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    रांची एयरपोर्ट पर स्टेट हैंगर के पास बनेगा जोन का पहला एप्रन पार्किंग, डीजीसीए से मांगी गई अनुमति

    Updated: Fri, 31 Jul 2026 07:10 AM (GMT+05:30)

    रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर स्टेट हैंगर के पास पूर्वी क्षेत्र का पहला अत्याधुनिक एप्रन पार्किंग बनाने की तैयारी है। नागर विमानन विभाग ने एयरपोर्ट ...और पढ़ें

    डीजीसीए और अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा मानकों के अनुरूप होगा निर्माण।

    डीजीसीए और अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा मानकों के अनुरूप होगा निर्माण।

    HighLights

    1. रांची एयरपोर्ट पर पहला अत्याधुनिक एप्रन पार्किंग बनेगा।

    2. वीवीआईपी उड़ानों के लिए सुरक्षित और सुगम संचालन होगा।

    3. डीजीसीए की अनुमति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू होगा।

    अमित सिंह, रांची। बिरसा मुंडा एयरपोर्ट परिसर में राज्य सरकार के स्टेट हैंगर के समीप पूर्वी क्षेत्र का पहला अत्याधुनिक एप्रन पार्किंग विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार के नागर विमानन विभाग ने एयरपोर्ट प्रबंधन से निर्माण कराने का आग्रह किया है। प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के लिए नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) से आवश्यक अनुमति मांगी गई है।

    मंजूरी मिलते ही विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार कराया जाएगा, जिसके बाद तकनीकी स्वीकृति, टेंडर और निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी।

    प्रस्तावित एप्रन पार्किंग डीजीसीए की सुरक्षा एवं संचालन संबंधी गाइडलाइन के अनुरूप एयरपोर्ट की चहारदीवारी के भीतर स्टेट हैंगर के निकट विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य वीवीआईपी और विशेष उड़ानों के संचालन को अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और सुगम बनाना है।

    प्रस्तावित एप्रन की क्या है विशेषता

    प्रस्तावित एप्रन पर विमान खड़ा होने के साथ ही उसके समीप वीवीआईपी वाहनों की भी पार्किंग की व्यवस्था रहेगी। इससे यात्रियों को टर्मिनल भवन तक लाने-ले जाने की अतिरिक्त आवश्यकता नहीं पड़ेगी और सुरक्षा घेरा बनाए रखते हुए सीधे विमान तक आवागमन संभव होगा।

    राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री तथा अन्य विशिष्ट अतिथियों के दौरे के दौरान यह सुविधा विशेष रूप से उपयोगी साबित होगी।वर्तमान व्यवस्था में विशेष विमानों के आगमन पर वाहनों की आवाजाही और विमान की पार्किंग के लिए अलग-अलग प्रबंधन करना पड़ता है।

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    नया एप्रन बनने के बाद विमान, ग्राउंड सपोर्ट उपकरण और अधिकृत वाहनों के संचालन के लिए एक समर्पित क्षेत्र उपलब्ध होगा। इससे एयरसाइड संचालन अधिक सुव्यवस्थित होगा, विमान की ग्राउंड हैंडलिंग में तेजी आएगी और सुरक्षा मानकों का बेहतर पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    अनुमति के बाद शुरू होगा सर्वे का काम

    डीजीसीए से अनुमति मिलने के बाद सबसे पहले स्थल का तकनीकी सर्वे कराया जाएगा। इसके आधार पर डीपीआर तैयार होगी, जिसमें एप्रन की क्षमता, पेवमेंट स्ट्रेंथ, ड्रेनेज, एयरफील्ड ग्राउंड लाइटिंग, सुरक्षा घेरा, वाहन मार्ग और अन्य एयरसाइड सुविधाओं का विस्तृत डिजाइन शामिल रहेगा। इसके बाद प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति, निविदा प्रक्रिया और निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

    क्या होता है एप्रन?

    एप्रन एयरपोर्ट के एयरसाइड का वह मजबूत पक्का क्षेत्र होता है, जहां विमान को खड़ा किया जाता है। इसी स्थान पर यात्रियों का चढ़ना-उतरना, ईंधन भरना, सामान की लोडिंग-अनलोडिंग, तकनीकी जांच और वीवीआईपी मूवमेंट जैसी गतिविधियां संचालित होती हैं।

    रनवे से टैक्सीवे के माध्यम से विमान सीधे एप्रन तक पहुंचता है। यह क्षेत्र पूरी तरह डीजीसीए और अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा मानकों के अनुरूप बनाया जाता है।

    कैसे बनता है एप्रन, क्या होती है इसकी तकनीक

    • एप्रन का निर्माण सामान्य सड़क या पार्किंग की तरह नहीं होता। इसे विमान के अत्यधिक भार और जेट ब्लास्ट को सहन करने लायक बनाया जाता है।
    • सबसे पहले जियोटेक्निकल सर्वे कर मिट्टी की भार वहन क्षमता की जांच की जाती है। इसके बाद कमजोर मिट्टी हटाकर मजबूत सब-ग्रेड और ग्रेन्युलर सब-बेस तैयार की जाती है।
    • ऊपर ड्राई लीन कंक्रीट तथा उच्च क्षमता वाली पेवमेंट क्वालिटी कंक्रीट (पीक्यूसी) या विशेष एयरफील्ड पेवमेंट बिछाई जाती है, जो 70 से 100 टन या उससे अधिक वजन वाले विमान का भार सह सके।
    • सतह पर पानी जमा न हो, इसके लिए वैज्ञानिक ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाता है।
    • एप्रन पर विमान स्टैंड मार्किंग, सेफ्टी लाइन, एयरफील्ड ग्राउंड लाइटिंग, अर्थिंग सिस्टम, फायर हाइड्रेंट, सीसीटीवी और सुरक्षा बैरियर लगाए जाते हैं।
    • पूरे डिजाइन में विमान के व्हील लोड, विंग क्लीयरेंस, जेट ब्लास्ट और टर्निंग रेडियस का विशेष ध्यान रखा जाता है।

    यह परियोजना पूरी होने के बाद रांची एयरपोर्ट पर वीवीआईपी उड़ानों के संचालन की क्षमता बढ़ेगी। साथ ही एयरसाइड प्रबंधन आधुनिक मानकों के अनुरूप होगा। भविष्य में विशेष विमान संचालन के लिए अलग एवं सुरक्षित आधारभूत संरचना उपलब्ध हो सकेगी। एप्रन निर्माण के लिए एयरपोर्ट प्रबंधन को प्रपोजल दिया गया है।
    -कैप्टन एसपी सिन्हा, निदेशक, नागर विमानन विभाग