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    PM Poshan Yojana: 4 महीने से कुकिंग कॉस्ट का बजट ठप, कुबेर पोर्टल के फेर में अटका नौनिहालों का निवाला

    Updated: Sun, 02 Aug 2026 07:00 AM (IST)

    झारखंड में पीएम पोषण योजना के तहत स्कूलों को चार महीने से कुकिंग कॉस्ट नहीं मिली है, जिससे मध्याह्न भोजन के संचालन में भारी दिक्कतें आ रही हैं। ...और पढ़ें

    स्कूलों को मध्याह्न भोजन संचालित करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

    स्कूलों को मध्याह्न भोजन संचालित करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

    HighLights

    1. कुबेर पोर्टल की नई प्रणाली से भुगतान में देरी।

    2. शिक्षक उधार लेकर चला रहे मध्याह्न भोजन योजना।

    राज्य ब्यूरो, रांची झारखंड में पीएम पोषण योजना (मध्याह्न भोजन योजना) के तहत सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले भोजन पर आर्थिक संकट गहरा गया है। 
     
    चालू वित्तीय वर्ष (2026-27) के चार महीने बीत जाने के बावजूद राज्य के स्कूलों को अब तक कुकिंग कॉस्ट की राशि आवंटित नहीं की गई है। इस वजह से स्कूलों को मध्याह्न भोजन संचालित करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
     
    बता दें कि कुकिंग कॉस्ट की इस राशि का उपयोग बच्चों के भोजन के लिए ईंधन (गैस/लकड़ी), हरी सब्‍जी, दाल, तेल, नमक और मसाले खरीदने के लिए किया जाता है।
     

    उधारी और डर के साये में पक रहा खाना

    झारखंड मध्याह्न भोजन प्राधिकरण ने पूर्व में निर्देश जारी किया था कि यदि कुकिंग कॉस्ट की राशि न मिले, तो स्कूल में उपलब्ध अन्य मदों के फंड से भोजन की व्यवस्था की जाए। 
     
    साथ ही यह सख्त हिदायत भी दी गई है कि किसी भी स्थिति में मध्याह्न भोजन एक दिन के लिए भी बंद नहीं होना चाहिए। हालांकि, अधिकांश स्कूलों के पास अन्य मदों में भी फंड उपलब्ध नहीं है। 
     
    ऐसे में प्रशासनिक कार्रवाई के डर से प्रधानाध्यापक और प्रभारी शिक्षक स्थानीय दुकानदारों से उधारी पर राशन, सब्जियां व अन्य सामग्री लेकर भोजन बनवा रहे हैं। लगातार महीनों से भुगतान न होने के कारण अब दुकानदारों ने भी उधार देने से हाथ खींचना शुरू कर दिया है।
     

    कुबेर पोर्टल और नए सिस्टम से फंसा पेंच

    दरअसल, पीएम पोषण योजना समेत कई केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं में राशि आवंटन और भुगतान की प्रक्रिया को डिजिटल व पारदर्शी बनाने के लिए व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है। 

    •     पहले की व्यवस्था: कुकिंग कॉस्ट का पैसा सीधे सरस्वती वाहिनी प्रबंध समिति के बैंक खाते में भेजा जाता था।
    •     नई व्यवस्था: अब यह राशि सीधे दुकानदारों और विक्रेताओं के खातों में कुबेर पोर्टल के माध्यम से डिजिटल रूप से ट्रांसफर की जाएगी।
    इस नई तकनीकी प्रणाली के पूरी तरह से सेटअप न हो पाने के कारण राशि जारी करने में देरी हो रही है। इसी वजह से केंद्र सरकार से भी चालू वित्तीय वर्ष की पहली किस्त अब तक जारी नहीं हो सकी है।
     

    प्राधिकरण का आश्वासन: एक सप्ताह में निकलेगा हल

    मध्याह्न भोजन प्राधिकरण के अधिकारियों ने स्थिति पर सफाई देते हुए कहा है कि केंद्र सरकार से स्वीकृति आदेश प्राप्त हो गया है।

    तकनीकी अड़चनों को दूर करते हुए एक सप्ताह के भीतर वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए राशि जारी कर दी जाएगी, ताकि शिक्षकों और बच्चों को आगे परेशानी न उठानी पड़े।