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कोई धुलने पर और चमकती है, तो कोई 3 पीढ़ियों तक नहीं होती पुरानी! ये हैं भारत के अलग-अलग राज्यों की खास साड़ियां

Published: Mon, 24 Aug 2026 12:55 PM (IST)

भारत के राज्यों की पारंपरिक साड़ियां, वहां की विविधता, अनूठी बुनाई कला और संस्कृति को दर्शाती हैं।

भारत की अनोखी साड़ियां (AI Generated Image)

भारत की अनोखी साड़ियां (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। साड़ी भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा हैं। ये सिर्फ एक कपड़ा नहीं है, बल्कि ये हमारे देश की विरासत, इतिहास और बुनाई कला का प्रतीक हैं।

उत्तर से लेकर दक्षिण तक और पूर्व से लेकर पश्चिम तक, हर राज्य की अपनी खास साड़ी है, जो वहां की बुनाई कला को दर्शाती हैं। आइए जानें भारत के अलग-अलग राज्यों की खास साड़ियों के बारे में। 

उत्तर प्रदेश की बनारसी सिल्क साड़ी 

बनारस की ये सिल्क साड़ी जरी की बनाई, बेल-बूटे जैसे पैटर्न और मलबेरी सिल्क के लिए दुनियाभर में मशहूर हैं। ये साड़ियां देखने में जितनी खूबसूरत होती हैं, उनका टेक्सचर और सिल्क भी उतना ही बेहतरीन होता है। ये छूने में काफी मुलायम होती हैं और इनके खूबसूरत रंगों के कारण दुल्हनों की पहली पसंद बनता है। 

तमिलनाडु की कांचीपुरम सिल्क साड़ी

मलबेरी सिल्क और सोने-चांदी के धागों से बनी ये साड़ी दुनियाभर में मशहूर है। इस साड़ी के डिजाइन दक्षिण भारत के मंदिरों की नक्काशी से प्रेरित होते हैं। इसकी बुनाई तकनीक में साड़ी की बॉडी और पल्लू को अलग बुनकर आपस में जोड़ा जाता है। इस साड़ी की चमक और खूबसूरती हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है।

गुजरात का पटोला और पाणेतर साड़ी

पटोला अपनी डबल इकत बुनाई के लिए जानी जाती है। इस बुनाई तकनीक के कारण ये साड़ी दोनों तरफ से एक जैसी नजर आती है। इस साड़ी के रंग और पैटर्न बेहद खूबसूरत होते हैं। एक पटोला बुनने में कारीगरों को महीनों का समय लगता है और इसी कारण से पटोला की कीमत लाखों तक जाती है। कहा जाता है कि एक पटोला तीन पीढ़ियों तक बिल्कुल नए जैसी रहती है। 

वहीं पाणेतर सफेद या ऑफ व्हाइट रंग की बॉडी और लाल बॉर्डर और पल्लू की होती है। इस साड़ी को दुल्हन शादी के समय पहनती है। 

महाराष्ट्र की पैठनी और नवरी साड़ी

पैठनी साड़ी अपने मोर मोटिफ्स और जरीदार पल्लू के लिए जाना जाता है। इसके खूबसूरत रंग और मोटिफ्स के कारण यह लोगों को खूब पसंद आता है। वहीं नवरी साड़ी 9 गज लंबी होती है, जिसे बिना पेटीकोट के धोती की तरह पहना जाता है। मराठी संस्कृति में नवरी साड़ी की खास अहमियत है। 

पश्चिम बंगाल की तांत साड़ी

बंगाल की गर्मी और नमी के कारण यहां सूती साड़ियां ज्यादा पसंद की जाती हैं। तांत साड़ी काफी पतली होती है और इसके बॉर्डर काफी चौड़े होते हैं, जिन पर महीन बुनाई की जाती है। ये बंगाल की महिलाओं के पहनावे का खास हिस्सा है। 

असम की मखेला चादर

यह पारंपरिक साड़ी दो पीस की होती है। मखेला इसके नीचे का हिस्सा होता है, जो स्कर्ट जैसा होता है, जिसे पेटीकोट के ऊपर पहना जाता है और चादर ऊपरी हिस्सा होता है, जिसे पल्लू की तरह ओढ़ा जाता है। यह असम के मुग्गा सिल्क से बनाई जाती है। इसकी खासियत यह है कि हर धुलाई के साथ इसकी चमक बढ़ती है। इसे महिलाएं खास अवसरों और शादियों पर पहनती हैं। 

ओडिशा की संबलपुरी साड़ी

बंधकला और इकत शैली में बनी ये साड़ियां ओडिशा की संस्कृति का प्रतीक हैं। इन पर शंक, चक्र और फूल जैसे प्रतीक उकेरे जाते हैं। इसके धागों को बुनने से पहले रंगा जाता है। इस साड़ी पर दोनों तरफ एक जैसे डिजाइन दिखाई देते हैं।

मध्य प्रदेश की चंदेरी साड़ी

सिल्क और कॉटन के धागों से बनी चंदेरी साड़ी हल्की पार्दर्शी होती है और सुनहरे जरी के बूटी वर्क के लिए जाना जाती है। ये साड़ी काफी हल्की और आरामदायक होती है। 

कर्नाटक की मैसूर सिल्क साड़ी

यह साड़ी 100% शुद्ध सिल्क से बनाई जाती है। ये साड़ियां अपनी हल्की और मुलायम बनावट के लिए जानी जाती हैं। इसके बॉर्डर और पल्लू पर जरी का काम किया जाता है। 

केरल की कसावु साड़ी

ये साड़ियां सफेद या ऑफ व्हाइट रंग की होती हैं और इनके किनारों पर सुनहरी जरी का बॉर्डर होता है। केरल की गर्मी और उमस के कारण ये साड़ियां सूती कपड़े से बनी होती हैं और शादियों या ओणम जैसे उत्सवों पर पहनी जाती हैं।  

आंध्र प्रदेश की पोचमपल्ली साड़ी

ये साड़ियां अपने ज्योमेट्रिक पैटर्न के लिए जानी जाती हैं। इन्हें सिल्क और कॉटन दोनों में तैयार किया जाता है। ये साड़ी हाथ से बुनी जाती है और इसमें भी इकत शैली की बुनाई तकनीक का इस्तेमाल होता है। इस साड़ी को बनाने में भी काफी मेहनत और समय लगता है। 

बिहार की भागलपुरी टसर सिल्क

ये साड़ी बिहार के भागलपुर में बनाई जाती है और अपने इको-फ्रेंडली तरीके के लिए जाना जाता है। इस साड़ी के लिए सिल्क निकालने के लिए सिल्क वॉर्म्स को मारा नहीं जाता, जिसके कारण ये काफी मशहूर है। ये अपने हल्के वजन, खूबसूरत पैटर्न और जरी के काम के लिए जानी जाती है। इस साड़ी का चमकता रंग और छेद वाली बनावट इसे दूसरी सिल्क की साड़ियों से अलग बनाती हैं।