कोरोना क्लेम खारिज करना बजाज एलियांज को पड़ा भारी: उपभोक्ता आयोग ने सुनाया 7 लाख भुगतान का आदेश
बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस को कोरोना बीमा दावा खारिज करना महंगा पड़ा, चाईबासा उपभोक्ता आयोग ने ₹7.10 लाख भुगतान का आदेश दिया। ...और पढ़ें

अप्रैल 2021 में कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर उपभोक्ता को 18 अप्रैल को कोलकाता के गुड समैरिटन अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
HighLights
बजाज एलियांज को कोरोना बीमा दावा खारिज करना पड़ा महंगा।
जांचकर्ता रिपोर्ट अकेले दावा खारिज करने का आधार नहीं।
जागरण संवाददाता, चाईबासा। कोरोना महामारी के दौरान अस्पताल में हुए इलाज के वैध बीमा दावे (Health Insurance Claim) को पूरी तरह खारिज करना बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी को भारी पड़ गया।
पश्चिमी सिंहभूम जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, चाईबासा ने मामले में बीमा कंपनी की कार्रवाई को मनमानी व अनुचित माना है।
आयोग ने पीड़ित शिकायतकर्ता रंजिता पाल के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को कुल 7.10 लाख रुपये का भुगतान 45 दिनों के भीतर करने का सख्त निर्देश दिया है।
उपभोक्ता आयोग द्वारा जारी आदेश
- बीमा दावा राशि : ₹6,00,000 (छह लाख रुपये)
- मानसिक प्रताड़ना व उत्पीड़न का मुआवजा: ₹1,00,000 (एक लाख रुपये)
- मुकदमा खर्च : ₹10,000 (दस हजार रुपये)
- भुगतान की समय सीमा: आदेश के अनुपालन के लिए 45 दिन का समय।
जांचकर्ता की रिपोर्ट अकेले निर्णायक साक्ष्य नहीं: आयोग
मामले की सुनवाई के दौरान उपभोक्ता आयोग ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी द्वारा नियुक्त स्वतंत्र जांचकर्ता की रिपोर्ट अकेले किसी क्लेम को फर्जी, कपटपूर्ण या अपात्र साबित करने का अंतिम व निर्णायक प्रमाण नहीं हो सकती।
आयोग ने कहा कि ऐसी जांच रिपोर्ट को अन्य उपलब्ध चिकित्सकीय व कागजी साक्ष्यों की कसौटी पर परखा जाना अनिवार्य है।
अस्पताल द्वारा जांचकर्ता को सहयोग न करने, डॉक्टर से सीधी मुलाकात न होने अथवा कुछ मामूली दस्तावेज उपलब्ध न होने के तकनीकी आधार पर पूरे स्वास्थ्य दावे को सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता।
कोरोना संक्रमण के बाद कोलकाता में चला था इलाज
यह मामला चाईबासा के बांधपाड़ा निवासी देबज्योति पॉल की पत्नी रंजिता पाल से जुड़ा है। उन्होंने बजाज एलियांज से स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ले रखी थी।
अप्रैल 2021 में कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर गंभीर सांस की समस्या के कारण उन्हें 18 अप्रैल को कोलकाता के गुड समैरिटन अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 1 मई तक इलाज चला।
इसके बाद 2 से 5 मई तक उनका उपचार रेपोस क्लिनिक एंड रिसर्च सेंटर में हुआ। अस्पताल, दवाओं व जांच पर कुल 6,34,530 रुपये खर्च हुए।
रंजिता पाल ने इलाज के बिल, भुगतान रसीदें व मेडिकल पर्चे बीमा कंपनी को सौंपे। हालांकि, कंपनी ने कथित विसंगतियों का हवाला देकर 12 मई 2022 को दावा खारिज कर दिया था।
मदवार जांच के बजाय पूरा दावा खारिज करने पर सवाल
आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि बीमा कंपनी यह साबित करने में पूरी तरह विफल रही कि इलाज फर्जी या गैर-जरूरी था।
आयोग ने कहा कि यदि किसी खास खर्च पर आपत्ति थी, तो मदवार (Item-wise) जांच कर विवादित हिस्सा रोका जा सकता था, लेकिन पूरा दावा खारिज करना गलत है।
वहीं मामले में नामित कैनरा बैंक चाईबासा शाखा के खिलाफ सेवा में कमी का कोई प्रमाण न मिलने पर बैंक के विरुद्ध शिकायत खारिज कर दी गई।