पूर्व IAS आरएस शर्मा की अनकही कहानी: आधार से लेकर कोविड टीकाकरण और अब झारखंड में टेली आईसीयू तक का सफर
आरएस शर्मा, आधार कार्ड के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले, अब आईआईटी कानपुर में 'डिस्कवरी ऑफ डॉक्टर' प्लेटफॉर्म बना ...और पढ़ें

टेली-आईसीयू का उद्देश्य दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा पहुंचाना है। प्रधानमंत्री के साथ एक कार्यक्रम में आरएस शर्मा। (फोटो: एफबी वॉल से)
HighLights
आरएस शर्मा 'डिस्कवरी ऑफ डॉक्टर' प्लेटफॉर्म विकसित कर रहे हैं।
झारखंड के चार जिलों में 10 बिस्तर के टेली-आईसीयू का उद्घाटन।
कोविड टीकाकरण सॉफ्टवेयर और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन में अहम योगदान।
अश्विनी रघुवंशी, रांची। आरएस शर्मा, न सिर्फ झारखंड अपितु पूरे देश में यह जाना पहचाना नाम है। इंफोसिस के संस्थापक नंदन एम नीलकेणि के साथ मिल कर उन्होंने आधार कार्ड को बनाने और उसे देश भर में लागू कराने में बड़ा योगदान दिया। ट्राई के अध्यक्ष रहे हैं।
सेवानिवृत हो गए तो आईआईटी कानपुर में अतिथि प्रोफेसर के तौर पर टेक्नोलाजी एवं पाॅलिसी रेगुलेशन पर विद्यार्थियों से ज्ञान बांट रहे हैं। वहां कंप्युटर साइंस के प्रोफेसर एवं विद्यार्थियों के सहयोग से डिस्कवरी ऑफ डाक्टर प्लेटफार्म तैयार करा रहे हैं। उनकी सोच बिल्कुल साफ है, तकनीक के उपयोग से मरीज तुरंत अपने लिए उपयोगी डाक्टर की खोज कर सके।
झारखंड के चार जिलों में 10 बिस्तर के टेली आईसीयू का बुधवार को होटल बीएनआर चाणक्य से आनलाइन उदघाटन हुआ तो आरएस शर्मा भी इस मौके के गवाह बो। वे यहां मुख्य सचिव भी रहे हैं। वहां आरएस शर्मा ने बताया कि अभी कई ऐसे डाक्टर हैं जिन्हें मरीज देखने की फुर्सत नहीं है।
बड़ी संख्या में ऐसे विशेषज्ञ डाक्टर हैं जिनके पास वक्त हैं लेकिन मरीज नहीं पहुंच पाते। इसके लिए डिस्कवरी ऑफ डाक्टर प्लेटफार्म उपयोगी होगा। अभी यह प्रयोग शुरुआती चरण में है। भविष्य में इसे और व्यापक बनाया जा सकता है।
अमेरिकी विशेषज्ञ की मदद से बनवाया टेली आईसीयू
झारखंड में टेली आईसीयू की स्थापना में आरएस शर्मा ने सूत्रधार की भूमिका निभाई है। आधार कार्ड की परिकल्पना को साकार करने के लिए सन माइक्रो सिस्टम कंपनी की नौकरी छोड़ श्रीकांत राधामुनि अमेरिका से भारत आए थे। बतौर स्वयंसेवक। उन्होंने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण में हेड ऑफ टेक्नोलाजी की जवाबदेही दी गई थी। काम पूरा हुआ तो अपने अपने रास्ते।
कोविड काल में आरएस शर्मा से फिर उनकी भेंट हुई। श्रीकांत ने 10 बेड आइसीयू का प्रोजेक्ट शुरू किया था। पूर्वोत्तर भारत के मणिपुर, त्रिपुरा, नागालैंड, असम, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश के सुदूर इलाके में इसकी स्थापना कर रहे थे ताकि टेली कम्युनिकेशन से इलाज हो सके।
आरएस शर्मा कहते हैं, उन्हें लगता था कि झारखंड में भी यह बेहद उपयोगी हैं। इसलिए अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह से बात की। उन्होंने कोल इंडिया से मदद ली। और टेली आईसीयू तैयार हो गया।

कोविड टीकाकरण के लिए मोदी ने दी थी जवाबदेही
आरएस शर्मा ने 35 साल तक बतौर आइएएस कार्य किया। झारखंड में कभी स्वास्थ्य विभाग में काम नहीं किया था। 2015 में सेवानिवृत हुए। पांच साल ट्राइ के अध्यक्ष रहे। याद करते हैं, 2020 में कोविड का प्रकोप शुरू हुआ था तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इससे निपटने के लिए कमेटी बनाई थी। विचार आया कि कोविड से निपटने में डिजिटल टेक्नोलाजी का उपयोग प्रभावी हो सकता है या नहीं।
तब टेली कांफ्रेसिंग के जरिए उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी को कोविड से निपटने के उपायों पर प्रजेटेंशन दिया था-वैक्सीनेशन फार 1.3 बिलियन इंडियन। तब वैक्सीन नहीं आई थी। 2021 में टीकाकरण की संभावना बन रही थी। उस वक्त उत्तर प्रदेश में अपने गांव पर था। संदेश आया कि मोदीजी ने दिल्ली बुलाया है।
दिल्ली गए तो पीएम बोले कि इसके लिए साफ्टवेयर बनाइए। बनाया भी। उसी आधार पर टीकाकरण हुआ। प्रधानमंत्री ने उन्हें नेशनल हेल्थ अथाॅरिटी का सीईओ बनाया था। काम बढ़ता गया। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन लागू किया जिससे आज देश भर के 60 से 70 करोड़ लोगों का स्वास्थ्य डेटा उपलब्ध है।
