गिरिडीह में भाजपा के लिए चुनौती बन गए थे सुदिव्य सोनू, गांडेय में कल्पना सोरेन को दिलाई दो बार जीत
दिवंगत सुदिव्य सोनू ने गिरिडीह में भाजपा को चुनौती देकर झामुमो को मजबूत किया। उन्होंने गांडेय में कल्पना सोरेन की ...और पढ़ें

2019 और 2025 में गिरिडीह सीट पर भाजपा को हरा कर झामुमो को मजबूत किया।
HighLights
गिरिडीह में भाजपा को हराकर झामुमो को मजबूत किया।
गांडेय में कल्पना सोरेन की जीत के मुख्य रणनीतिकार।
झामुमो के ओबीसी चेहरे के तौर पर पहचान बनाई।
राज्य ब्यूरो, रांची। राज्य सरकार के मंत्री रहे दिवंगत सुदिव्य कुमार सोनू ने गिरिडीह जिले में भाजपा के पारंपरिक सीटों पर झारखंड मुक्ति मोर्चा को जीत दिलाकर अपना कद बड़ा किया था। 2019 के विधानसभा चुनाव में पहली बार गिरिडीह सीट पर सुदिव्य कुमार सोनू को झामुमो के टिकट पर जीत मिली।
जीत का अंतर मामूली था, लेकिन सुदिव्य सोनू ने गिरिडीह और इससे सटे कोयलांचल के क्षेत्र में भाजपा के वोटबैंक को मजबूत चुनौती दी। गांडेय विधानसभा के लिए हुए उपचुनाव में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन की जीत का अंतर 25 हजार से अधिक वोटों का रहा।
सुदिव्य सोनू की रणनीति के सहारे भाजपा का वोट बैंक यहां दरका और झामुमो इस सीट पर मजबूत होती गई। 2025 के विधानसभा चुनाव में अभी भाजपा के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के सामने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर निरंजन राय को खड़ा कर मजबूत राजनीतिक चुनौती देने की रणनीति भी सुदिव्य सोनू की ही मानी जाती है।
हालांकि मतदान के पहले निरंजन राय ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली और कड़े मुकाबले में मरांडी को यहां से जीत मिली थी। 2025 में गिरिडीह सीट से सुदिव्य सोनू को फिर से झामुमो के टिकट पर जीत मिली और गिरिडीह जिले में भारतीय जनता पार्टी के सामने वो एक दीवार की तरह खड़े हो गए।
झामुमो के ओबीसी चेहरे के तौर पर बन रही थी पहचान
शिबू सोरेन परिवार से निकटता और राज्य कैबिनेट में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की वजह से सुदिव्य सोनू को झामुमो में नंबर दो माना जाने लगा था। विधानसभा में सरकार के पक्ष में तथ्यों के साथ बात रखने वाले सुदिव्य सोनू पिछड़े समुदाय के बीच झामुमो का चेहरा बनने की प्रक्रिया में थे।
हालांकि राजनीतिक तौर पर उन्होंने दूसरे समुदाय या जाति के प्रति किसी वैमनस्यता वाले बयान से परहेज किया। लेकिन पिछड़े समुदाय के हाशिए पर खड़ी जातियों को झामुमो के पक्ष में गोलबंद करने के लिए उन्होंने एक रणनीति बनाई थी। इसी का परिणाम है कि गांडेय के अलावा गिरिडीह से सटे सिंदरी, बाघमारा जैसी सीटों पर भाजपा के समर्थन में कमी आई।
सुदिव्य में विकासात्मक कार्यों में प्राथमिकता तय करने की थी क्षमता : स्पीकर
विधानसभाध्यक्ष रबीन्द्र नाथ महतो ने कहा कि मंत्री सुदिव्य कुमार विधायी कार्यों में काफी रुचि रखते थे। विकासात्मक कार्यों में प्राथमिकता तय करने की उनमें क्षमता थी। वह वर्तमान मंत्रिमंडल के एक ऊर्जावान मंत्री थी।
मंत्री के निधन की जानकारी मिलने के बाद विधानसभाध्यक्ष ने अपने क्षेत्रीय आवास नाला से गिरिडीह पहुंचकर उनके परिजनों से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाया तथा पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि अर्पित की।
विधानसभाध्यक्ष ने उनके निधन पर शोक प्रकट करते हुए कहा कि हमारे बीच से उनका यूं चला जाना दुखद और राज्य के लिए अपूरणीय क्षति है। एक जनप्रतिनिधि के रूप में जनसेवा से उनका व्यापक सरोकार रहा, जिसे गिरिडीह सहित राज्य की जनता कभी भूल नहीं पाएगी।
