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    क्या धूप में जाते ही अपना असर खो रही है आपकी सनस्क्रीन? समझें ओल्ड और न्यू जनरेशन फिल्टर का असली फर्क

    Updated: Sun, 03 May 2026 05:52 PM (IST)

    सनस्क्रीन में इस्तेमाल होने वाले ओल्ड जेनरेशन फिल्टर और न्यू जेनरेशन फिल्टर में अंतर समझना जरूरी है। ...और पढ़ें

    क्या है सनस्क्रीन के फिल्टर्स में अंतर? (Picture Courtesy: Freepik)

    क्या है सनस्क्रीन के फिल्टर्स में अंतर? (Picture Courtesy: Freepik)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप जानते हैं कि आपकी सनस्क्रीन के अंदर मौजूद फिल्टर ही यह तय करते हैं कि आपकी त्वचा सूरज की हानिकारक किरणों से कितनी सुरक्षित है? आजकल सोशल मीडिया पर ओल्ड जनरेशन और न्यू जनरेशन फिल्टर्स को लेकर काफी चर्चा है। 

    लेकिन इन दोनों में फर्क क्या है और हमारी इंडियन स्किन के लिए क्या सही है? इस बारे में डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. गुरवीन वराइच ने हाल ही में एक वीडियो शेयर करके बताया। आइए जानें इस बारे में वो क्या कहती हैं। 

    अंतर क्या है? 

    ओल्ड जनरेशन फिल्टर्स का विकास मुख्य रूप से 1960 से 1980 के दशक के बीच हुआ था। इनमें एवोबेन्जोन, ऑक्सीबेन्जोन, ऑक्टोक्रिलीन और होमोसैलेट जैसे केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है।

    वहीं, न्यू जनरेशन फिल्टर्स 1990 और 2000 के दशक के बीच बने हैं। इनमें टीनोसोर्ब एम, टीनोसोर्ब एस, यूविनुल टी150 और एकाप्सुल जैसे केमिकल्स शामिल हैं।

    फोटो-स्टेबिलिटी और बनावट

    न्यू जनरेशन फिल्टर्स की सबसे बड़ी खूबी उनकी फोटो-स्टेबिलिटी है। इसका मतलब है कि ये सूरज की रोशनी में आने पर जल्दी खराब नहीं होते। पुराने फिल्टर्स में, खासतौर से एवोबेन्जोन बहुत अस्थिर होता है। यानी यह सूरज की किरणों से बचाने वाला फिल्टर खुद किरणों के संपर्क में आकर अपना असर धीरे-धीरे खोने लगता है। इसके अलावा, नए फिल्टर्स बनावट में हल्के होते हैं और कम मात्रा में इस्तेमाल किए जाने पर भी ज्यादा असरदार होते हैं।

    भारतीय त्वचा के लिए क्या सही है?

    इंडियन स्किन के लिए इन फिल्टर्स के बीच सबसे बड़ा अंतर UV स्पेक्ट्रम कवरेज का है।

    • पुराने फिल्टर्स- इनमें से ज्यादातर मुख्य रूप से UVB किरणों से सुरक्षा देते हैं, जो सनबर्न के लिए जिम्मेदार हैं। इनमें UVA सुरक्षा बहुत कम होती है।
    • नए फिल्टर्स- ये फिल्टर्स UVA और UVB दोनों के खिलाफ सुरक्षा देते हैं। भारतीय त्वचा के लिए UVA सुरक्षा बहुत जरूरी है क्योंकि यही किरणें पिगमेंटेशन, टैनिंग, असमान रंगत, डार्क स्पॉट्स और मेलास्मा का कारण बनती हैं।न्यू जनरेशन फिल्टर्स UVA1 और UVA2 दोनों को समान रूप से कवर करते हैं, जिससे बेहतर प्रोटेक्शन मिलता है।
    sunscreen Filters
    (AI Generated Image)

    क्या पुराने फिल्टर्स असुरक्षित हैं?

    बाजार में यह अफवाह अक्सर सुनने को मिलती है कि पुराने फिल्टर्स कैंसर या हार्मोनल असंतुलन पैदा करते हैं। लेकिन डॉ. वराइच कहती हैं कि आज तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है कि सनस्क्रीन में इस्तेमाल की जाने वाली मात्रा में ये फिल्टर्स स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं।

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