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    रांची यूनिवर्सिटी का बड़ा फैसला, अब रिसर्च करने वालों को मिलेगी फेलोशिप; शिक्षकों के शोध के लिए भी आर्थिक मदद

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 09:31 AM (IST)

    रांची विश्वविद्यालय अब शोध करने वालों को रिसर्च फेलोशिप और वित्तीय सहायता प्रदान करेगा। कुलपति डॉ. सरोज शर्मा की पहल पर अकादमिक विमर्श में शोध व नवाचा ...और पढ़ें

    रांची विवि में शोध फेलोशिप और वित्तीय सहायता मिलेगी।

    रांची विवि में शोध फेलोशिप और वित्तीय सहायता मिलेगी।

    HighLights

    1. रांची विवि में शोध फेलोशिप और वित्तीय सहायता मिलेगी।

    2. कुलपति डॉ. सरोज शर्मा ने शोध व नवाचार को बढ़ावा दिया।

    जागरण संवाददाता, रांची। रांची विश्वविद्यालय में अब शोध करने वाले को रिसर्च फेलोशिप दिया जाएगा और इसके साथ ही उन्हें वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाएगी।

    विवि की कुलपति डॉ. सरोज शर्मा की पहल पर विवि में शोध और नवाचार को नई दिशा देने के उद्देश्य से शनिवार को अकादमिक विमर्श का आयोजन किया गया। विमर्श का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण, प्रासंगिक एवं प्रभावी शोध को बढ़ावा देना और विवि में सशक्त रिसर्च इकोसिस्टम विकसित करना रहा।

    इसमें डीएसपीएमयू के कुलपति एवं रिसर्च प्रमोशन एंड डेवलपमेंट कमिटी के चेयरमैन डॉ. राजीव मनोहर ने इस विमर्श की अध्यक्षता की। बैठक की शुरुआत में कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने विश्वविद्यालय में रिसर्च फेलोशिप प्रारंभ किए जाने की जानकारी साझा की।

    उन्होंने बताया कि फैकल्टी सदस्यों को शोध एवं परियोजनाओं के प्रारंभिक चरण में प्रोत्साहित करने के लिए बहुत जल्द सीड मनी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।

    उन्होंने विश्वविद्यालय के इनक्यूवेशन सेंटरको और अधिक सशक्त एवं सक्रिय बनाने पर भी जोर दिया, ताकि नवीन शोध विचारों, नवाचार एवं स्टार्टअप गतिविधियों को आवश्यक संस्थागत सहयोग मिल सके। बैठक में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विवि की प्रो. सीमा धवन, प्रो. राजेश कुमार, डॉ. विजिता सिंह, रांची विवि के कुलसचिव डॉ. आरके शर्मा सहित अन्य मौजूद थे।

    शोध को समाज, पर्यावरण, उद्योग व स्थानीय आवश्यकताओं से जोड़ने की जरूरत

    प्रो. सरोज शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय का प्रयास है कि शोध को केवल अकादमिक प्रकाशनों तक सीमित न रखते हुए उसे समाज, पर्यावरण, उद्योग और स्थानीय आवश्यकताओं से जोड़ा जाए तथा एसडीजीएस के अनुरूप ऐसे शोध को प्रोत्साहित किया जाए जिसका व्यापक सामाजिक प्रभाव हो।

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    उन्होंने कहा कि एनइपी-2020 की भावना के अनुरूप मल्टी डिसीप्लीनरी, इंटरडिसीप्लीनरी एवं क्लोबोरेटिव रिसर्च को विश्वविद्यालय की शोध संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाना आवश्यक है। प्रो. राजीव मनोहर ने शोध परियोजनाओं के लिए उपलब्ध विभिन्न फंड के अवसर पर महत्वपूर्ण एवं व्यावहारिक सुझाव दिए।

    उन्होंने फैकल्टी सदस्यों को नियमित रूप से यूजीसी की वेबसाइट तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फंडिंग एजेंसी के पोर्टल देखते रहने और काल्स और प्रपोजल्स के अनुरूप समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण प्रोजेक्ट प्रपोजल तैयार करने के लिए प्रेरित किया।