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    चक्रधरपुर रेल मंडल में हाथियों का डेरा; ट्रैक पर आए 27 जंगली हाथी, घंटों थमी रही ट्रेनों की रफ्तार

    Updated: Tue, 10 Mar 2026 08:23 PM (IST)

    चक्रधरपुर रेल मंडल में मंगलवार तड़के हावड़ा-मुंबई रेल मार्ग पर 27 जंगली हाथियों के झुंड के ट्रैक के करीब आने से हड़कंप मच गया। जराईकेला और भालूलता स्ट ...और पढ़ें

    फाइल फोटो।

    फाइल फोटो।

    HighLights

    1. हावड़ा-मुंबई रेल मार्ग पर परिचालन 30 मिनट बाधित।

    2. एर्नाकुलम, कुर्ला एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें हुईं प्रभावित।

    जागरण संवाददाता, चक्रधरपुर । हावड़ा-मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर जंगली हाथियों की मौजूदगी ने एक बार फिर रेल प्रशासन और यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। मंगलवार तड़के चक्रधरपुर रेल मंडल के जराईकेला और भालूलता स्टेशनों के बीच 27 जंगली हाथियों का झुंड रेल लाइन के बेहद करीब पहुंच गया। 
     
    हाथियों की सुरक्षा और किसी भी संभावित रेल हादसे को टालने के लिए रेलवे ने लगभग आधे घंटे तक परिचालन पूरी तरह ठप रखा। वन विभाग से मिली सूचना के अनुसार, तड़के करीब 02:30 बजे हाथियों का बड़ा झुंड ट्रैक के पास देखा गया। 
     

    रात के अंधेरे में रेल ट्रैक पर पहुंचे गजराज 

    त्वरित कार्रवाई करते हुए रेलवे प्रशासन ने सुबह 02:40 बजे से 03:10 बजे तक बंडामुंडा और जराईकेला के बीच ट्रेनों की आवाजाही पर रोक लगा दी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बाद में बिसरा से जराईकेला के बीच ट्रेनों को 40 किमी प्रति घंटा की सीमित रफ्तार से चलाने के निर्देश दिए गए।


    इन ट्रेनों पर पड़ा असर 

    ट्रेनों के रुकने और गति धीमी होने के कारण यात्रियों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ा:

    •     ट्रेन नंबर 18190 (एर्नाकुलम एक्सप्रेस): राउरकेला स्टेशन पर करीब 1 घंटा 13 मिनट (02:03 से 03:16 बजे) तक रुकी रही।
    •     ट्रेन नंबर 18029 (कुर्ला एक्सप्रेस): इसे भी राउरकेला में लगभग एक घंटे (04:13 से 05:12 बजे) तक खड़ा रखा गया।


    इसके अलावा, कांसबाहाल और कुलुंगा स्टेशनों के बीच एक अकेले हाथी की मौजूदगी की सूचना पर रात 8 बजे से सुबह 5 बजे तक ट्रेनों की रफ्तार धीमी रखी गई।

    तीन महीनों से बढ़ी है गतिविधियां 

    रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, पिछले तीन महीनों से राउरकेला-नुआगांव और राउरकेला-जराईकेला रेल सेक्शन में जंगली हाथियों का विचरण काफी बढ़ गया है। वन विभाग और रेल प्रशासन लगातार समन्वय बनाकर निगरानी कर रहे हैं ताकि जान-माल का नुकसान न हो।