अब रिम्स रांची में रिपोर्ट के लिए नहीं लगानी पड़ेगी कतार, मोबाइल पर सीधे मिलेगी लाइव जांच रिपोर्ट
रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में अब मरीजों को जांच रिपोर्ट लेने के लिए लंबी कतार में नहीं लगना होगा।

रांची रिम्स। (जागरण)
HighLights
जांच रिपोर्ट अब सीधे मोबाइल पर लिंक के माध्यम से मिलेगी।
मरीजों को रिपोर्ट लेने के लिए अस्पताल दोबारा नहीं आना होगा।
गंभीर बीमारियों के मरीजों और बुजुर्गों को विशेष लाभ मिलेगा।
जागरण संवाददाता, रांची। राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में इलाज कराने वाले मरीजों के लिए जांच रिपोर्ट लेने की लंबी कतार और कई दिनों के इंतजार से राहत मिलने लगी है।
रिम्स में अब जांच रिपोर्टिंग को लाइव कर दिया गया है। जांच पूरी होने के बाद मरीज के मोबाइल पर रिपोर्ट का लिंक भेजा जा रहा है।
लिंक खोलकर मरीज घर बैठे अपनी रिपोर्ट देख और डाउनलोड कर सकता है। सामान्य जांच की रिपोर्ट करीब चार घंटे में उपलब्ध होने लगी है।
जिन जांचों में रिपोर्ट तैयार करने में चार घंटे से अधिक समय लगता है, उनकी रिपोर्ट निर्धारित प्रक्रिया और समय के अनुसार उपलब्ध होगी।
पहले मरीजों को जांच रिपोर्ट के लिए सामान्य तौर पर तीन से चार दिन तक इंतजार करना पड़ता था। नई व्यवस्था शुरू होने के पहले ही दिन 1000 से अधिक मरीजों को मोबाइल पर रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई।
मरीज को एक ही जांच के लिए दोबारा रिम्स आने की जरूरत नहीं
रिम्स जैसे बड़े सरकारी अस्पताल में जांच के बाद रिपोर्ट लेने के लिए दोबारा अस्पताल पहुंचना मरीज और उसके स्वजन के लिए बड़ी परेशानी रही है।
सेंट्रल लैब डॉ. साकेत बताते हैं कि दूर-दराज के जिलों से आने वाले मरीजों को तो रिपोर्ट के लिए दोबारा रांची आने में समय और पैसे दोनों खर्च करने पड़ते थे।
कई बार रिपोर्ट तैयार होने की जानकारी नहीं मिलने पर मरीज या स्वजन अस्पताल में घंटों इंतजार करते थे। अब जांच के बाद मोबाइल पर लिंक पहुंचने से यह परेशानी काफी हद तक खत्म होगी।
मरीज को रिपोर्ट लेने के लिए अलग से काउंटर पर लाइन लगाने की जरूरत नहीं होगी। खासकर बुजुर्ग, गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज, गर्भवती महिलाएं, बच्चों और दूर से आने वाले मरीजों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
डिजिटल माध्यम से सीधे रिपोर्ट
यह सुविधा एलआइएस (लैबोरेटरी इंफार्मेशन सिस्टम) के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है। जांच का नमूना लैब में पहुंचने से लेकर जांच पूरी होने और रिपोर्ट तैयार होने तक की प्रक्रिया डिजिटल प्रणाली से जुड़ती है।
रिपोर्ट तैयार होने के बाद मरीज के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर लिंक भेजा जाता है। मरीज उस लिंक के माध्यम से रिपोर्ट डाउनलोड कर सकता है। रिम्स की सेंट्रल लैब में हर दिन बड़ी संख्या में मरीजों के नमूनों की जांच होती है।
कैंसर समेत गंभीर बीमारियों के मरीजों को बड़ा लाभ
रिपोर्ट मोबाइल पर मिलने का सबसे बड़ा फायदा उन मरीजों को होगा जिनका इलाज लंबे समय तक चलता है। कैंसर, रक्त संबंधी बीमारी, किडनी, लीवर, संक्रमण और अन्य गंभीर बीमारियों में मरीजों को बार-बार जांच करानी पड़ती है।
कई मरीजों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही चिकित्सक अगली दवा, उपचार या आगे की जांच तय करते हैं। यदि रिपोर्ट समय पर मोबाइल पर उपलब्ध हो जाती है तो मरीज उसे चिकित्सक को दिखाकर आगे की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
इससे इलाज में होने वाली अनावश्यक देरी कम हो सकती है। खासकर भर्ती मरीजों के अलावा ओपीडी के मरीजों को इसका अधिक फायदा होगा।
डॉक्टरों के लिए भी आसान होगा इलाज का निर्णय
डिजिटल रिपोर्टिंग का लाभ केवल मरीजों तक सीमित नहीं रहेगा। चिकित्सकों के लिए भी जांच परिणाम समय पर उपलब्ध होना उपचार प्रक्रिया को तेज कर सकता है।
मरीज को रिपोर्ट लेकर काउंटर से वार्ड या ओपीडी तक आने की जरूरत नहीं होगी। यदि रिपोर्ट इलेक्ट्रानिक स्वास्थ्य रिकार्ड से जुड़ती है तो मरीज की पिछली और वर्तमान जांचों को एक साथ देखने की दिशा में भी यह उपयोगी कदम साबित हो सकता है।
सबसे बड़ी चुनौती अभी भी सैंपल जमा करने की व्यवस्था
हालांकि, रिपोर्ट मोबाइल पर मिलने से प्रक्रिया का एक बड़ा हिस्सा डिजिटल हो गया है, लेकिन सैंपल संग्रह और उसे लैब तक पहुंचाने की व्यवस्था अभी भी सुधार की मांग करती है।
वर्तमान में कई मामलों में जांच के लिए निकाला गया सैंपल मरीज या उसके स्वजन को ही दे दिया जाता है और उन्हें स्वयं लैब तक जाकर सैंपल जमा करना पड़ता है।
यह व्यवस्था डिजिटल रिपोर्टिंग के उद्देश्य को कमजोर करती है। यदि अस्पताल में सैंपल संग्रह से लेकर लैब तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया को भी केंद्रीकृत और डिजिटल ट्रैकिंग से जोड़ा जाए तो मरीज को जांच के दौरान और कम भागदौड़ करनी पड़ेगी।
आगे सैंपल संग्रह भी हो डिजिटल तो बनेगा पूरा सिस्टम
रिम्स में रिपोर्टिंग की यह व्यवस्था अस्पताल की डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कदम है। अब अगला लक्ष्य सैंपल संग्रह को भी इसी तरह व्यवस्थित करना होना चाहिए।
हर सैंपल को मरीज की पहचान संख्या से जोड़कर उसका डिजिटल बारकोड बनाया जाए, सैंपल की स्थिति मरीज या चिकित्सक देख सकें और लैब में पहुंचने से लेकर रिपोर्ट जारी होने तक पूरी प्रक्रिया दर्ज हो तो जांच व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगी।
