है।
    3. इसे बनाने की शुरुआत मुगल बादशाह शाहजहां से जुड़ी है।

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी भारतीय थाली में रंगत और स्वाद घोलने वाली चटनी आखिर कहां से आई? यह सिर्फ मिर्च, मसाले और जड़ी-बूटियों का मिश्रण नहीं, बल्कि इसका एक बेहद दिलचस्प और शाही इतिहास (Chutney History) है, जो सीधा मुगल बादशाह शाहजहां से जुड़ा है! जी हां, वही शाहजहां जिन्होंने ताजमहल बनवाया था।

    अक्सर हम सोचते हैं कि चटनी हमेशा से हमारी रसोई का हिस्सा रही है, लेकिन इसका भारतीय थाली तक का सफर काफी रोमांचक है। तो चलिए, विस्तार से जानते हैं इस मजेदार कहानी (Origin of Chutney) के बारे में।

    पेट दर्द से जन्मी चटनी की परंपरा

    कहते हैं कि एक बार मुगल बादशाह शाहजहां गंभीर रूप से बीमार पड़ गए थे। उन्हें पेट में तेज दर्द था और किसी भी शाही व्यंजन से उन्हें आराम नहीं मिल रहा था। ऐसे में, उनके हकीम और वैद्य परेशान थे क्योंकि कई तरह के इलाज किए गए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

    इस दौरान, शाहजहां को कुछ ऐसा खाने की सलाह दी गई जो हल्का हो, आसानी से पच जाए और उनके पेट के लिए फायदेमंद हो। साथ ही, उसमें औषधीय गुण भी हों। तब दरबार के एक हकीम ने विभिन्न जड़ी-बूटियों, ताजी सब्जियों और मसालों को मिलाकर एक पेस्ट बनाने का सुझाव दिया। इस पेस्ट में पुदीना, धनिया, अदरक, लहसुन, हरी मिर्च और कुछ खास मसालों का इस्तेमाल किया गया था, जिन्हें पीसकर तैयार किया गया।

    यह भी पढ़ें- इस बीमारी के इलाज के लिए हुई थी चाट खाने की शुरुआत, बेहद दिलचस्प है इसका खट्टा-मीठा इतिहास

    यहीं से हुई 'चटनी' की शुरुआत

    यह खास पेस्ट, जिसे स्वाद और औषधीय गुणों का बेहतरीन मिश्रण कहा जा सकता है, शाहजहां को परोसा गया। हैरानी की बात यह थी कि इसे खाने के बाद बादशाह को न सिर्फ स्वाद पसंद आया, बल्कि उन्हें पेट दर्द से भी काफी राहत मिली। धीरे-धीरे, यह पेस्ट बादशाह की रोजमर्रा की खुराक का हिस्सा बन गया।

    खबरें और भी

    शाही रसोई से आम आदमी की थाली तक

    जब कोई चीज बादशाह को पसंद आ जाए, तो वह भला आम जनता से दूर कैसे रह सकती है? धीरे-धीरे, यह औषधीय और स्वादिष्ट पेस्ट, जिसे 'चटनी' नाम दिया गया, शाही रसोई से निकलकर आम लोगों की रसोई तक पहुंच गया। लोगों ने अपनी पसंद और उपलब्धता के अनुसार इसमें बदलाव किए। कहीं इसमें टमाटर मिलाया गया, कहीं इमली, तो कहीं नारियल। हर क्षेत्र में अपनी खास चटनी तैयार होने लगी।

    आज, भारत के हर कोने में अनगिनत प्रकार की चटनियां मिलती हैं- मीठी, खट्टी, तीखी, नमकीन। चाहे ढोकले के साथ हरी चटनी हो, समोसे के साथ लाल चटनी या डोसे के साथ नारियल की चटनी, हर चटनी का अपना एक अलग स्वाद और कहानी है।

    यह भी पढ़ें- पहली बार करीब 100 साल पहले बनाई गई थी रवा इडली, सेकंड वर्ल्ड वॉर से जुड़ा है इसका दिलचस्प इतिहास