साधना और सेवा का शीर्ष सम्मान, दिल्ली के मंच पर सम्मानित हुए पद्मश्री अशोक भगत, स्व. डॉ. रघुनाथ और स्व. राजनारायण
स्वरात्मिका फाउंडेशन ट्रस्ट ने नई दिल्ली में 'काशी-रत्न सम्मान 2026' और 'सहजानंद सरस्वती सेवाश्री सम्मान 2026' का आयोजन किया। पद्मश्री ...और पढ़ें

HighLights
नई दिल्ली में 'काशी-रत्न' और 'सेवाश्री' सम्मान समारोह आयोजित।
पद्मश्री अशोक भगत को 'काशी-रत्न सम्मान' से नवाजा गया।
20 विशिष्ट हस्तियों को 'सहजानंद सरस्वती सेवाश्री' सम्मान मिला।
जागरण संवाददाता, रांची। स्वरात्मिका फाउंडेशन ट्रस्ट वाराणसी की ओर से रविवार को पं. लाल बहादुर राय की स्मृति में ‘काशी-रत्न सम्मान 2026’ एवं ‘सहजानंद सरस्वती सेवाश्री सम्मान 2026’ का आयोजन किया गया। यह आयोजन नई दिल्ली में स्थित कांस्टिट्यूशन क्लब आफ इंडिया में किया गया। कार्यक्रम सीसीआरटी, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं स्वरात्मिका फाउंडेशन ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ।
इस अवसर पर विकास भारती के सचिव पद्मश्री अशोक भगत, स्व. डा. रघुनाथ सिंह एवं स्व. ‘लोकबंधु’ राजनारायण को ‘काशी-रत्न सम्मान 2026 से सम्मानित किया गया। वहीं समाजसेवा, शिक्षा, चिकित्सा, संगीत, पर्यावरण, सांस्कृतिक संरक्षण एवं लोककल्याण जैसे विविध क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 20 विशिष्ट व्यक्तित्वों को ‘सहजानंद सरस्वती सेवाश्री सम्मान 2026’ प्रदान किया गया। काशी स्थित राजगुरुमठ के पीठाधीश्वर स्वामी अनंतानन्द सरस्वती भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
मौके पर उपस्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष पद्मभूषण रामबहादुर राय ने अशोक भगत से जुड़े संस्मरण साझा करते हुए कहा कि अशोक भगत ने हमेशा आदिवासियों के उत्थान के लिए कार्य किया। वह कठिन परिस्थितियों में भी कार्य करते रहे।
उत्तर प्रदेश में विद्यार्थी परिषद के प्रांत संगठन मंत्री रहते हुए उनके कार्यों को भी साझा किया। उन्होंने युवाओं को अपने जड़ों से जुड़े रहने और अपने राष्ट्र के आदर्श स्वरूप महान लोगों को स्मरण करते रहने का संदेश दिया।
आ्रयोजन में प्रो. डॉ. सुनील डबास, द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित, पूर्व राजदूत एवं भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी ओमप्रकाश गुप्ता, आचार्य अनिल कुमार राय, कुलपति, महामना ज्योतिबाफुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय, प्रो. सुनील कुमार विश्वकर्मा, अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश राज्य ललित कला अकादमी सहित अनेक प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, साहित्यकारों, कला-संस्कृति विशेषज्ञों, समाजसेवियों एवं सार्वजनिक जीवन से जुड़े विशिष्ट व्यक्तित्वों की उपस्थिति रही।
मौके पर उपस्थित वक्ताओं ने काशी को भारतीय सभ्यता की उस जीवंत सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बताया, जहां ज्ञान और साधना, शास्त्र और लोक, कला और अध्यात्म तथा परंपरा और नवचेतना का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। स्वरात्मिका फाउंडेशन ट्रस्ट, वाराणसी के संस्थापक-निदेशक डा. एसआरके राय शर्मा (डा. श्वेता) ने कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी।
