रांची नगर निगम के मेयर-डिप्टी मेयर और पार्षदों को राहत, पुराने मानदेय पर मिलेगी 4 माह का बकाया सैलरी
रांची नगर निगम के मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षदों को चार माह का बकाया मानदेय मिलेगा। नगर विकास विभाग ने पुराने मानदेय दर पर भुगतान को मंजूरी दी, जिससे ज ...और पढ़ें

रांची नगर निगम। फाइल फोटो
HighLights
मेयर, डिप्टी मेयर, पार्षदों को चार माह का बकाया मानदेय।
नगर विकास विभाग ने पुराने मानदेय दर पर भुगतान को मंजूरी दी।
मेयर को 10 हजार, डिप्टी मेयर को 9 हजार मानदेय मिलेगा।
आदिल हसन, रांची। चार माह से मानदेय का इंतजार कर रहे रांची नगर निगम के मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षदों के लिए राहत की खबर है। नगर विकास विभाग ने पुराने मानदेय की दर पर भुगतान की मंजूरी दे दी है।
इसके तहत एक सप्ताह के भीतर मार्च से जुलाई तक का चार माह का बकाया मानदेय एकमुश्त उनके खातों में भेज दिया जाएगा। पुराने मानदेय के अनुसार, मेयर को प्रति माह 10 हजार रुपये, डिप्टी मेयर को नौ हजार रुपये और पार्षदों को सात हजार रुपये मिलेंगे। वहीं, मानदेय बढ़ाने का प्रस्ताव फिलहाल अलग से विभागीय स्तर पर विचाराधीन रहेगा।
रांची नगर निगम के मेयर, डिप्टी मेयर और 53 वार्डों के पार्षदों ने 19 मार्च 2026 को पद एवं गोपनीयता की शपथ ली थी। इसके बाद से सभी जनप्रतिनिधि नियमित रूप से अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।
वार्डों में विकास कार्यों की निगरानी, लोगों की समस्याओं का समाधान, योजनाओं का निरीक्षण और निगम की बोर्ड बैठकों में भागीदारी जैसी जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद अब तक उन्हें मानदेय का भुगतान नहीं हुआ था।
नगर निगम की ओर से भेजा गया था प्रस्ताव
दरअसल, पिछला बोर्ड भंग होने के साथ ही पूर्व जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त हो गया था। नई परिषद के गठन के बाद मानदेय की नई दर तय करने के लिए नगर निगम की ओर से प्रस्ताव नगर विकास विभाग को भेजा गया था।
विभागीय निर्णय लंबित रहने के कारण भुगतान भी अटक गया। अब विभाग ने स्पष्ट किया है कि नई दर तय होने तक पूर्व से लागू मानदेय की दर पर ही भुगतान किया जाएगा।
इसके अनुसार मेयर को प्रति माह 10 हजार रुपये, डिप्टी मेयर को नौ हजार रुपये तथा प्रत्येक पार्षद को सात हजार रुपये मानदेय मिलेगा। इसके अलावा मेयर और डिप्टी मेयर को कार्यालय, वाहन, टेलीफोन सहित अन्य सुविधाएं पूर्व की व्यवस्था के अनुसार मिलती रहेंगी।
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अभी अपनी जेब से खर्च कर रहे जनप्रतिनिधि
मानदेय नहीं मिलने के कारण कई पार्षदों को अपने वार्ड के दौरे, बैठकों और अन्य जनसंपर्क गतिविधियों का खर्च अपनी जेब से उठाना पड़ रहा था। कई पार्षदों का कहना था कि जनता की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने के बावजूद उन्हें चार माह तक मानदेय का इंतजार करना पड़ा।