रांची में 'डिजिटल अरेस्ट' का बढ़ता जाल, करोड़ों की ठगी; डराकर खाते खाली कर रहे साइबर अपराधी
रांची में 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर साइबर ठगी तेजी से बढ़ रही है, जिसमें करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी हुई है। साइबर अपराधी खुद को अधिकारी बताकर लोगों को ...और पढ़ें

रांची में डिजिटल अरेस्ट का बढ़ता खतरा साइबर अपराधी डराकर खाली कर रहे खाते।
HighLights
राजधानी रांची में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करोड़ों की ठगी।
साइबर अपराधी सीबीआई, ईडी अधिकारी बनकर लोगों को डराते हैं।
ठगी से बचने के लिए सतर्क रहें और 1930 पर शिकायत करें।
जागरण संवाददाता, रांची। राजधानी रांची में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। आधिकारिक तौर पर इसका कोई एक समेकित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, लेकिन रांची साइबर थाना और झारखंड सीआईडी में दर्ज मामलों से साफ है कि दर्जनों लोग इस तरह की ठगी का शिकार हो चुके हैं और करोड़ों रुपये गंवा चुके हैं।
साइबर अपराधियों ने बुजुर्गों, सेवानिवृत्त अधिकारियों, कारोबारियों और यहां तक कि सीबीआई अधिकारी के परिवार को भी निशाना बनाया है। हालिया मामलों में 73 वर्षीय कंचन सरकार से 5.20 लाख रुपये की ठगी शामिल है।
30 मार्च को उन्हें अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप काल आया। काल करने वाले ने खुद को मुंबई क्राइम डिपार्टमेंट का अधिकारी बताया और कंचन सरकार का नाम हर्षद मेहता केस से जुड़ा होने की बात कही। कार्रवाई और गिरफ्तारी का डर दिखाकर उन्हें दो दिनों तक डिजिटल निगरानी में रखा गया और अलग-अलग खातों में रुपये ट्रांसफर कराए गए।
रांची में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी का इससे कहीं बड़ा मामला भी सामने आ चुका है। एक सेवानिवृत्त अधिकारी से मनी लान्ड्रिंग मामले में फंसाने का डर दिखाकर 2.27 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। वहीं एक सीबीआई अधिकारी की पत्नी से नकली अधिकारी बनकर 59.44 लाख रुपये की ठगी की गई।
एक कारोबारी से 1.67 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में दो दिन पहले मुंबई पुलिस ने रांची के बरियातू और पुंदाग इलाके से दो आरोपित जगेश्वर महतो और जाबिर हुसैन को गिरफ्तार किया।
इसके अलावा एक बुजुर्ग से 300 करोड़ रुपये के घोटाले में फंसाने की धमकी देकर 48.88 लाख रुपये और दूसरे मामले में डिजिटल अरेस्ट की धमकी देकर 10 लाख रुपये ठगने की शिकायत सामने आ चुकी है।
हर साइबर अपराधी का तरीका एक जैसा
साइबर अपराधियों का तरीका लगभग एक जैसा है। वे खुद को सीबीआई, ईडी या पुलिस अधिकारी बताकर पीड़ित को डराते हैं। कभी कूरियर में ड्रग्स या फर्जी पासपोर्ट मिलने तो कभी बैंक खाते के मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल होने की बात कही जाती है।
खबरें और भी
इसके बाद वीडियो कॉल पर पुलिस स्टेशन या अदालत जैसा माहौल बनाकर पीड़ित को कैमरे के सामने रहने और किसी से संपर्क नहीं करने का निर्देश दिया जाता है। फिर जांच या केस खत्म करने के नाम पर रकम किसी कथित सरकारी या जांच खाते में जमा कराने को कहा जाता है।
झारखंड पुलिस और सीआईडी ऐसे गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। प्रतिबिंब ऐप और केंद्रीय गृह मंत्रालय के आई 4सी तंत्र के माध्यम से संदिग्ध बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और साइबर नेटवर्क पर कार्रवाई की जा रही है।
ठगों से बचने के ये हैं उपाए
ठगी से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि किसी भी फोन काल पर डरकर पैसे ट्रांसफर न करें। कोई भी जांच एजेंसी वीडियो काल पर डिजिटल अरेस्ट करके पैसे जमा कराने का वैध आदेश नहीं देती। सीबीआई, ईडी या पुलिस के नाम पर धमकी मिलने पर कॉल काटकर संबंधित विभाग के आधिकारिक नंबर से सत्यापन करें।
बैंक खाते, ओटीपी, एटीएम, यूपीआई पिन और निजी दस्तावेजों की जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को न दें। ठगी होने पर तुरंत 1930 पर साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की सूचना दें और साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।