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सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड DGP नियुक्ति नियमों पर उठाए सवाल, खतरे में तदाशा मिश्रा की कुर्सी?

By Agency Edited By: Rajat Mourya
Published: Thu, 08 Oct 2026 09:01 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड में डीजीपी नियुक्ति के नियमों को प्रकाश सिंह मामले के फैसले के खिलाफ बताया है। अदालत ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड डीजीपी नियुक्ति नियमों पर उठाए सवाल, प्रकाश सिंह फैसले का उल्लंघन

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड डीजीपी नियुक्ति नियमों पर उठाए सवाल, प्रकाश सिंह फैसले का उल्लंघन

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड डीजीपी नियुक्ति नियमों पर सवाल उठाए।

  2. प्रकाश सिंह फैसले के विपरीत नियमों को रद करने की बात कही।

  3. डीजीपी तदाशा मिश्रा को जवाब देने का अवसर दिया जाएगा।

एजेंसी, रांची/नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि झारखंड के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति के नियम प्रकाश सिंह मामले में उसके पहले दिए गए फैसले से टकराते हैं। अदालत ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी तदाशा मिश्रा से जवाब मांगा है, जिन्हें सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले राज्य का पुलिस प्रमुख नियुक्त किया गया था।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जायमाल्य बागची और वी. मोहना की पीठ को झारखंड सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बताया कि राज्य नियमों पर फिर से विचार करेगा।

पीठ ने कहा कि मिश्रा को जवाब दाखिल करने का मौका दिया जा रहा है, क्योंकि नियम रद होने से उन पर असर पड़ेगा।

पीठ ने कहा, 'यह प्रविधान प्रकाश सिंह मामले में दिए फैसले के कानून से सीधे टकराता दिखता है। यदि नियम रद किया जाता है, तो झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति भी रद करनी होगी, इसलिए उन्हें सुनवाई का अवसर देना उचित होगा।'

मुख्य न्यायधीश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विपरीत की गई कोई भी नियुक्ति रद करनी होगी। सिब्बल ने कहा कि मिश्रा की नियुक्ति के मामले में वह उनका बचाव करना चाहेंगे। हालांकि, उन्होंने कहा कि राज्य नियमों पर फिर विचार करेगा।

पीठ ने झारखंड सरकार से मिश्रा को नोटिस देने को कहा

ऐतिहासिक प्रकाश सिंह फैसले के तहत डीजीपी पद के लिए विचार किए जाने वाले अधिकारी की सेवा में कम से कम छह महीने बाकी होना जरूरी है। इसका उद्देश्य पद पर स्थिरता और योग्यता सुनिश्चित करना है।

पीठ ने झारखंड सरकार से मिश्रा को नोटिस जारी करने को भी कहा, ताकि वह अदालत में पेश होकर उसकी सहायता कर सकें।

पीठ ने कहा, 'राज्य विवादित नियम पर फिर से विचार कर सकता है। मामले को एक सप्ताह बाद सूचीबद्ध किया जाए। वैकल्पिक रूप से राज्य चाहे तो जवाबी हलफनामा दाखिल कर सकता है।'

पीठ ने अदालत की सहायता के लिए न्यायमित्र नियुक्त किए गए वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन से झारखंड द्वारा डीजीपी नियुक्ति के लिए बनाए नियमों की वैधता पर विचार करने को कहा।

केंद्र भी झारखंड सरकार के खिलाफ

केंद्र ने शीर्ष अदालत में 'झारखंड के पुलिस महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक के चयन और नियुक्ति संबंधी विनियम, 2025' को चुनौती दी है। राज्य सरकार ने इसे 8 जनवरी, 2025 को अधिसूचित किया था।

केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र ने झारखंड सरकार से बार-बार कहा कि उसके नियम सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह फैसले के खिलाफ हैं और उन्हें बरकरार नहीं रखा जा सकता। यदि किसी अन्य राज्य ने भी ऐसे नियम बनाए हैं, तो उन नियमों को भी रद किया जाना चाहिए।

केंद्र ने राज्य के खिलाफ अवमानना याचिका में आरोप लगाया है कि झारखंड सरकार ने डीजीपी की नियुक्ति पर प्रकाश सिंह फैसले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन कर अवमानना की है।

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