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रांची रिम्स में स्वाइन फ्लू को लेकर अलर्ट: डेंगू वार्ड में बना 6 बेड का आइसोलेशन वार्ड, विशेष मेडिकल टीम तैनात

Published: Fri, 04 Sep 2026 08:18 PM (IST)

रांची रिम्स ने स्वाइन फ्लू (एच1एन1) के बढ़ते मामलों के मद्देनजर डेंगू वार्ड में छह बेड का आइसोलेशन वार्ड स्थापित किया है।

रांची रिम्स में स्वाइन फ्लू को लेकर अलर्ट

रांची रिम्स में स्वाइन फ्लू को लेकर अलर्ट

HighLights

  1. रिम्स में स्वाइन फ्लू के लिए छह बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार।

  2. संक्रमित और संदिग्ध मरीजों को अलग रखकर उपचार की व्यवस्था।

  3. वार्ड में विशेष चिकित्सक और नर्सिंग टीम की तैनाती हुई।

जागरण संवाददाता, रांची। स्वाइन फ्लू (एच1एन1) के बढ़ते मामलों को देखते हुए रिम्स प्रबंधन ने मरीजों को अलग रखकर इलाज और संक्रमण नियंत्रण के लिए छह बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार किया है। यह वार्ड रिम्स के डेंगू वार्ड में बनाया गया है। यहां एच1एन1 के संदिग्ध और संक्रमित मरीजों को अन्य मरीजों से अलग रखकर उपचार किया जाएगा। वार्ड में मरीजों की नियमित निगरानी और उपचार के लिए अलग व्यवस्था की गई है।

आइसोलेशन वार्ड के संचालन के लिए चिकित्सक के साथ नर्सिंग टीम की भी तैनाती की गई है। वार्ड की प्रभारी डॉ. कंचन किरण कुजूर को बनाया गया है, जबकि लेहली बाला को सिस्टर इंचार्ज की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा ऐश्वर्या किस्कू, स्वाति कुमारी, रीता कुमारी, अनिशा कुल्लू, सुनीता कच्छप, सोमा रानी महतो और ममता कुल्लू को भी ड्यूटी पर लगाया गया है। 

रिम्स प्रबंधन के अनुसार, अलग आइसोलेशन वार्ड बनाने का उद्देश्य एच1एन1 संक्रमित या संदिग्ध मरीजों को दूसरे मरीजों से अलग रखना है। इससे संक्रमण फैलने की आशंका को कम करने के साथ मरीजों की निगरानी और उपचार को भी व्यवस्थित किया जा सकेगा।

फ्लू जैसे लक्षण दिखें तो जांच जरूरी

रिम्स में अभी स्वाइन फ्लू के लक्षणों के साथ हर दिन दर्जनों मरीज पहुंच रहे हैं। स्वाइन फ्लू में सामान्य तौर पर अचानक बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द, सिरदर्द और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। कुछ मरीजों में सांस लेने में परेशानी भी हो रही है। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।

मास्क और हाथों की स्वच्छता पर जोर

एच1एन1 संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों के संपर्क में आने से संक्रमण फैल सकता है। ऐसे में भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतना, खांसते-छींकते समय मुंह और नाक ढंकना, हाथों की नियमित सफाई करना और फ्लू जैसे लक्षण होने पर दूसरों से दूरी बनाए रखना संक्रमण नियंत्रण में मददगार है।

गंभीर लक्षण पर तत्काल अस्पताल पहुंचें

डॉक्टरों के अनुसार लगातार तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी, पानी की कमी या हालत बिगड़ने पर मरीज को तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। चिकित्सकों की सलाह के बिना एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं लेने से बचना चाहिए। रिम्स में अलग वार्ड और टीम की तैनाती से गंभीर अथवा संदिग्ध मरीजों के लिए समय पर उपचार और निगरानी की व्यवस्था मजबूत होगी।