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    कुख्यात अमन साहू की तरह ही उसके प्रतिद्वंद्वी सुजीत सिन्हा का भी हुआ एनकाउंटर, जेल से चलता था रंगदारी का साम्राज्य

    Updated: Mon, 03 Aug 2026 12:45 AM (IST)

    Sujit Sinha Killed: कुख्यात अमन साहू की तरह ही उसके प्रतिद्वंद्वी सुजीत सिन्हा का भी एनकाउंटर हो गया, जिसका आपराधिक साम्राज्य पलामू से कोयलांचल तक फैल ...और पढ़ें

    गैंगस्टर अमन साहू और सुजीत सिन्हा। (फाइल फोटो)

    गैंगस्टर अमन साहू और सुजीत सिन्हा। (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. सुजीत सिन्हा का एनकाउंटर, अमन साहू जैसा ही अंजाम।

    2. जेल से भी चलता था उसका आपराधिक नेटवर्क।

    3. पत्नी रिया सिन्हा ने संभाली थी गिरोह की कमान।

    राज्य ब्यूरो, रांची। छत्तीसगढ़ के रायपुर से रांची लाने के दौरान जिस तरह कुख्यात अमन साहू का पलामू में एनकाउंटर हुआ, उसी तरह उसके प्रतिद्वंद्वी सुजीत सिन्हा का भी हो गया। कभी दोनों साथ मिलकर अपराध में सक्रिय थे, बाद में दोनों प्रतिद्वंद्वी हो गए थे।

    रविवार की रात पुलिस ने सुजीत सिन्हा को झारखंड के जामताड़ा जिले में मुठभेड़ में मार गिराया। साहिबगंज जेल से धनबाद जेल में शिफ्ट करने के लिए उसे लेकर पुलिस आ रही थी। इसी दाैरान शौच का बहाना बनाकर सुजीत ने भागने की कोशिश की। इस दाैरान पुलिस से मुठभेड़ में मारा गया।

    झारखंड के संगठित अपराध की दुनिया में सुजीत सिन्हा का नाम लंबे समय तक दहशत का पर्याय बना रहा। पलामू से शुरू हुआ उसका आपराधिक सफर धीरे-धीरे रांची, लातेहार, रामगढ़, हजारीबाग और धनबाद समेत पूरे कोयलांचल क्षेत्र तक फैल गया।

    पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार सुजीत सिन्हा हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, लेवी वसूली, आर्म्स एक्ट और संगठित अपराध के मामलों का आरोपित था। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने के बाद भी उसके गिरोह की गतिविधियां पूरी तरह थमी नहीं।

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    पुलिस और जांच एजेंसियों के अनुसार, जेल के भीतर से ही गिरोह का संचालन होता रहा और बाहर मौजूद सहयोगी उसके इशारों पर रंगदारी वसूलते रहे। पुलिस के अनुसार, सुजीत सिन्हा ने वर्ष 2000 के दशक की शुरुआत में पलामू में छोटे अपराधों से अपना सफर शुरू किया।

    शुरुआत रंगदारी, जमीन कब्जाने और ठेकेदारों को धमकाने से हुई, लेकिन जल्द ही उसने अपना अलग गिरोह बना लिया। समय के साथ उसने कोयला कारोबार, सड़क और रेलवे परियोजनाओं, क्रशर उद्योग, बिल्डरों तथा शराब कारोबारियों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की लेवी वसूली का नेटवर्क खड़ा कर लिया।

    कोयलांचल में वर्चस्व की लड़ाई के दौरान कई अन्य आपराधिक गिरोहों के साथ उसका संघर्ष भी चर्चा में रहा। पुलिस का कहना है कि गिरोह में लगातार नए युवकों को शूटर के रूप में शामिल किया जाता था। उन्हें हथियार उपलब्ध कराकर रंगदारी, फायरिंग और हत्या जैसी वारदातों में इस्तेमाल किया जाता था। इसी रणनीति ने गिरोह को लंबे समय तक सक्रिय बनाए रखा।

    जेल से चलता रहा नेटवर्क

    सुजीत सिन्हा की गिरफ्तारी के बाद भी उसके नेटवर्क पर पूरी तरह लगाम नहीं लग सकी। जांच एजेंसियों के अनुसार, विभिन्न जेलों में बंद रहने के दौरान भी वह मोबाइल फोन और इंटरनेट आधारित माध्यमों से कारोबारियों को धमकी भरे संदेश और कॉल भेजकर रंगदारी मांगता था।

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    जेल प्रशासन की सख्ती बढ़ने पर उसे समय-समय पर अलग-अलग उच्च सुरक्षा वाली जेलों में स्थानांतरित किया गया, लेकिन पुलिस का दावा है कि गिरोह के सदस्य बाहर से गतिविधियों को संचालित करते रहे।

    महिलाओं ने संभाली कमान

    पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि जेल में निगरानी बढ़ने के बाद गिरोह के संचालन में महिलाओं की भूमिका बढ़ गई। पुलिस के अनुसार, पहले उसकी कथित सहयोगी प्रियंका कुमारी उर्फ खुशबू उर्फ सृष्टि गिरोह के आर्थिक लेन-देन, शूटरों तक निर्देश पहुंचाने और नेटवर्क को सक्रिय रखने में भूमिका निभाती थी।

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    उसकी गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों का दावा है कि पत्नी रिया सिन्हा ने आर्थिक गतिविधियों और कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कामों की जिम्मेदारी संभाली। वर्तमान में रिया सिन्हा भी आपराधिक मामलों में चाईबासा जेल में बंद है।