मनी लांड्रिंग मामले के आरोपित राजीव झावर को मिली सिंगापुर यात्रा की अनुमति, सरयू राय दस्तावेज लीक केस में भी सुनवाई
ईडी की विशेष अदालत ने उषा मार्टिन के प्रबंध निदेशक राजीव झावर को मां के इलाज के लिए सिंगापुर जाने की अनुमति दी है, वे लौह अयस्क के अवैध खनन और मनी लां ...और पढ़ें

राजीव झावर को सिंगापुर जाने की मिली अनुमति। (तस्वीर: इंटरनेट मीडिया)
HighLights
राजीव झावर को मां के इलाज हेतु सिंगापुर जाने की अनुमति।
अवैध खनन, मनी लांड्रिंग मामले में हैं आरोपित।
सरयू राय दस्तावेज लीक मामले में कर्मचारी पर सुनवाई।
राज्य ब्यूरो, रांची। ईडी की विशेष अदालत ने लौह अयस्क के कथित अवैध खनन और मनी लांड्रिंग मामले में उषा मार्टिन समूह के प्रबंध निदेशक राजीव झावर को 10 जून से 10 जुलाई तक सिंगापुर यात्रा की अनुमति प्रदान की है।
अदालत ने इस अवधि के लिए उनका पासपोर्ट रिलीज करने का भी आदेश दिया है। राजीव ने अपनी मां के इलाज के लिए सिंगापुर जाने की अनुमति मांगी थी। इससे पहले उन्हें सीबीआइ की विशेष अदालत से भी विदेश यात्रा की अनुमति मिल चुकी है।
उन्होंने अनुमति याचिका 23 मई को दाखिल की थी। मामला पश्चिम सिंहभूम स्थित घाटकुरी लौह अयस्क खदान से जुड़ा है। आरोप है कि उषा मार्टिन ने निर्धारित सीमा से अधिक लौह अयस्क का खनन किया, जिससे करीब 190 करोड़ रुपये के आयरन ओर से संबंधित अनियमितता हुई। 20 सितंबर 2016 को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
दस्तावेज लीक मामले में कर्मचारी को आरोपित बनाने पर सुनवाई पांच को
विधायक सरयू राय से जुड़े कथित गोपनीय दस्तावेज लीक मामले में अभियोजन पक्ष ने एक कर्मचारी को भी सह-आरोपित बनाने की मांग की है। एमपी-एमएलए की विशेष अदालत में सीआरपीसी की धारा 319 के तहत याचिका दाखिल कर कर्मचारी शंभू सिंह को आरोपित बनाने की अनुमति मांगी गई है, जिस पर सोमवार को सुनवाई हुई।
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अदालत ने अगली सुनवाई के लिए पांच जून की तिथि निर्धारित की है। अभियोजन पक्ष का कहना है कि मामले में अब तक चार गवाहों ने अपने बयान में बताया है कि उन्होंने शंभू सिंह को गोपनीय दस्तावेज का फोटो लेते हुए देखा था। स्वास्थ्य विभाग के अवर सचिव ने मई 2022 में डोरंडा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
आरोप है कि गोपनीय दस्तावेजों की चोरी कर उन्हें सार्वजनिक किया गया। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर विधायक सरयू राय ने प्रेस कान्फ्रेंस कर कोरोना काल में कोविड प्रोत्साहन राशि के वितरण में अनियमितता और घोटाले का आरोप लगाया था। उन्होंने तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता पर नियमों को दरकिनार कर 60 लोगों को अवैध रूप से भुगतान कराने का आरोप लगाया था।