झारखंड में मार्च के अंत तक बनी रहेगी ठंड, रांची में बदलते मौसम का दिख रहा असर
रांची में हालिया वर्षा और नमी के बाद मौसम में बदलाव आया है। मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि ला-नीना, घटती हरियाली और प्रदूषण मुख्य कारक हैं। आग ...और पढ़ें

राजधानी रांची में शाम साढ़े पांच बजे ही हो गया अंधेरा। (फोटो: संजय सुमन)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, रांची। अबकी बार मानसून की झमाझम वर्षा के बाद कंपकंपाती ठंड और अब ससमय गर्मी की दस्तक ने बेहतर मौसम के संकेत दिए हैं। पर्याप्त मात्रा में वर्षापात ने ठंड के साथ साथ नमी के साथ गर्मी का असर दिखाना शुरू कर दिया है।
अगले 15 से 20 दिनों तक वातावरण में नमी बनी रहेगी। पिछले कुछ दिनों से बढ़ी गर्मी ने बंगाल की खाड़ी के आसपास बादल संघनन की प्रक्रिया में तेजी लाई।
जिसका असर रविवार को भी देखने को मिला जब तेज हवा के साथ मेघगर्जन और कुछेक जगहों पर छिटपुट तो कहीं मध्यम दर्जे की वर्षा रिकार्ड की गई। इससे गर्मी का असर कम होगा। आगामी दिनों तापमान में 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने की संभावना है।
उक्त जानकारी के साथ मौसम से जुड़े विभिन्न अपडेट्स मौसम विज्ञान केंद्र रांची के वरीय विज्ञानी अभिषेक आनंद ने दैनिक जागरण के वरीय संवाददाता कुमार गौरव के साथ साझा की। पेश है बातचीत के अंश।

सवाल : अबकी बार गर्मी का कितना असर देखने को मिलेगा?
विज्ञानी : ला-नीना के सक्रिय होने के कारण ठंड ने जहां समय से पूर्व दस्तक दी थी तो वहीं गर्मी का असर भी अप्रैल और मई माह में बढ़ेगा।
हालांकि, रविवार को मौसम में हुए परिवर्तन से आगामी दिनों तापमान में 5 डिग्री सेल्सियस तक कमी आ सकती है।
सवाल : मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के मुख्य कारक क्या हैं।
विज्ञानी : बेशक, कम हो रही हरियाली इसके मुख्य कारक हैं। हमारा यह पूरा क्षेत्र पठारी है और तेज धूप होने पर गर्मी और सर्दी दोनों समानुपात में असर दिखाएगी।
इसके अलावा, प्रदूषण इसके मुख्य कारकों में से एक है। साथ ही बंगाल की खाड़ी में हलचल झारखंड के मौसम में परिवर्तन का मुख्य कारण है।
सवाल : क्या यही कारण है कि दिन में गर्मी और रात में सर्दी का असर रहता है।
जवाब : ऐसा नहीं है मार्च महीने के अंत तक ऐसा अहसास होगा लेकिन अप्रैल और मई में तेज गर्मी का असर देखने को मिलेगा। इसमें हरियाली प्रमुख घटक है।
रांची अधिक ऊंचाई पर अवस्थित है और रात में बहने वाली हवा में नमी होने के कारण सर्दी का असर देखने को मिल रहा है।
सवाल : सिमटती हरियाली किस तरह अपना असर डालती है।
विज्ञानी : सिमटती हरियाली का ही असर है कि गर्मी समय से पूर्व रांची व आसपास के जिलों में असर दिखाना शुरू कर देती है। जबकि पूर्व में ऐसा नहीं होता था।
हरियाली किसी भी क्षेत्र के भौगोलिक स्थिति को प्रभावित करती है। झारखंड का उत्तर पश्चिमी क्षेत्र पठारी है और यहां के मौसम में शुष्कता बनी रहती है। सिमट रही हरियाली और कांक्रीट के जंगल ने मौसम में बदलाव को गति दी है।
सवाल : जैसा कि आप कह रहे हैं तेज गर्मी पड़ेगी, तो क्या मानसून कमजोर होगा।
जवाब : मानसून का तेज गर्मी से कोई लेना-देना नहीं है। केरल में मानसून के बादलों का संघनन शुरू होता है। तपती गर्मी और बनने वाले जलवाष्प बादल संघनन की प्रक्रिया को गति देते हैं।
इसका असर झारखंड में कुछ खास नहीं होता है। दक्षिणी छोटानागपुर की ऊंचाई अधिक होने के कारण और रांची के बाहरी क्षेत्रों में हरियाली अधिक होने का लाभ मिलता है और संघनित बादल यहां बरसती है।
सवाल : क्या पर्यावरण में बदलाव का मुख्य कारक युद्ध भी है।
विज्ञानी : प्रकृति के साथ हो रहे छेड़छाड़ ने मौसम में परिवर्तन लाया है। लोग स्वार्थवश प्लास्टिक को इस्तेमाल में लाते हैं जो कि प्रकृति के लिए घातक है।
ऐसा नहीं है कि ईरान, अमेरिका, इजरायल, रूस और यूक्रेन में उपजे युद्ध के हालात से पर्यावरण पर असर नहीं पड़ रहा है। पिछले पांच वर्षों में बड़ा परिवर्तन देखने को मिल रहा है।
पर्यावरण में नमी की कमी और तीक्ष्ण गर्मी बढ़ने लगी है। स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो विकिरण के साथ साथ बीमारियों के फैलने का खतरा मंडराएगा।
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