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    दुनिया को 'परिवार' मानने वाला इकलौता धर्म है सनातन; नौमिल की धर्मसभा में शंकराचार्य ने बढ़ाया भारत का मान

    Updated: Mon, 02 Mar 2026 11:08 PM (IST)

    शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने नौमिल और जलडेगा में धर्मसभाओं को संबोधित किया। उन्होंने सनातन धर्म की उदारता और 'वसुधैव कुटुंबकम' के सिद्धांत पर ज ...और पढ़ें

    जलडेगा में आयोजित धर्मसभा में मौजूद शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती जी महाराज।

    जलडेगा में आयोजित धर्मसभा में मौजूद शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती जी महाराज।

    HighLights

    1. सनातन धर्म की उदारता और 'वसुधैव कुटुंबकम' पर जोर दिया।

    2. धर्म के मार्ग पर चलने से जीवन में शांति मिलती है।

    जागरण संसू, मनोहरपुर। द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती जी महाराज ने बानो प्रखंड के नौमिल और जलडेगा में आयोजित धर्मसभाओं को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने सनातन धर्म की उदारता पर जोर देते हुए श्रद्धालुओं को धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

    जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत 

    शंकराचार्य का काफिला जैसे ही क्षेत्र में पहुंचा, श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा गया। नौमिल, जलडेगा, हाटिंगहोड़े, बानो, जराकेल और लचरागढ़ में महिलाओं ने सनातन परंपरा के अनुसार फूल और अक्षत बरसाकर महाराज का भव्य स्वागत किया। 
     
    पूरे मार्ग में जय श्रीराम और हर-हर महादेव के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय हो गया। नौमिल में धर्मसभा को संबोधित करते हुए शंकराचार्य ने कहा क‍ि सनातन धर्म जैसी उदार संस्कृति पूरे विश्व में कहीं नहीं है। 
     
    हम 'वसुधैव कुटुंबकम' के सिद्धांत पर चलते हुए पूरे विश्व को अपना परिवार मानते हैं। उन्होंने आगे कहा कि हम भारतभूमि पर जन्म लेकर भाग्यशाली हैं, जहां तुलसी, पीपल, वटवृक्ष और पवित्र नदियों की पूजा की परंपरा है। 

    शांति का मार्ग: सत्संग और धर्म 

    स्वामी जी ने जीवन में धर्म के महत्व को समझाते हुए रावण, बाली, हिरण्यकश्यप और कंस का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इन राजाओं के पास विशाल साम्राज्य था, लेकिन धर्म का मार्ग छोड़ने के कारण उनके जीवन में शांति नहीं थी। 
     
    उन्होंने श्रद्धालुओं को सलाह दी कि सत्संग, मंदिर दर्शन और अच्छे विचारों का चिंतन ही अंत समय में मनुष्य के काम आता है। इस दौरान काफी संख्‍या में भक्‍तों की भीड़ उमड़ी। 
     
    इस धार्मिक आयोजन में पूर्व विधायक कोचे मुंडा, प्रेमचंद साहू, मोहन महतो और भुवनेश्वर सिंह सहित भारी संख्या में स्थानीय गणमान्य लोग और महिला श्रद्धालु उपस्थित रहीं। कार्यक्रम को सफल बनाने में नीलम देवी, संध्या देवी और पन्नालाल साहू सहित पूरी आयोजन समिति का सक्रिय सहयोग रहा।