महिला सुपरवाइजर नियुक्ति मामले में JSSC को झारखंड हाई कोर्ट से झटका, एकल पीठ के आदेश पर लगी रोक
झारखंड हाई कोर्ट ने महिला सुपरवाइजर नियुक्ति मामले में JSSC की अपील पर एकल पीठ के आदेश पर रोक लगाई। ...और पढ़ें

झारखंड हाईकोर्ट की फाइल फोटो। जागरण
HighLights
JSSC महिला सुपरवाइजर नियुक्ति मामले में हाई कोर्ट ने लगाई रोक।
हाई कोर्ट ने 32 अभ्यर्थियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने महिला सुपरवाइजर नियुक्ति मामले में एकलपीठ के आदेश के खिलाफ दाखिल अपील पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने एकल पीठ के आदेश पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।
एकल पीठ ने अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी रद करने के जेएसएससी के फैसले को निरस्त कर उन्हें नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने के आदेश दिया था। इसके खिलाफ जेएसएससी की ओर से हाई कोर्ट में अपील दाखिल की गई थी। मामले की अगली सुनवाई छह अक्टूबर को होगी। इस दौरान अदालत ने 32 अभ्यर्थियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
मामला महिला सुपरवाइजर के 444 पदों पर नियुक्ति से जुड़ा है। नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान दस्तावेज सत्यापन में त्रुटि बताते हुए जेएसएससी ने कुछ अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी रद कर दी थी। इसके खिलाफ अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
एकल पीठ ने सुनवाई के बाद जेएसएससी के उस फैसले को निरस्त कर दिया था, जिसमें दस्तावेज सत्यापन के दौरान अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी रद की गई थी। कोर्ट ने जेएसएससी को संबंधित अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया था। इसी आदेश को जेएसएससी ने खंडपीठ में चुनौती दी है
तीन विषयों में आनर्स की डिग्री को लेकर विवाद
एकल पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान अभ्यर्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार और तान्या सिंह की ओर से कहा गया था कि महिला सुपरवाइजर के 444 पदों के लिए जारी विज्ञापन और नियुक्ति नियमावली में यह शर्त नहीं है कि अभ्यर्थी के पास समाजशास्त्र (सोशियोलॉजी), मनोविज्ञान (साइकोलॉजी) और गृह विज्ञान (होम साइंस) में तीन वर्षीय आनर्स की डिग्री होनी चाहिए।
अभ्यर्थियों का कहना था कि नियुक्ति के लिए इन तीनों विषयों के साथ स्नातक होना जरूरी था। उन्होंने तीनों विषयों में अलग-अलग आनर्स की डिग्री नहीं ली है, लेकिन स्नातक की पढ़ाई के दौरान तीनों विषयों का अध्ययन तीन वर्षों तक किया है। इसी आधार पर उन्होंने अपनी उम्मीदवारी स्वीकार करने और नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने की मांग की थी।
