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    पहाड़ी झरने और 'चुंआ' के भरोसे खरसावां के कोमाय गांव की ‘प्यास’, खटिया पर ढोए जा रहे मरीज

    Updated: Tue, 28 Apr 2026 03:58 AM (IST)

    खरसावां के कुचाई प्रखंड स्थित कोमाय गांव और उसके पांच टोले सड़क, पानी, स्वास्थ्य और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। ग्रामीण पहाड़ी झरने के ...और पढ़ें

    पहाड़ी झरने और 'चुंआ' के भरोसे खरसावां के कोमाय गांव की प्यास

    पहाड़ी झरने और 'चुंआ' के भरोसे खरसावां के कोमाय गांव की प्यास

    HighLights

    1. कोमाय गांव में सड़क, पानी, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव।

    2. ग्रामीण पहाड़ी झरने के 'चुंआ' से पानी पीने को मजबूर हैं।

    3. मरीजों को खटिया पर ढोकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया जाता है।

    संवाद सूत्र, खरसावां। सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई प्रखंड के अंतिम सीमा पर घने पहाड़ व जंगलों के बीच बसा है कोमाय गांव। प्रखंड मुख्यालय कुचाई से करीब 30 किमी की दूरी पर स्थित कोमाय गांव के पांच टोला के ग्रामीण आज भी सड़क, पानी, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिये तरस रहे है। इन पांचों टोला में पेयजल की स्थिति बेहद गंभीर है। 

    गांव के लोग पहाड़ी के नीचे बरसाती झरने के पास बने ‘चुंआ’ से पानी निकाल कर पीते हैं। ग्रामीणों को सबसे अधिक परेशानी तो बरसात के मौसम में होती है, जब चुआं के पानी में मिट्टी मिल जाने के कारण पानी गंदा होता है। 

    ऐसे में ग्रामीणों को काफी दूर से पानी ला कर अपनी प्यास बुझानी होती है। सड़क के अभाव में भारी मशीनें गांव तक न पहुंच पाने के कारण चापाकल तक नहीं लग पाए हैं।

    पगडंडियों का सहारा

    आज भी लोग जंगल के बीच कच्ची पगडंडियों पर चल कर अपने घरों तक पहुंचते है। कोमाय तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क है, परंतु इसके आस पास के टोला लोटाबुरु, बांदुबेड़ा, बुरुहातु, रेलोंग, बड़ागाड़ा व कुरकुली तक पहुंचने के लिये अभी तक पक्की सड़क नहीं बन पायी है। घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरे इस क्षेत्र में पहुंचना बेहद कठिन है। 

    सड़क न होने के कारण गांव तक एम्बुलेंस नहीं पहुंच पाती है, जिससे गंभीर मरीजों को आज भी खटिया पर ढोकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। तब वहां से एंबुलेंस के जरीये अस्पताल पहुंचाया जाता है।

    दो साल पहले लगा है टावर अब तक चालू नहीं

    बांदुबेड़ा, बुरुहातु, रेलोंग, बड़ागाड़ा व कुरकुली टोला में संचार व्यवस्था (नेटवर्क) ठप है। संचार व्यवस्था का का अभाव बच्चों के भविष्य और सूचना तंत्र पर भारी पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया किकरीब दो साल पहले यहां मोबाईल टावर लगाया गया है, परंतु अब तक इसे चालू नहीं किया गया है।

    खबरें और भी

    रोलाहातु पंचायत के सीमावर्ती क्षेत्र के गांव-टोला में मुख्य रूप से सड़क व पानी की समस्या है। सड़क बनने से पानी समेत अन्य समस्याओं का समाधान हो जाएगा। -सतरी सांगा, मुखिया

    रोलाहातु पंचायत के अधिकांश गांवों में सड़क, पानी, स्वास्थ्य की समस्या है. नेटवर्क की भी समस्या है। बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराया जाए। -भोंज सांगा, ग्राम प्रधान

    पानी की काफी समस्या होती है। डेढ़ से दो किमी दूर पहाड़ किनारे स्थित चुंआ से पानी ला कर अपनी प्यास बुझाते है। जल मीनार कर घरेलू जलापूर्ति की जाए। -चरण मुंडा, ग्रामीण, कोमाय

    कोमाय में एक भी जल मीनार नहीं है। गर्मी व बरसात के मौसम में पानी की काफी परेशानी होती है। स्थायी समाधान किया जाए। -जोसेफ पुरती, ग्रामीण कोमाय