Indian Rail: पुणे-हावड़ा एसी दुरंतो एक्सप्रेस को अकोला स्टेशन पर मिला नया ठहराव, 11 अगस्त से लागू
पुणे-हावड़ा एसी दुरंतो एक्सप्रेस को 11 अगस्त से अकोला स्टेशन पर प्रायोगिक ठहराव मिला है, जबकि राउरकेला स्टेशन शेड गिरने के मामले में ठेकेदार पर भारी ज ...और पढ़ें

HighLights
राउरकेला शेड गिरने पर ठेकेदार पर जुर्माना, इंजीनियर निलंबित।
रेलवे ने घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए।
जागरण संवाददाता, चक्रधरपुर। दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर रेल मंडल से गुजरने वाली पुणे-हावड़ा-पुणे वातानुकूलित (AC) दुरंतो एक्सप्रेस ट्रेन का महाराष्ट्र के अकोला स्टेशन पर ठहराव प्रदान किया गया है।
वहीं दूसरी ओर, राउरकेला स्टेशन पर नवनिर्मित शेड गिरने के मामले में रेलवे प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए ठेका कंपनी और संबंधित कर्मचारी पर दंडात्मक कार्रवाई की है।
पुणे-हावड़ा एसी दुरंतो का अकोला में नया स्टॉपेज
रेलवे बोर्ड से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ट्रेन संख्या 12221/12222 पुणे-हावड़ा-पुणे एसी दुरंतो एक्सप्रेस का अकोला जंक्शन पर प्रायोगिक ठहराव दिया गया है।
यह नया स्टॉपेज 11 अगस्त से प्रभावी हो जाएगा। रेलवे बोर्ड ने भुसावल रेलवे डिवीजन को निर्देश दिया है कि अकोला जंक्शन पर ट्रेन के ठहराव और टिकट बिक्री की समीक्षा की जाए।
राउरकेला शेड हादसे पर कार्रवाई, ठेकेदार पर जुर्माना
यदि अकोला से पर्याप्त संख्या में यात्री और आय प्राप्त होती है, तो इस ठहराव को स्थायी रूप से जारी रखा जाएगा। राउरकेला रेलवे स्टेशन पर नवनिर्मित शेड के अचानक गिर जाने की घटना को रेलवे ने गंभीरता से लिया है।
मामले में ठेका कंपनी पर भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ निर्माण की पूरी भुगतान राशि भी वसूल कर ली गई है। चक्रधरपुर मंडल के सीनियर डीसीएम आदित्य कुमार चौधरी ने बताया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है।
इसके लिए वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड (SAG) के अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय टीम गठित की गई है। जांच में लापरवाही पाए जाने पर अन्य दोषियों पर भी कार्रवाई होगी।
फिलहाल, राउरकेला के आईओडब्ल्यू (सीनियर सेक्शन इंजीनियर) तुहिन सत्पथी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
लागत और बड़े अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल
शेड की वास्तविक निर्माण लागत पूछे जाने पर सीनियर डीसीएम जवाब देने से बचते दिखे। सूत्रों के अनुसार, इस शेड की अनुमानित लागत 1 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
इतनी बड़ी दुर्घटना के बाद भी किसी वरिष्ठ रेल अधिकारी पर गाज न गिरने से स्थानीय स्तर पर चर्चाएं गर्म हैं कि मामले को निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित रखकर बड़े अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।