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प्रशिक्षित सहायक आचार्य नियुक्ति में नार्मलाइजेशन पर JSSC ने झारखंड हाई कोर्ट में दिया जवाब

Published: Tue, 08 Sep 2026 11:09 AM (IST)

झारखंड हाई कोर्ट में प्रशिक्षित सहायक आचार्य परीक्षा में नार्मलाइजेशन फार्मूले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। जेएसएससी ...और पढ़ें

जेएसएससी की ओर से दाखिल किया गया जवाब।

जेएसएससी की ओर से दाखिल किया गया जवाब।

HighLights

  1. नार्मलाइजेशन फार्मूले पर झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई।

  2. जेएसएससी ने अदालत में अपना जवाब दाखिल किया।

  3. मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में प्रशिक्षित सहायक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में नार्मलाइजेशन फार्मूला लागू करने को चुनौती देने वाली याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की ओर से अदालत में जवाब दाखिल किया गया।

इसके बाद अदालत ने अगली सुनवाई 28 सितंबर को निर्धारित की है। पिछली सुनवाई में अदालत ने जेएसएससी से आठ बिंदुओं पर जवाब मांगा था। सोमवार को आयोग की ओर से इन बिंदुओं पर जवाब दाखिल किया गया।

प्रार्थियों की ओर से अदालत को बताया गया कि सहायक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में जेएसएससी द्वारा लागू किया गया नार्मलाइजेशन फार्मूला सही नहीं है। यह नियमों के विरुद्ध है। नियुक्ति नियमावली में नार्मलाइजेशन का कोई प्रविधान नहीं किया गया है।

ऐसे में परीक्षा परिणाम में नार्मलाइजेशन लागू करना उचित नहीं है। वहीं, जेएसएससी की ओर से कहा गया कि परीक्षा के विज्ञापन में ही नार्मलाइजेशन लागू किए जाने की जानकारी दी गई थी। इस संबंध में गिरधर राउत एवं अन्य ने याचिका दाखिल की गई है।

प्रशिक्षित सहायक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के नार्मलाइजेशन मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी, जिसमें जेएसएससी ने अदालत के आठ बिंदुओं पर अपना जवाब दाखिल कर दिया है। प्रार्थी इस प्रक्रिया को नियमों के विरुद्ध बता रहे हैं, जबकि आयोग का कहना है कि विज्ञापन में इसकी जानकारी पहले ही दे दी गई थी।

नार्मलाइजेशन प्रक्रिया क्या है?

  • परिभाषा: जब कोई परीक्षा एक से अधिक पालियों (शिट्स) या दिनों में आयोजित की जाती है और हर पाली के प्रश्न पत्रों का कठिनाई स्तर (Difficulty Level) अलग-अलग होता है, तब सभी अभ्यर्थियों के अंकों को एक समान और न्यायसंगत स्तर पर लाने के लिए जिस गणितीय फॉर्मूले का उपयोग किया जाता है, उसे नार्मलाइजेशन कहा जाता है।
  • जरूरत क्यों पड़ती है: यदि किसी पाली का पेपर कठिन और दूसरी पाली का आसान आ जाए, तो आसान पेपर वाले छात्रों को अनुचित लाभ मिल सकता है। नार्मलाइजेशन यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी छात्र को कठिन या आसान प्रश्न पत्र मिलने का कोई लाभ या नुकसान न हो।
  • कार्य करने का तरीका: इसके तहत विभिन्न पालियों के औसत अंकों और उच्चतम अंकों का सांख्यिकीय विश्लेषण (Statistical Analysis) किया जाता है। इसके आधार पर कठिन शिफ्ट के अंकों को बढ़ाया जाता है और आसान शिफ्ट के अंकों को संतुलित किया जाता है ताकि सबका मूल्यांकन एक मानक स्तर पर हो सके।
  • विवाद का कारण: सहायक आचार्य परीक्षा के मामले में मुख्य विवाद इस बात पर है कि क्या चयन नियमावली में इसका स्पष्ट प्रावधान था या नहीं, क्योंकि प्रार्थियों का तर्क है कि बिना मूल नियमावली संशोधन के विज्ञापन में इसे जोड़ना सही नहीं है।