झारखंड में कहीं भी बालू घाट का टेंडर नहीं, फिर जमकर हो रहा अवैध बालू खनन; सरकार को भारी राजस्व का नुकसान
रांची और झारखंड में प्रतिदिन लाखों टन बालू की अवैध खपत हो रही है, जिससे राज्य सरकार को आठ महीने से एक साल से अधिक समय से कोई राजस्व नहीं मिल रहा है। ब ...और पढ़ें
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प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर।
HighLights
रांची में प्रतिदिन 20 हजार टन बालू की खपत।
आठ महीने से सरकार को बालू से राजस्व नहीं।
बालू घाटों के टेंडर प्रक्रिया अभी भी अधूरी।
राज्य ब्यूरो, रांची। राजधानी रांची में प्रतिदिन 500 हाईवा बालू की अनुमानित खपत होती है। 40 टन प्रति हाइवा के हिसाब से देखें तो प्रतिदिन लगभग 20 हजार टन बालू की खपत रांची में ही हो रही है। प्रदेश के सभी जिलों को मिलाकर देख लें तो आंकड़ा प्रतिदिन ढाई से तीन लाख टन से कहीं अधिक है।
इतनी अधिक खपत होने के बावजूद राज्य सरकार के खाते में चौवन्नी तक नहीं पहुंच रही है। यह हाल लगभग आठ महीनों से चल रहा है।
कुछ जिलों में एक साल से भी अधिक समय से बालू घाटों पर लूट मची हुई है। सबसे बड़ी बात यह है कि सरकार को किसी भी सोर्स से एक पैसा भी नहीं मिलता है।
झारखंड में बालू घाटों को झारखंड राज्य खनिज विकास निगम से वापस लेने के बाद कहीं भी टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। इस कारण से बालू घाटों के संचालन की जिम्मेदारी एजेंसियों को नहीं दी गई है।
खान निदेशालय ने बालू खनन को लेकर निर्धारित मानकों के अनुरूप टेंडर कराने को लेकर उपायुक्तों को निर्देश दे दिए हैं। इस पर अमल करते हुए उपायुक्तों को टेंडर कार्य पूर्ण करना है।
अंतिम सूचना तक राज्य के कुल 444 घाटों में से 298 घाटों पर आक्शन की कार्रवाई पूर्ण कर ली गई है और 146 घाटों के लिए यह प्रक्रिया अभी चल रही है।
अब जिन घाटों के लिए कार्रवाई पूर्ण कर ली गई है वहां पर्यावरणीय स्वीकृति और अन्य प्रशासनिक कार्यों को पूर्ण कराने की जिम्मेदारी उपायुक्तों की है।
जिलों में उपायुक्त के स्तर से पूरी प्रक्रिया अटकी हुई है जिस कारण से बालू घाटों का टेंडर पूर्ण नहीं हो सका है। टेंडर नहीं होने के बावजूद सभी जिलों में बालू की उपलब्धता दिख रही है और जाहिर से बात है कि पूरा का पूरा कारोबार अवैध है।
कैटेगरी एक पर ग्राम सभा का अधिकार
झारखंड में पेसा (पंचायत एक्सटेंशन टू शेड्यूल एरिया) नियमावली के तहत पांच हेक्टेयर से कम के बालू घाटों (कैटेगरी-1) पर ग्रामसभा का पूर्ण नियंत्रण होता है।
इन घाटों से ग्रामीण स्थानीय उपयोग के लिए ग्राम पंचायत की देखरेख में बालू उठाव कर सकते हैं, जिस पर कोई रायल्टी या टैक्स नहीं लगेगा। इन घाटों से बालू का उपयोग केवल घरेलू, सामुदायिक, या सरकारी योजनाओं के लिए किया जा सकता है। इस पर किसी प्रकार का टैक्स नहीं लगता है।
इन जिलों में चल रही नीलामी प्रक्रिया
| जिले का नाम | घाटों की संख्या |
|---|---|
| देवघर | 32 |
| सरायकेला | 05 |
| पलामू | 18 |
| सिमडेगा | 13 |
| गढ़वा | 18 |
| चाईबासा | 07 |
| कोडरमा | 33 |
| गिरिडीह | 07 |
| लोहरदगा | 13 |
| कुल | 146 |
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